Hernia (हर्निया) के कारण, प्रकार, भ्रांतियां एवं ईलाज

आज बीमारी अर्थात Disease नामक इस श्रेणी में हम एक ऐसी बीमारी Hernia (हर्निया) के बारे में जानेंगे जिसमे शरीर के अन्दुरुनी अंग अपनी जगह बदलकर किसी और जगह चले जाते हैं | कभी कभी वे अंग जिन्होंने अपना स्थान परिवर्तित किया हो वे शरीर से बाहर भी आ सकते हैं | जब शरीर के अन्दुरुनी अंग बाहर की ओर आने की कोशिश करते हैं तो उस क्षेत्र विशेष पर एक उभार सा दिखाई दे सकता है | तो आइये आज हम अपने इस लेख के माध्यम से हर्निया के बारे में थोडा विस्तृत तौर पर जानने की कोशिश करेंगे |

Hernia cause types myth fact treatment in hindi

हर्निया क्या है (What is hernia in Hindi):

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की हर्निया का अर्थ है कि किसी भीतरी अंग का अपनी जगह को छोड़कर किसी दूसरी जगह पर दबाव की वजह से आ जाना । यह अंग शरीर से बाहर भी निकलने की चेष्टा कर सकता है तथा भीतरी भाग में एक कम्पार्टमैन्ट से दूसरे में भी जा सकता है । कहने का आशय यह है की जब मनुष्य शरीर के अन्दुरुनी अंग अपना स्थान परिवर्तित करते हैं तो इस परिस्थति को हर्निया कहा जाता है | हालांकि Hernia में अंग भीतरी भाग की ओर भी स्थानांतरित हो सकते हैं और बाहरी भाग की ओर भी |

हर्निया के प्रकार (Types of Hernia in Hindi):

यदि हर्निया की शरीर में स्थिति के आधार पर हम इसके प्रकारों की बात करेंगे तो यह मुख्यत: दो प्रकार का होता है | पहला बाहरी Hernia तथा दूसरा अन्दरूनी हर्निया । चूँकि अधिकतर तौर पर बाहरी हर्निया ही रोगियों में देखने को मिलता है, इसलिए इस लेख में बाहरी हर्निया के बारे में चर्चा करने की कोशिश करेंगे | जैसा की हमने बताया की मुख्य रूप से दो प्रकार के हर्निया बाहरी एवं अन्दुरुनी होते हैं लेकिन इनके सहप्रकार भी होते हैं जैसे जिस क्षेत्र में हर्निया होता है उसी क्षेत्र के नाम से इसे जाना जाता है । उदाहरण के तौर पर जांघ के हर्निया को इनगुआईनल (Inguinal) हर्निया, नाभि के हर्निया को अम्बलाईकल (Umblical) हर्निया तथा पेट के मध्य भाग के हर्निया को वैन्ट्रल (Ventral) हर्निया के नाम से पुकारा जाता है । इन सब में से Inguinal Hernia सबसे ज्यादा रोगियों में पाया जाता है ।

हर्निया के संभावित कारण (Possible Cause Of Hernia in Hindi):

हर्निया के कुछ संभावित कारण इस प्रकार से है |

  • पैदायशी या Congenital (जन्मजात), कुछ हर्निया बच्चे के जन्म पर ही प्रकट हो जाते हैं। उदाहरणतया: inguinal hernia तथा नाभि का हर्निया ।
  • मांस पेशियों की कमजोरी की वजह से भी हर्निया हो सकता है जैसे कि आमतौर पर 45 वर्ष की आयु के बाद direct inguinal hernia हो सकता है ।
  • किसी अन्दर की कैविटी जैसेकि पेट में अंदर प्रेशर बढ़ने से (Increased intra abdominal pressure) 3GT3 UT de T खांसी करने, शौच के लिए जोर लगाने, अचानक भारी वजन उठाने इत्यादि से भी हर्निया हो सकता है ।
  • कुछ रोगियों में आपरेशन के लिए लगाए गए चीरे के ठीक प्रकार से न जुड़ने की वजह से, अंग बाहर आ जाते हैं इसे Incisional Hernia कहते हैं |

Myth and facts about Hernia in Hindi(मिथक एवं तथ्य):

   मिथक:  हर्निया का रोग कान बिन्दवाने से ठीक हो सकता है?

तथ्य: यह एक गलत धारणा है, इसके पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।

मिथक:  बच्चों का Hernia (हर्निया) उम्र के साथ अपने आप ठीक हो जाता है?

तथ्य:  केवल नाभि (Umbilical) का हर्निया उम्र के साथ अपने आप ठीक हो सकता है लेकिन अन्य प्रकार के हर्निया में यह संभव नहीं होता है |

मिथक: नाभि के हर्निया में सिक्का बांधने से हर्निया अंदर चला जाता है तथा आपरेशन की जरूरत भी नहीं पड़ती है ?

तथ्य: ऐसा कदापि न करें, इससे हर्निया के अंदर की नाजुक आंत पर घाव भी हो सकता है। सिक्का बांधने से हार्निया का इलाज संभव नहीं है ।

मिथक: हर्निया की बैल्ट से जब Hernia कट्रोल हो सकता है तो आपरेशन नहीं कराना चाहिए

तथ्य: यह एक अस्थायी इलाज है । ज्यादा समय तक लगाई गई बैल्ट हर्निया के अंदर की नाजुक आंत को नुकसान पहुंचा सकती है।

मिथक: हर्निया आपरेशन के बाद, दोबारा हो सकता है, इसलिए आपरेशन इसका स्थायी हल नहीं है?

तथ्य: यह भी एक भ्रांति है, केवल कुछ स्थितियों में ही हर्निया आपरेशन के बाद दोबारा होता है, वह भी कुछ विशेष परिस्थितियों में । मोटापा (Obesity), शुगर (Diabetes Mellitus) , पुरानी खांसी व दमा, पुरानी कब्ज, पेशाब की रुकावट, मांसपेशियों की कमजोरी, खून की कमी इत्यादि का ईलाज हर्निया के ऑपरेशन से पहले कर दिया जाय तो इसके दुबारा होने की संभावना बेहद कम हो जाती है |

मिथक:  सर्जरी केवल तभी कराई जाए जब दर्द हो?

तथ्य: नहीं, आपरेशन तब भी कराया जा सकता है जब दर्द न हो। दर्द वाली स्थिति का इंतजार नही करना चाहिए, क्योंकि बहुत सारी परिस्थतियों में ऐसा भी हो सकता है कि हर्निया सुराख  से निकल कर बाहर आ जाता है तथा दोबारा अंदर नहीं जाता है । यदि ऐसा हो जाता है तो इसे 0bstructed Hernia कहा जाता है, जिसका हिन्दी में अभिप्राय होता है हर्नियां में ‘रूकावट’ अगर  इस रूकावट को तुरंत दूर न किया जाए तो हर्निया में फंसी हुई नाजुक आंत में खून का दौरा रूक जाता है तथा आंत गल सकती है जिसे Gangrene भी कहा जाता है । किसी भी रोगी के लिए यह स्थिति एक भयानक सजींकल Emergency होती है, इस स्थिति में रोगी को जिन्दगी एवं मौत के बीच जूझना पड़ सकता है । इसके शुरू होने के लक्षणों में दर्द, उल्टी, हर्निया की जगह अचानक तेज दर्द, तथा फुलावट इत्यादि आते हैं, यदि किसी रोगी में उपर्युक्त कोई लक्षण दिखाई दें तो उन्हें तुरंत सर्जिकल विशेषज्ञ को दिखाकर सलाह लेनी चाहिए तथा उस वक्त सर्जन की जो भी राय हो उसे मानने में देरी नहीं करनी चाहिए |

हर्निया का ईलाज (Treatment of hernia in Hindi):

कहा भी जाता है और सच्चाई भी यही है की हर्निया का एकमात्र वैज्ञानिक इलाज आपरेशन ही है । आपरेशन की विधि क्या होगी अर्थात ऑपरेशन किस तरह से होगा यह सब, रोगी की उम्र, हर्निया के कारणों तथा रोगी की आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करती है । हर्निया के ईलाज के लिए किये जाने वाले ऑपरेशन को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है |

Herniotomy :

इस प्रक्रिया अर्थात विधि में हर्निया की झिल्ली जिसे मेडिकल भाषा में Hemialsac कहा जाता है, को काट कर अलग कर दिया जाता है | नवजात शिशु अर्थात तभी पैदा हुए बच्चे से लेकर 14 वर्ष तक की आयु वर्ग में इस विधि से ही हर्निया का इलाज किया जाता है ।

Herniorraphy :

इस प्रक्रिया अर्थात विधि में उपर्युक्त विधि (Hemiotomy) करने के बाद मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए रिपेयर की विधि यानिकी प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि मांसपेशियां अधिक दबाव सहन कर सके । रिपेयर के लिए प्रोलीन के धागे, टिशू व अन्य सामग्री जैसे कि धागों की जाली (Mesh) का भी प्रयोग किया जा सकता है । किस रोगी के लिए कौन सी विधि ज्यादा उपयोगी साबित होगी, इसका निर्णय सर्जिकल विशेषज्ञ द्वारा लिया जाता है । आजकल हर्निया के लिए दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) का भी प्रचलन है लेकिन औसतन भारतीय की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि यह पद्धति ज्यादातर रोगियों की पहुंच से बाहर है, क्योंकि इसमें खर्च आम सर्जरी से काफी ज्यादा पड़ता है ।

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कृपया ध्यान दें:

Hernia (हर्नियां) एक सामान्य रोग है इसलिए इसका शुरू की अवस्था में ही कुशल सर्जन से राय लेकर आपरेशन करवा लेना चाहिए । लापरवाही करने से रोग बढ़ता है तथा इमरजेंसी की स्थिति भी पैदा हो सकती है जिसमे पेचिदिगियाँ बढ़ सकती है और चिकित्सक को Hernia का ईलाज करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है ।

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