गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर एवं उसका ईलाज

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर पर बात करना इसलिए जरुरी हो जाता है क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान आने वाली जटिलताओं में हाई ब्लड प्रेशर का एक प्रमुख स्थान है | अक्सर देखा गया है की जिस क्षेत्र विशेष में या जन-समुदाय में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या अधिक पायी गई है, और उन्हीं क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पायी गई है | एक आंकड़े के मुताबिक गोरे लोगों की तुलना में काले लोगों में गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर की समस्या अधिक देखने को मिलती है |

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर:(Blood Pressure in Pregnancy)

हाई ब्लड प्रेशर चाहे किसी गर्भवती महिला को हो या अन्य किसी व्यक्ति को, इस पर ध्यान देना और इसका उपचार अति आवश्यक होता है । ऐसी कोई महिला जिसका हाई ब्लड प्रेशर अर्थात उच्च रक्तचाप रहता हो और वह गर्भ धारण करने की सोच रही हो तो उस महिला को सबसे पहले चिकित्सक से चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए । महिला के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए कौन कौन सी दवाइयां कब कब से चल रही हैं इसकी जानकारी चिकित्सक को देना बहुत जरुरी है | ध्यान रहे जिन महिलाओं का ब्लड प्रेशर दवा लेने पर भी सामान्य नहीं होता है या उन्हें इसे सामान्य करने के लिए एक से अधिक दवाओं की जरूरत पड़ती है, ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर के कारण काफी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता  है । यदि किसी भी व्यक्ति में यह हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को पांच वर्षों से अधिक का समय हो गया हो तो ऐसी स्थिति में हृदय एवं किडनी की स्थिति का जायजा लेना बेहद जरूरी हो जाता है । ऐसी महिलाएं जिन्हें पहले कभी हाई ब्लड प्रेशर के कारण कोई गंभीर समस्या हुई  हो, जैसे-दिल का दौरा, मस्तिष्क में रक्तस्राव इत्यादि तो ऐसी महिलाओं को गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर के कारण होने वाली जटिलताओं की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है ।गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर यानिकी उच्च रक्तचाप के कारण किडनी के खराब होने का भी डर रहता है । किडनी ठीक से काम कर रही है या नहीं, यह जानने के लिए रक्त में क्रियाटिनीन एवं मूत्र में प्रोटीन एवं क्रियाटिनीन की जाँच भी आवश्यक हो जाती है । यदि महिला के खून में क्रियाटिनीन की मात्रा सामान्य से अधिक हो तो भ्रूण की मृत्यु तथा माँ की किडनी के और खराब होने का खतरा बढ़ जाता है । गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर यानिकी उच्च रक्तचाप के साथ-साथ यदि मोटापा एवं मधुमेह तथा रंग काला हो तो समस्या और भी गंभीर हो सकती है । मोटापा हाई ब्लड प्रेशर के आँकड़े को और बढ़ाने में सहायक होता है ।

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर का गर्भ पर प्रभाव:

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर गर्भ को कई तरह से दुष्प्रभावित करता है हालांकि इस दुष्प्रभाव की  मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि महिला को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या गर्भाधान के कितने दिनों पहले से है और गर्भावस्था में प्रीइक्लैंपसिया होता है या नहीं । गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर जितना अधिक रहता है,  उतनी ही जटिलताएँ भी तीव्र होती हैं । इसके अलावा यदि ब्लड प्रेशर के कारण किडनी एवं हृदय प्रभावित हो चुके हों तो जटिलताएँ और भी गंभीर हो सकती हैं ।

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर से उत्पन्न जटिलताएँ (Complication in Pregnancy Due to Blood Pressure):

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर के कारण निम्नलिखित जटिलताओं का प्रादुर्भाव हो सकता है |

  • प्री इक्लेंपसिया (Pre- eclampsia)
  • हेल्प सिंड्रोम (Help Syndrome)
  • मस्तिष्क में रक्तस्राव (Stroke)
  • किडनी की खराबी (Renal Failure)
  • दिल का दौरा (Myocardial Infarction)
  • अपरा का पृथककरण (Placental abruption)
  • समय पूर्व प्रसव
  • नवजात में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ
  • भ्रूण के विकास में कमी
  • भ्रूण की मृत्यु
  • नवजात की मृत्यु
  • माँ की मृत्यु

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर का हाई अर्थात उच्च यानिकी 160/110 या इससे अधिक होना काफी खतरनाक साबित हो सकता है । हाई ब्लड प्रेशर यानिकी उच्च रक्तचाप मस्तिष्क में रक्तस्राव, दिल का दौरा और किडनी में खराबी उत्पन्न कर सकता है । रक्तचाप से ग्रसित महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान मृत्यु की संभावना सामान्य महिला से पाँच गुणा अधिक होती है ।

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर जितना अधिक होगा,  उतना ही अधिक खतरा प्रीइक्लेंपसिया होने का होता है | ठीक इसी प्रकार जो महिलाएं हाई ब्लड प्रेशर से ग्रसित होती हैं उनमे सामन्य महिलाओं की तुलना में तीन गुना अधिक खतरा अपरा के पृथककरण (Abruption) का होता है | फोलिक एसिड की गोलियाँ खाती रहनेवाली गर्भवतियों में इस जटिलता में कमी देखी गई है । माँ  के उच्च रक्तचाप रहने पर नवजात में हर तरह की जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है । एक आंकड़े के मुताबिक अपने देश भारत में प्रति 1,000 में 12 से 20 मृत शिशु जन्म लेते हैं,  एक चौथाई समय पूर्व जन्म लेते हैं एवं लगभग 20% नवजातों का सही से विकास नहीं हो पाता है | बच्चे के जन्म के बाद जटिलताएँ आने के कारण महिला एवं बच्चे को बार बार हस्पताल में भारती होना पड़ सकता है इनमे मृत्यु दर भी अधिक देखि गई है | गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर ज्यादा होने के साथ साथ यदि महिला को मधुमेह भी है तो समस्या और बढ़ जाती है |

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर का ईलाज (Blood Pressure Treatment in Pregnancy) :

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर को सामान्य रेखा तक लाना आवश्यक होता है इसके लिए व्चिकित्सक द्वारा दवाओं का उपयोग किया जा सकता है | इसके अलावा, खान-पान में सुधार और धूम्रपान, तंबाकू, शराब एवं नशीली चीजों का त्याग भी बेहद जरूरी है । गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर  घटाने वाली कुछ दवाएँ वर्जित होती हैं, क्योंकि उनका भ्रूण पर और गर्भ पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है । इसलिए गर्भावस्था में केवल वही दवाएँ दी जानी चाहिए, जो रक्तचाप घटाने के साथ भ्रूण और गर्भ के लिए भी फायदेमंद हों । हाई ब्लड प्रेशर का सही उपचार नहीं करने पर जानलेवा जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं । ऐसी जटिलताओं को रोकने का प्रयास, उनकी शीघ्र पहचान और जितनी जल्दी हो सके ईलाज बेहद जरूरी है । गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर का तेजी से बढ़ना, तीव्र सिर दर्द, पेट के ऊपरी भाग के बीच में दर्द, आँखों के सामने चिनगारी जैसा निकलना या दृष्टि की कमजोरी, पूरे शरीर में सूजन, मूत्र की मात्रा में कमी, आक्षेप (convulsion) के दौरे, मूत्र में प्रोटीन, रक्त में क्रियाटिनीन और लिवर एंजाइम की वृद्धि तथा प्लेटलेट्स की संख्या में कमी इत्यादि बेहद ही खराब लक्षण होते हैं । गर्भावस्था में भ्रूण की भी गहन देखरेख और समय-समय पर जाँच द्वारा उसकी सुरक्षा एवं     विकास सुनिश्चित करना अति आवश्यक होता है । ध्यान रहे बेहद  खतरनाक लक्षण जैसे, भ्रूण के विकास में कमी, रक्त एवं मूत्र की जाँच के परिणाम खराब या उच्च रक्तचाप को दवा से भी काबू में नहीं लाया जा सके इत्यादि दिखाई दें तो डिलीवरी प्रसव पीड़ा या सीजेरियन के माध्यम से बच्चे को गर्भाशय से बाहर निकालना बेहद आवश्यक हो जाता है | ऐसे में इस तरह की महिलाओं का गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर ही चेक नहीं करना होता है अपितु प्रसव के बाद भी कम से कम एक सप्ताह तक ऐसी महिलाओं के ब्लड प्रेशर पर नज़रें रखना बेहद आवश्यक होता है | ऐसी महिलाओं को भविष्य में दिल के दौरे पड़ने की समस्या भी सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक होती है |

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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