Gall Bladder Stones – पित्ताशय की पथरी

Gall Bladder Stones को पित्ताशय की पथरी कहा जाता है पेट के रोगों में यह भी एक आम रोग है । हालांकि वर्तमान में इस तरह का रोग किसी भी उम्र के मनुष्य को अपना शिकार बना सकता है लेकिन Gall Bladder Stones सामान्य तौर पर या अधिकतर 40 वर्ष से 50 वर्ष उम्र की स्त्रियों एवं पुरूषों में यह रोग पाया जाता है | जहाँ तक पित्त की थैली अर्थात पित्ताशय की शरीर में उपस्थिति का सवाल है यह पित्त की थैली शरीर में जिगर के साथ जुड़ी हुई होती है । जिसका मुख्य कार्य जिगर में बनने वाले पित्त (bile) का संग्रह करना होता है । इसलिए आज हम अपने इस लेख के माध्यम से Gall Bladder Stones या पित्ताशय की पथरी के बारे में सम्पूर्ण वार्तालाप जैसे इसके होने के संभावित कारण, लक्षण, इस रोग के लिए होने वाली जांचे, एवं पित्ताशय की पथरी के ईलाज पर करेंगे |

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पित्ताशय की पथरी के कारण (Cause of Gall Bladder Stones in Hindi):

पित्ताशय की पथरी या Gall Bladder Stones के होने के कुछ संभावित कारण निम्नलिखित हैं |

  • पित्त की थैली में कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ने तथा बाईल एसिड व फोस्फोलिपिड की मात्रा कम होने से कोलेस्ट्रोल के क्रिस्टल बन जाते हैं। ये क्रिस्टल इकट्ठे होकर पथरी का रूप धारण कर लेते हैं जिसे पित्ताशय की पथरी कहा जाता है |
  • इसके अलावा पित्त की थैली अर्थात पित्ताशय में संक्रमण होने के बाद कोलेस्ट्रोल तथा बाइल साल्ट, कोशिकाओं के चारों ओर एकत्र होने लगते हैं। तथा आगे चलकर इनसे भी पथरी बनने की संभावना रहती है |
  • यदि किसी कारणवश जैसे कि गर्भावस्था या गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से पित्त की थैली की गतिशीलता कम हो जाए तो पित्त गाढ़ा हो सकता है । बाद में यह गाढ़ा पित्त पित्ताशय की पथरी अर्थात Gall Bladder Stones का रूप ले सकता है ।
  • यह उपर्युक्त स्थिति तब भी पैदा हो सकती है जब एक लम्बे समय तक मुहं से भोजन न लिया गया हो |
  • यदि खून ज्यादा जल्दी नष्ट होने लगे (इस स्थिति या रोग को Haemolysis के नाम से जाना जाता है ), इस अवस्था में शरीर में Bilirubin की मात्रा सामान्य से ज्यादा हो जाती है तथा जो बाद में पथरी बनाने में सहायक हो सकती है ।

पित्ताशय की पथरी के लक्षण (Symptoms of Gall Bladder Stones in Hindi):

यह आवश्यक नहीं है की जिस व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण हों उसे पित्ताशय की पथरी की ही समस्या हो, हो सकता है ये निम्नलिखित लक्षण किसी और कारणवश भी हो, लेकिन इसके बावजूद कुछ संभावित लक्षणों की लिस्ट निम्नवत है |

  • पेट के दाहिने या ऊपरी हिस्से तथा मध्य भाग में अचानक तेज दर्द उठना |
  • उल्टी आना, भारीपन, बैचैनी, खट्टे डकार इत्यादि भी पित्ताशय की पथरी के लक्षण हो सकते हैं |
  • मुहं में खारा पानी, खाना ठीक से हजम न होना इत्यादि भी Gall Bladder Stones के लक्षण हो सकते हैं |
  • कुछ रोगियों में अचानक पेट दर्द, ठण्ड के साथ बुखार होना, उल्टी इत्यादि भी हो सकते हैं।
  • अगर पत्थरी पित्त की चैनल में फंस जाए तो इसके कारण पीलिया भी हो सकता है ।
  • कुछ रोगियों में पत्थरी होने के बावजूद भी कोई लक्षण नहीं होते । पित्ताशय की पथरी बिना कोई तकलीफ दिए (silent Stone) वर्षों तक पड़ी रहती है । व्यक्ति किसी अन्य रोग के लिए पेट की जांच करवाता है तो जांच में Gall Bladder Stones का अचानक से पता चलता है ।

पित्ताशय की पथरी के लिए जांच (Tests for Gall Bladder Stones):

पित्ताशय की पथरी से जूझ रहे रोगियों के पेट की सबसे महत्वपूर्ण जांच पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी है । यह जांच खाली पेट की जा सकती है जिसमे पित्त की थैली की अवस्था, दीवारों की सूजन, पत्थरी का आकार, संख्या इत्यादि का पता लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त यह जांच यह भी पता लगाती है की पत्थरी पित्त की चैनल में फंसी है या नहीं, जो की इलाज की योजना बनाने के लिए काफी मददगार साबित होता है। पेट की अल्ट्रासोनोग्राफी के अलावा  अन्य रूटीन जांचे जैसे कि TLC, DLC, पीलिया के लिए S. Bilirubin तथा जिगर की  कार्यप्रणाली  को जानने के लिए SGOT, SGPT. Alkaline Phosphatase इत्यादि जांचे भी चिकित्सक करवाने के लिए कह सकते हैं | क्योंकि इन जांचों को करवाने से ही इस रोग की पूरी जानकारी प्राप्त चिकित्सक को मिल सकती है, और उसी आधार पर चिकित्सक पित्ताशय की पथरी की ईलाज की योजना बनाने में सक्षम हो पाएंगे ।

पित्ताशय की पथरी का ईलाज (Treatment of Gall Bladder Stones):

जब कोई भी रोगी रोगी दर्द की स्थिति में चिकित्सक या अस्पताल में पहुंचता है तो उस समय चिकित्सक का जो सबसे बड़ा ध्येय होता है वह होता है समबन्धित रोगी को उस दर्द से निजात दिलवाने का इसके लिए चिकित्सक द्वारा रोगी को कुछ दर्द निवारक इंजेक्शन जैसे Buscopan, voveran im इत्यादि निर्धारित मात्रा में दिए जा सकते हैं | ज्यादा दर्द की स्थिति या उल्टी इत्यादि आने पर रोगी को अस्पताल में दाखिल कराने की जरूरत पड़ सकती है ।
यदि जांच इत्यादि से चिकित्सक को यह पता चलता है कि रोगी को संक्रमण अर्थात Infection है जिसे Gallstones With Acute CholeCystitis या Cholangitis  भी कहते हैं है तो रोगी को हस्पताल में दाखिल करके 1/V Drip, Antibiotics एवं अन्य Supportive चिकित्सा दी जा सकती है | इसके अलावा यदि रोगी को हल्का दर्द, भारीपन, खट्टे डकार इत्यादि ही है । तो ऐसे रोगी का अस्पताल के बहिरंग विभाग (0PD) में इलाज किया जा सकता है । जिसमें चिकित्सक द्वारा रोगी को कुछ दर्द निवारक दवाइयां दी जा सकती हैं |

पित्ताशय की पथरी का दवाओं द्वारा ईलाज:

चिकित्सक द्वारा पित्ताशय की पथरी अर्थात Gall Bladder Stones का ईलाज रोगी की विभिन्न जांचों का जायजा लेकर दवाओं के माध्यम से भी किया जा सकता है | इनमे रोगी को कुछ ऐसी दवाइयां दी जाती हैं जो पत्थरी को घोलने में मदद करती हैं और उसे मूत्र या शौच के रस्ते से पेट के बाहर कर देती हैं | इन दवाईयों को शुरू करने से पहले लीवर की कार्य क्षमता का पता लगाया जाना बेहद जरुरी होता है और उसके पश्चात् समय समय पर विभिन्न जांचे जैसे SGOT, SGPT. S. Proteirs, S. Bilirubin & S. Alkalinc Phosphatase इत्यादि कराते रहने चाहिए | पत्थरी घुलने के बाद भी 3 से 4 महीने तक यह इलाज जारी रखना पड़ता है 25 प्रतिशत रोगियों की दवाईयां बंद करने के एक साल के अन्दर अन्दर पत्थरी दोबारा होने की संभावना रहती है। जिन रोगियों की पत्थरी में कैलशियम जमा हो चुका है ऐसे रोगियों को दवा लेने का कोई लाभ नहीं होता इसलिए पित्ताशय की पथरी की दवाईयां शुरू करने से पहले विशेषज्ञ चिकित्सक की राय लेना अत्यंत जरूरी होता है ।

Gall Bladder Stones का सर्जरी के द्वारा ईलाज:

पित्ताशय की पथरी के लिए कौन सा ईलाज कितना प्रभावी रहेगा यह तो विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा रोगी की विभिन्न परीक्षणों का विश्लेषण करके ही बताया जाएगा | लेकिन Gall Bladder Stones के लिए दवाइयों से अधिक प्रभावी ईलाज आपरेशन को ही माना जाता है | जिन रोगियों में पत्थरी अचानक अर्थात तब पता चलती है जब वे किसी अन्य रोग की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड कर रहे होते हैं उन्हें कहा जा सकता है की वे Silent Gall Stones से ग्रसित हैं, इसलिए उन्हें तुरंत आपरेशन की कोई आवश्यकता नहीं होती । ऐसा भी हो सकता है कि यह पत्थरियां वर्षों तक ऐसे ही पड़ी रहें तथा कोई तकलीफ न दें । इसके अलावा कुछ परिस्थतियों  में इन पत्थरियों की वजह से पित्त की थैली का कैंसर होने की संभावना होती है और ये पत्थरियां खिसक कर चैनल में भी आ सकती हैं तथा कई प्रकार की परेशानियाँ जैसे कि पीलिया (Obstructive Jaundice), cholangitis, Pancreatitis इत्यादि खड़ी कर सकती हैं | इसलिए इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए पित्ताशय की पथरी अर्थात Silent Gall Bladder Stones से प्रभावित व्यक्तियों को समय समय पर पत्थरियों की अल्ट्रासाउंड से जांच करा लेनी चाहिए और जब भी चिकित्सक या सर्जन द्वारा ऑपरेशन के लिए कहा जाय ऑपरेशन करा लेना चाहिए | आम तौर पर यह ऑपरेशन दो प्रकार का होता है |

  1. Minilap Operation:

इस ऑपरेशन के अंतर्गत छोटे चीरे द्वारा पित्त की थैली निकालने की विधि, बहुत ही कम खर्च एवं कम पेचीदिगियों वाली है। यह विधि खासतौर पर पतले रोगियों में बेहद उपयोगी होती है।

  1. Laparoscopic Cholecystectomy (lapcholey):

इस प्रक्रिया को करने में दूरबीन की सहायता से पेट में चार छोटे छोटे सुराख़ किये जाते हैं तथा पेट में CO2  गैस भरने के बाद पित्त की थैली को निकाल लिया जाता है | इस प्रक्रिया को हमेशा विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही होना अनिवार्य होता है अन्यथा इसमें जो सबसे बड़ा खतरा रहता है वह यह है की इस प्रक्रिया के दौरान पित्त का चैनल जख्मी या उसमे पिन चुभ सकती है इसके अलावा जिगर की खून की नली जिसे Hepatic Artey कहा जाता है को भी नुकसान होने की संभावना होती है | Gall Bladder Stones की Treatment  की यह विधि मोटे व्यक्तियों के लिए अधिक उपयोगी है |

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