ह्रदय की संरचना एवं कार्यशैली Heart structure and functions in Hindi.

ह्रदय की यदि हम बात करें तो यह बंद मुट्ठी की आकृति का शरीर के बाई ओर दोनों फेफड़ों के बीच में वक्षस्थल के भीतर होता है | युवावस्था में यह साढ़े चार इंच लम्बा, साढ़े तीन इंच चौड़ा एवं ढाई इंच मोटा होता है | पुरुषों का ह्रदय स्त्रियों के ह्रदय की तुलना में बड़ा होता है पुरुषों का ह्रदय 300 ग्राम से 360 ग्राम एवं महिलाओं का ह्रदय 240 ग्राम से 300 ग्राम तक भारी हो सकता है | ह्रदय को मांस से बना हुआ एक थैला भी कह सकते हैं जिसमे खून भरा होता है | हार्ट शरीर के जटिल अंगों में से ही एक अंग है, हृदय का जीवधारी को जीवित रखने में बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है | हमारा ह्रदय हमें जिन्दा रखने के लिए दिन के चौबीस घंटे एवं साल के पूरे 365 दिन कार्य करता रहता है | कहने का आशय यह है की शरीर के अन्य अंगों के पास तो कार्य समय समय पर आता है लेकिन ह्रदय एक ऐसा अंग है जिसे हर समय कार्य करना पड़ता है | लेकिन जीवधारी जब सोता या आराम करता है उस समय ह्रदय को थोड़ा कम रक्त फेंकना पड़ता है ह्रदय के कार्यों की पद्यति को ही cardiovascular system कहा जाता है |

ह्रदय heart-structure-and-function

ह्रदय की संरचना:

यह अन्दर से खड़े मांस के परदे द्वारा दायीं एवं बाई दो कोठरियों में बंटा हुआ होता है | हार्ट के दायीं ओर हमेशा अशुद्ध रक्त होता है और बाई ओर शुद्ध रक्त होता है | इन कोठरियों का आपस में कोई सम्बन्ध नहीं होता है प्रत्येक कोठरी की दो मंजिल ऊपर की मंजिल एवं नीचे की मंजिल होती है | ऊपर की मंजिल को ग्राहक कोष्ठ एवं नीचे की मंजिल को क्षेपक कोष्ठ कहते हैं | इस प्रकार ह्रदय के अन्दर निम्नलिखित चार कोठरियां होती हैं |

  1. दायाँ ग्राहक कोष्ठ (right auricle): इसका कार्य रक्त वाहिकाओं से रक्त लेना और उस रक्त को दायाँ क्षेपक कोष्ठ तक पहुँचाने का होता है |
  2. दायाँ क्षेपक कोष्ठ (Right Ventricle): दायाँ क्षेपक कोष्ठ में रक्त पहुँच जाने पर यह उस रक्त को फेफड़ों की तरफ संचरित करता है और यह रक्त फेफड़ों में ऑक्सीजन से मिल जाता है जिसे प्राणी साँस द्वारा ग्रहण करता है | उसके बाद फेफड़े ऑक्सीजन मिले रक्त को बाएं ग्राहक कोष्ठ में अग्रसित करते हैं |
  3. बायाँ ग्राहक कोष्ठ (Left Auricle):इसका काम फेफड़ों से मिले रक्त को बाएं क्षेपक कोष्ठ तक पहुँचाने का होता है |
  4. बायाँ क्षेपक कोष्ठ (Left Ventricle): बाएं क्षेपक कोष्ठ का काम रक्त को धमनियों में तेजी से धकलने का होता है जहाँ से शरीर के सम्पूर्ण अंगों को रक्त की आपूर्ति होती है |

इन चार कोठरियों के बीच में मांस का एक किवाड़ सा लगा रहता है जिसके कारण रक्त ऊपर से नीचे की तरफ तो जा सकता है लेकिन नीचे से ऊपर की तरफ नहीं जा सकता |

ह्रदय कैसे कार्य करता है

हार्ट का कार्य शरीर में रक्त संचारित करने का होता है, सम्पूर्ण शरीर का अशुद्ध रक्त अधरा महाशिरा, उत्तरा महाशिरा द्वारा ह्रदय के दायें ग्राहक कोष्ठ में आता है, जब यह सिकुड़ता है तो त्रिकपाट खुल जाते हैं और रक्त दाहिने क्षेपक कोष्ठ में प्रविष्ट कर जाता है और जब यह सिकुड़ता है तो ग्राहक कोष्ठ प्रसारित होता है | ऐसा होने से उसके बीच फिर से खून वापस नहीं लौटने पाता बल्कि फुफुसीय महाधमनी द्वारा फेफड़ों में शुद्ध होने के लिए चला जाता है | फेफड़ों में शुद्ध होने के बाद रक्त फिर चार फुफ्फिसिया शिराओं द्वारा ह्रदय के बाएं ग्राहक कोष्ठ में प्रविष्ट करता है और जब यह खुलता है तब द्विपत्रक कपाट खुल जाता है और रक्त बाएं क्षेपक कोष्ठ के सिकुड़ने तथा ग्राहक कोष्ठ के फैलने के फलस्वरूप शुद्ध महाधमनी में चला जाता है | इस प्रकार हमारे शरीर में रक्त का संचार होता है, सम्पूर्ण शरीर में रक्त संचार होने की क्रिया में केवल 15 सेकंड का समय लगता है |

ह्रदय के बारे में विशेष जानकारी:

हार्ट के कोष्ठों में कई रक्त नलिकाएं होती हैं दाहिने ग्राहक कोष्ठ में ऊपर की ओर उध्र्व मह्शिरा और नीचे की ओर अधोगा महाशिरा खुलती है | उधर्व महाशिरा अशुद्ध रक्त को, सिर, उधर्व शाखाएं और वक्ष से तथा अधोगा महाशिरा शरीर के नीच्रे के भागों से रक्त इकट्ठा करके लाती हैं | ह्रदय के बाएं ग्राहक कोष्ठ में चार फुफ्फुसिया शिराएँ खुलती हैं, दायें ग्राहक कोष्ठ से फुफ्फुसिया धमनी निकलती है | बाएं क्षेपक कोष्ठ के उपरी मोटे भाग में ब्रह्द धमनी को छोड़कर शरीर में जितनी भी धमनियां हैं वे सब व्रहद धमनी से ही निकलती हैं | ह्रदय जब सिकुड़ता है तब रक्त को जोर से धमनियों में धकेलता है |

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