गोनेडोट्रोपिन के प्रयोग साइड इफेक्ट एवं कैसे कार्य करता है

गोनेडोट्रोपिन कई प्रकार के होते हैं । कुछ का प्रयोग डिम्बोत्सर्ग को उद्दीप्त करने वाली दवाओं के साथ व कुछ का प्रयोग अकेले ही किया जाता है इनमें से कुछ का विवरण निम्नवत हैं |

ब्रांड नामकेमिकल का नाम
Repronex,

Humegon, Pergonal, Metrodin, Bravelle

 

human menopausal gonadotropin (hMG)

 

Gonal-F, Follistimrecombinant human follicle

stimulating hormone (rFSH)

A.P.L., Pregnylhuman chorionic gonadotropin Profasi

(hCG)

 

 

शरीर प्रमुख रूप से दो प्रकार के गोनेडोट्रोपिन उत्पन्न करता है, follicle-stimulating hormone (FSH) व luteinizing hormone (LH) । एक बार पिट्यूटरी द्वारा इन्हें उत्पन्न कर दिया जाता है, उसके बाद गोनेडोट्रोपिन अन्य सेक्स हॉरमोन बनाता है । गोनेडोट्रोपिन स्त्रियों में अण्डे व पुरुषों में शुक्राणुओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है । अन्य परिवर्तन, जैसे आवाज परिवर्तित होना, मांसपेशियां बनना, बाल उगना व स्तनों में परिवर्तन होना, भी इसी के कारण होते हैं । Human menopausal gonadotropin (hMG) a recombinant human follicle-stimulating hormone (rFSH) दोनों ही गोनेडोट्रोपिन फर्टिलिटी ड्रग हैं |

गोनेडोट्रोपिन

  • hMG में प्राकृतिक FSH व LH होते हैं । इन्हें रजोनिवृत्ति वाली स्त्री की पेशाब से लेकर शुद्ध किया जाता है (रजोनिवृत्ति के बाद छ के शरीर में गोनेडोट्रोपिन का स्तर बहुत ऊंचा होता है, जो उसके पेशाब में निकलता है) ।
  • rFSH को सामान्यत: प्रयोगशाला में बनाया जाता है । Human chorionic gonadotropin (hCG), LH के समान होता है । इसमें FSH व LH बराबर मात्रा में मौजूद रहते हैं ।

गोनेडोट्रोपिन कैसे कार्य करता है? :

स्त्रियों में यह follicle-stimulating hormone (FSH) व luteinizing hormone (LH) अण्डे के बनने व डिम्बोत्सर्ग (ovulation) के लिये आवश्यक होता है । ऐसी स्त्रियां, जिनका हारमोन स्तर नीचा होता है व उनका डिम्बोत्सर्ग नहीं होता है, वे लगभग 12 दिन तक Human menopausal gonadotropin (hMG) a recombinant human follicle-stimulating hormone (rFSH) के इन्जेक्शन ले सकती हैं । यदि ये परिपक्व follicles को विकसित करने में सहायक होते हैं व ओवरी डिम्बोत्सर्ग के लिये तैयार होती है, तो human chorionic gonadotropin (hCG) की एक डोज डिम्बोत्सर्ग (ovulation) में सहायक होती है । जिन पुरुषों में testosterone व FSH का स्तर कम होता है, उनमें LTS. testosterone के निर्माण में वृद्धि करता है व FSH शुक्राणुओं के निर्माण में सहायक होता है । यदि वीर्य व FSH व LH की जांच में यह पता चलता है कि हारमोन का निम्न स्तर शुक्राणु के निर्माण में व्यवधान डाल रहा है, तो शुक्राणु का उत्पादन बढ़ाने के लिये गोनेडोट्रोपिन दी जाती है । hCG का इन्जेक्शन सप्ताह में तीन बार तब तक दिया जाता है, जब तक रक्त में testosterone का स्तर सामान्य नहीं हो जाता है (यह उपचार 4 से 6 माह तक चल सकता है) । यह उपचार जारी रहता है । hCG का इन्जेक्शन सप्ताह में दो बार व hMG सप्ताह में तीन बार तब तक दिया जाता है, जब तक कि शुक्राणुओं की संख्या सामान्य नहीं हो जाती है ।

गोनेडोट्रोपिन का प्रयोग क्यों किया जाता है? :

गोनेडोट्रोपिन इन्जेक्शन द्वारा इसलिये दिया जाता है कि इससे शरीर को अण्डा व शुक्राणु बनाने के लिये आवश्यक हारमोन बनाने में सहायता मिलती है । स्त्रियों में गोनेडोट्रोपिन का प्रयोग निम्नलिखित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए किया जाता है |

  • ovulation को उद्दीप्त करने के लिये किया जाता है ।
  • जब क्लोमीफीन ovulation के लिये प्रभावी नहीं होती है ।
  • ओवरी में एक से अधिक egg follicles विकसित करने के लिये इसका प्रयोग किया जाता है । इसकी आवश्यकता in vitro fertilization अथवा gamete intrafallopian transfer में पड़ती है ।
  • जिन दम्पतियों की unexplained infertility होती है, उनमें क्लोमीफीन के साथ इसका प्रयोग intrauterine insemination किया जाता है ।
  • पुरुषों में इसका प्रयोग, प्राकृतिक गोनेडोट्रोपिन के कारण शुक्राणुओं की संख्या कम होने पर किया जाता है ।

गोनेडोट्रोपिन से ईलाज कितना कारगर होता है? :

hMG/hCG अथवा rFHS/hCG संयुक्त रूप से ovulation को उद्दीप्त करते हैं । जिन स्त्रियों में ovulation नहीं होता है, उनमें से लगभग 60 प्रतिशत स्त्रियां इस उपचार से गर्भवती हो जाती हैं । यद्यपि उनमें से 35 प्रतिशत की परिणति गर्भपात में होती है । इससे यह पता चलता है कि लगभग 40 प्रतिशत स्त्रियां इस उपचार से बच्चे को जन्म देने में सफल होती हैं ।

गोनेडोट्रोपिन के साइड इफेक्ट :

गोनेडोट्रोपिन के साइड इफेक्ट क्लोमीफीन से अधिक गंभीर होते है । इसके निम्नलिखित साइड इफेक्ट हो सकते हैं ।

गर्भपात का खतरा :

गोनेडोट्रोपिन लेने वाली स्त्रियों में से 35 प्रतिशत स्त्रियों में गर्भपात का खतरा है, जो सामान्यतः काफी ऊंची दर है ।

Ovarian hyperstimulation syndrome (OHSS) :

गोनेडोट्रोपिन से ovarian hyperstimulation syndrome (OHSS) का खतरा रहता है, परन्तु ऐसा कम ही होता है कि जीवन को इससे कोई खतरा हो । यदि ध्यानपूर्वक देखा जाये, तो 1 प्रतिशत से भी कम स्त्रियों में गंभीर OHSS होता है ।

Multiple gestation :

गोनेडोट्रोपिन लेने वाली स्त्रियों में से 20 प्रतिशत स्त्रियों में multiple gestation pregnancy की संभावना रहती है । जबकि सामान्यत: यह प्रतिशत 1 से 2 तक रहता है । एक से अधिक गर्भ होने से, गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव, भूण में असामान्यता, विकलांगता, हाइपरटेंशन, अति रक्तस्राव जैसे खतरे होते हैं ।

Ectopic (tubal) pregnancies :

सामान्यत: Ectopic Pregnancies की दर 1 से 2 प्रतिशत होती है, परन्तु गोनेडोट्रोपिन के साथ यह दर बढ़कर 1 से 3 प्रतिशत हो जाती है । इसका उपचार दवा अथवा ऑपरेशन द्वारा किया जा सकता है ।

जन्मजात दोष :

सामान्य जनसंख्या की अपेक्षा गोनेडोट्रोपिन लेने से जन्मजात दोष की संभावना 2 से 3 प्रतिशत बढ़ जाती है ।

Ovarian twisting :

उद्दीप्त होने पर ओवरी स्वत: ही मुड़ जाती है, जिससे इसमें रक्त संचरण समाप्त हो जाता है । यद्यपि ऐसा 1 प्रतिशत से भी कम केस में होता है । इसे वापस ठीक करने या निकालने के लिये ऑपरेशन की आवश्यकता होती है ।

Ovarian cancer :

गोनेडोट्रोपिन लेने वाली स्त्रियों में Ovarian Cancer का खतरा बढ़ जाता है ।

अन्य खतरे :

सिरदर्द व पेटदर्द हो सकता है ।  पुरुषों में अस्थायी रूप से छाती विकसित हो सकती है ।

सावधानियां

  • गोनेडोट्रोपिन उपचार के दौरान egg follicle को मॉनिटर करना आवश्यक होता है ।
  • गोनेडोट्रोपिन का प्रयोग उन्हीं डॉक्टर द्वारा करना चाहिये, जो इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ हों, जिससे वे आगे होने वाली संभावित जटिलताओं को दूर करने में सक्षम हों ।

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