डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता और उनका ईलाज

डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता एवं उनके ईलाज पर बात करने से पहले यह जान लेते हैं की यौन-सुख दांपत्य जीवन का अति मधुर पक्ष होता है । उसके बिना प्रेम-रस आधा-अधूरा रह जाता है । लेकिन डायबिटीज होने पर यह प्रणय-मिलन बाधाओं में घिर सकता है । पुरुषों में स्नायुतंत्र और रक्त-संचार पर लगे ग्रहण से यौन-सामर्थ्य में व्यवधान आ सकता है, जबकि स्त्रियों में यौन अरुचि जागृत हो सकती है । योनि के शुष्क हो जाने और उसमें बार-बार संक्रमण होने से भी मिलन में विघ्न पैदा हो सकता है । डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता या स्त्रियों में यौन समस्याएं इसलिए भी पैदा हो जाती हैं क्योंकि डायबिटीज का असर मन पर भी पड़ता है । मन में शंकाओं के बादल घिर आएँ, तो सबकुछ ठीक-ठाक होते हुए भी यौन-सुख की पूर्ति नहीं हो पाती है । लेकिन समस्या मन की हो, या तन की, भीतर ही भीतर घुलते रहने से कभी उसका हल नहीं निकलता है । चिकित्सक से खुलकर बातचीत करने और उसकी नेक सलाह अपनाने से ही समाधान निकल पाते हैं । आवश्यकता पड़ने पर यौन-संवर्धक दवाओं और उपचार प्रणालियों की मदद से यौन जीवन फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है । इस लेख से पहले हम डायबिटीज में स्त्रियों की यौन समस्याएं एवं उनके ईलाज के बारे में बात कर चुके हैं आज हम डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता एवं उनके ईलाज के बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे |

जननेन्द्रिय दुर्बलता

प्राणीमात्र के जीवन में यौन सुख की महत्वता:

प्राणीमात्र के जीवन में यौन सुख की महत्वता की बात करें काम भाव प्राणी जीवन की सहज वृत्तियों में से एक है । नारद पुराण में तो यहाँ तक कहा गया है कि यह इस जन्म का मूल कारण है । किंतु यौन सुख पाने के लिए इंद्रियों तथा मन और बुद्धि का स्वस्थ और सुचारु रूप से कार्य करते रहना अनिवार्य है । इसी से प्रणय-सुख संपूर्णता पा सकता है और सृष्टि को जीवन मिल सकता है ।

डायबिटीज में यौन समस्याएं

डायबिटीज में इस यौन सुख पर ग्रहण लग सकता है । जैसे-जैसे डायबिटीज पुरानी होती जाती है, वैसे-वैसे उसका बुरा असर शरीर के अंगों पर दिखने लगता है । डायबिटीज में पुरुषों में जननेन्द्रिय दुर्बलता उत्पन्न हो सकती है । इसी प्रकार स्त्रियों में भी जननांगीय क्षेत्र के सुन्न हो जाने से यौन के प्रति अरुचि जागृत हो सकती है । शारीरिक स्तर पर आए परिवर्तनों के कारण काम-क्रीड़ा के समय योनि के शुष्क रहने और ब्लड शुगर बढ़े रहने पर योनि में बार-बार संक्रमण होने से भी शारीरिक मिलन में विघ्न पैदा हो सकता है । डायबिटीज को जितना अच्छा साधकर रखा जाए, उससे उपजने वाले शारीरिक दुष्परिवर्तन उतने ही कम होते हैं । पर कोई मुश्किल आए, तो भीतर ही भीतर परेशान होते रहने से बात नहीं बनती । उस समय स्पष्ट शब्दों में चिकित्सक से खुलकर बातचीत करने से ही समाधान निकल सकता है । कई बार स्थिति पूरी तरह से नहीं सुधर पाती, पर यौन-संवर्धक दवाओं और उपचार प्रणालियों की मदद से यौन जीवन फिर से सुखमय हो सकता है ।

डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता :

डायबिटीज में पुरुषों में जननेन्द्रिय दुर्बलता आ सकती है । एक आंकड़े के मुताबिक डायबिटीज होने के छः से दस वर्ष के भीतर 50 प्रतिशत पुरुष जननेन्द्रिय दुर्बलता अनुभव करने लगते हैं । उनके लिए यह समस्या हो जाती है कि यौन उत्तेजना के नाजुक क्षणों में या तो शिश्न में ठीक से तनाव नहीं पैदा हो पाता या यह तनाव इतने कम समय रहता है कि दैहिक मिलन होने से पूर्व ही खत्म हो जाता है । यह जननेन्द्रिय दुर्बलता कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक कारणों से उपज सकती है । डायबिटीज जितनी पुरानी हो और ब्लड शुगर जितनी अधिक असंतुलित रहे, जननेन्द्रिय दुर्बलता उत्पन्न होने की आशंका उतनी ही प्रबल होती जाती है । डायबिटीज के दैहिक दुष्प्रभाव पुरुष की यौन-क्षमता का ह्रास कर देते हैं । डायबिटीज में पुरुषों की ब्लड शुगर बढ़ी रहने से जननेन्द्रिय-संबंधी तंत्रिकाओं को नुकसान पहुँचता है और शिश्न की धमनियाँ भी ठीक से काम करने के काबिल नहीं रहतीं । इस कारण यौन उत्तेजना के क्षणों में इन धमनियों में उतना खून नहीं भरता कि शिश्न में तनाव पैदा हो सके और वह दैहिक मिलन के लिए उचित आकार में आ सके ।

जननेन्द्रिय दुर्बलता के अन्य कारण:

कभी-कभी यह जननेन्द्रिय दुर्बलता किसी दवा के साइड इफेक्ट के कारण भी उत्पन्न हो सकती है । बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कम करने के लिए दी जानेवाली कुछ दवाएँ जैसे ऐटिनोलॉल, अल्सर में दी जानेवाली एच-2 रिसेप्टर ब्लॉकर दवाएँ जैसे रेनेटिडीन, मनोरोगों में दी जानेवाली अवसादरोधक, प्रशांतक और एंटिसाइकोटिक वर्ग की दवाएँ तथा एलर्जी में दी जानेवाली कुछ एंटिहिस्टामिन दवाएँ अस्थायी पुंसत्वहीनता पैदा कर सकती हैं । अतः ऐसे में डॉक्टर से बातचीत करते समय अपनी सभी दवाओं के बारे में बताना बहुत जरूरी होता है । शक होने पर वह दवा बदल सकता है और इसी से स्थिति सामान्य हो जाती है । डायबिटीज में पुरुषों की यौन समस्या के कारणों की बात करें तो अक्सर ऐसा भी देखा गया है की कई बार समस्या पूरी की पूरी मनोवैज्ञानिक होती है । काम-सुख पाने के लिए देह के साथ मन की भागीदारी भी जरूरी है । शरीर हृष्ट-पुष्ट होते हुए भी मन यदि उसमें लीन न हो तो यौन-सुख हासिल नहीं किया जा सकता । मन पर अवसाद, दुश्चिता या तनाव हावी हो जाए, तो शरीर की पूरी जैव-रासायनिकी बिगड़ जाती है और लिंग उत्तेजित नहीं हो पाता । डायबिटीज होने पर कुछ पुरुष इस आशंका में ही घुल जाते हैं कि अब तो जननेन्द्रिय दुर्बलता होनी निश्चित है । उनके शंकित रहने से सब कुछ ठीक-ठाक होते हुए भी दुर्बलता आ जाती है । समय से इसका उपचार न किया जाए तो यह दुर्बलता धीरे-धीरे गंभीर होती जाती है । एक बार आत्मविश्वास भंग हो जाए, तो समस्या इसी से सघन हो जाती है । नीम-हकीम और देश में जगह-जगह दूकान चलाने वाले तथाकथित सेक्सोलॉजिस्ट भी कई बार समस्या को अनावश्यक रूप से उलझा देते हैं । उनके चंगुल में भूलकर भी नहीं फँसना चाहिए ।

डायबिटीज में जननेन्द्रिय दुर्बलता होने पर क्या करें  

डायबिटीज में पुरुषों में जननेन्द्रिय दुर्बलता होने पर समय गंवाएं बिना अपने डॉक्टर या किसी यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना ठीक रहता है । बातचीत और शारीरिक जाँच द्वारा पूरी जानकारी पाकर डॉक्टर जरूरी होने पर शिश्न की डापलर जाँच कराने की सलाह भी दे सकते हैं । डापलर से शिश्न की धमनियों में खून के दौरे की असल स्थिति के बारे में पता चल जाता है । जिन मामलों में समस्या किसी दवा से जुड़ी होती है, उनमें दवा बदलते ही स्थिति में सुधार आ जाता है । मानसिक समस्याओं के हल के लिए एक ओर मन के मरहम (साइकोथैरेपी) की जरूरत होती है, तो दूसरी ओर जीवन-संगिनी का प्रेम और सहयोग भी दवा से अधिक प्रभावशाली साबित होता है ।

जननेन्द्रिय दुर्बलता का ईलाज:

हाल के वर्षों में आयुर्विज्ञान में यौन-संवर्धक दवाएँ भी विकसित हुई हैं । डॉक्टर की सलाह से इन्हें लेकर डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता की समस्या से मुक्ति पाई जा सकती है । डायबिटीज के कारण उपजी जननेन्द्रिय दुर्बलता के बहुत से मामलों में सिल्डनाफिल साइट्रेट दवा बहुत उपयोगी साबित होती है । यह वही दवा है जो वियाग्रा के नाम से बाजार में उतारी गई थी और बहुत दिनों तक हर जगह उसकी धूम मची रही । यह दवा देश में एंड्रोज, एडेग्रा और सीलेग्रा सहित कई नामों से बिकती है । सहवास से एक घंटे पहले लेने पर यह दवा शिश्न में यौन उत्तेजना के समय खून भरने की क्रिया को बढ़ावा देती है । नतीजतन सहवास से पूर्व शिश्न में तनाव पैदा हो जाता है और सहवास-क्रीड़ा सहज रूप से पूरी हो जाती है । दवा का असर चार घंटों तक रहता है और इसे दिन में एक बार ही लिया जा सकता है । पर यह दवा न तो हर किसी के लिए उपयोगी साबित होती है और न ही यह हर किसी को दी जा सकती है । कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे हृदयरोग हो और जो अपनी कोरोनरी धमनियों को खोलने के लिए नाइट्रोग्लीसरीन सरीखी नाइट्रेट दवा लेता हो, उसके लिए सिल्डनाफिल साइट्रेट जानलेवा साबित हो सकती है । ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है और मृत्यु भी हो सकती है । कुछ ब्लड प्रेशर कम करनेवाली दवाओं का असर भी सिल्डनाफिल साइट्रेट लेने से अधिक प्रबल हो जाता है ।

सिल्डनाफिल साइट्रेट के दूसरे साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं । कुछ समय के लिए सिर में दर्द हो सकता है, पेट में खलबली मच सकती है, चेहरा लाल हो सकता है, सिर घूमने लग सकता है, नजर धुंधली हो सकती है । लेकिन यह असर अस्थायी होता है और दवा लेने के कुछ घंटों बाद छू-मंतर हो जाता है ।

प्रोस्टाग्लैंडिन ई (एलप्रोस्टाडिल) द्वारा उपचार:

वर्तमान में शिश्न के आंतरिक ऊतकों में फैलाव लाने में प्रोस्टाग्लैंडिन-ई के औषधीय विकल्प एलप्रोस्टाडिल को भी सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा रहा है । उसकी मदद से भी शिश्न के भीतर रक्त भर जाता है । यह दवा मुँह से नहीं ली जा सकती । डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता को दूर करने के लिए इसे दो प्रकार से बत्ती और टीके के रूप में प्रयोग में लाया जाता है । अभी भारत में तो नहीं, पर कई उन्नत देशों में एलप्रोस्टाडिल बत्ती के रूप में उपलब्ध है । इस दवा की गेहूँ के आधे दाने जितनी मात्रा शिश्न के अग्र भाग में डालने भर से शिश्न के भीतर रक्त भर जाता है और वह काम-क्रीड़ा के लिए तैयार हो जाता है । बत्ती डालने से पहले शिश्न के जड़ वाले किनारे पर रबड़ का रिंग भी लगा दिया जाता है ताकि रक्त शिश्न में देर तक भरा रहे, वापस न जाने पाए । एलप्रोस्टाडिल को बहुत महीन सूई की मदद से शिश्न के जड़ वाले भाग में इंजेक्ट भी किया जा सकता है । इस विधि से भी शिश्न के आंतरिक ऊतकों में फैलाव आ जाता है और शिश्न रक्त से भर जाता है । यह असर आने में 15-20 मिनट का समय लगता है और शिश्न में अगले एक घंटे तक तनाव रहता है । टीका लगाने की तकनीक एलप्रोस्टाडिल का इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर से सीखी जा सकती है ।

डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता का अन्य विधियों से उपचार:

पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता को दूर करने के लिए दूसरी उपचार प्रणालियाँ भी अपनाई जा सकती हैं जिनका विवरण निम्न है |

वैक्यूम उपकरण द्वारा ईलाज:

पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता को दूर करने के लिए जिनमें दवाएँ काम नहीं करतीं, उनमें दूसरी उपचार प्रणालियाँ काम में लाई जाती हैं । वैक्यूम उपकरण ऐसी ही एक उपचार प्रणाली है । इसमें शिश्न के ऊपर पहले एक एयर-टाइट प्लास्टिक की ट्यूब चढ़ानी होती है और फिर उससे जुड़े हैंड-पंप की मदद से ट्यूब के भीतर की पूरी हवा खींच लेते हैं । इससे ट्यूब के भीतर वैक्यूम पैदा हो जाता है और शिश्न के ऊतकों में खून खिंचा चला आता है । जब शिश्न खून से भर जाता है, उस समय शिश्न की जड़ पर प्लास्टिक ट्यूब से एक रबड़ का रिंग उतारकर चढ़ा देना होता है । यह रिंग अगले 20-25 मिनट तक रखा जा सकता है । इससे अधिक समय लगे रहने से यह खतरनाक हो सकता है ।

प्रोस्थेसिस द्वारा उपचार:

ऐसी कई प्रकार की विशेष रोपण प्रणालियाँ भी तैयार की गई हैं जिन्हें ऑपरेशन करके शिश्न में रोपित किया जा सकता है । पुरुषों की की जननेन्द्रिय दुर्बलता को दूर करने के लिए इसमें सबसे साधारण प्रणाली में दो सख्त मगर लचीली तारों से बनी नालों का प्रयोग किया जाता है । इन पर पॉलीयूरेथेन का खोल चढ़ा होता है और यह नालें ऑपरेशन से शिश्न के भीतर रोपित कर दी जाती हैं । इन नालों में यह सुविधा होती है कि जब चाहें इन्हें भीतर की ओर मोड़कर रख लें और जब चाहें इन्हें आगे की ओर खोल लें जिससे कि काम-क्रीड़ा में भाग ले सकें । यह प्रणाली शुरू में अटपटी लगती है लेकिन अभ्यास हो जाने पर फिर सब कुछ आसान एवं सहज लगने लगता है | दूसरी प्रणाली में यह पंप द्वारा फुलायी जा सकती है और हर समय तनी नहीं रहती । यह बेशक अधिक स्वाभाविक ढंग से काम करती है, पर उसके फैले होने की दर अन्य प्रणालियों की तुलना में अधिक है । इसमें शिश्न के भीतर दो खोखले सिलेंडर रोपित कर दिए जाते हैं । इनसे एक पंप जुड़ा होता है जिसे नीचे अंडकोष में छुपा दिया जाता है । पंप को दबाने से दोनों सिलेंडरों में द्रव भर जाता है और शिश्न समागम के लिए समर्थ हो उठता है । ये ऑपरेशन हर कोई नहीं कर सकता । इन्हें किसी अनुभवी और प्रशिक्षण-प्राप्त सर्जन या यूरो-ऐंड्रोलॉजिस्ट से ही कराना चाहिए ।

पुरुषों की की जननेन्द्रिय दुर्बलता शीघ्रपतन:

पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता की बात करें तो यह एक प्रमुख समस्या है और कुछ पुरुष शीघ्रपतन (प्रीमेच्योर इजेकूलेशन) के कारण भी यौन-सुख से वंचित हो जाते हैं । उनके भीतर शिश्नोत्थान की सामान्य क्षमता होती है, पर वे मैथुन-क्रिया में रत होने से पहले ही स्खलित हो जाते हैं । यह समस्या प्रायः मनोवैज्ञानिक होती है । इससे मुक्त होने और बेहतर कंट्रोल हासिल करने के लिए कई तरह की यौन तकनीकें तथा व्यायाम बताए गए हैं । इनमें ‘स्टॉप-स्टार्ट’ और ‘स्कुईज’ तकनीक तथा ‘पैल्विक फ्लोर एक्सरसाईज’ प्रमुख हैं । इस प्रकार की की जननेन्द्रिय दुर्बलता को दूर करने के लिए जरूरी होने पर मनोचिकित्सक या सैक्स थैरेपिस्ट से भी उपचार में मदद ली जा सकती है ।

पैल्विक फ्लोर एक्सरसाईज कैसे करें

शीघ्रपतन नामक इस यौन समस्या को दूर करने के लिए पैल्विक फ्लोर एक्सरसाईज की जा सकती है और इसे करने की विधि बेहद सरल है । श्रोणि की मांसपेशियों को उसी तरह सिकोड़े मानो मूत्र-त्याग की क्रिया को रोकना हो और छह तक गिनने के बाद मांसपेशियों को ढीला छोड़ दें । फिर छह तक गिनें । अब यही व्यायाम फिर से दोहराएँ । पहले दिन 10-12 बार और फिर बढ़ाते-बढ़ाते सुबह-शाम 20-25 बार लगातार छह हफ्ते तक करने से सुधार आने की अच्छी संभावना रहती है ।

स्थानीय संवेदनाहारी :

डायबिटीज में पुरुषों की जननेन्द्रिय दुर्बलता को थोड़े समय के लिए दूर करने या स्खलन-क्रिया को कुछ देर तक स्थगित करने के लिए रति-क्रीड़ा से पहले यदि शिश्न पर जायलोकेन जैसा कोई स्थानीय संवेदनाहारी (एनेस्थेटिक) लगा लिया जाए तो इससे अनुभूति मंद हो जाती है और रति-क्रीड़ा का समय बढ़ जाता है । इसी सिद्धांत के आधार पर बाजार में कई प्रकार के स्थानीय संवेदनाहारीयुक्त स्प्रे भी मिलते हैं । लेकिन इनका प्रयोग हर दंपति को नहीं भाता है ।

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