मानव प्रजनन तंत्र के हारमोंस Hormones of reproductive system of Human.

प्रजनन तंत्र के हारमोंस को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है हालांकि पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों में इस प्रकार के हारमोंस के प्रकार अधिक पाए जाते हैं | इसलिए इस लेख में सबसे पहले हम स्त्रियों में पाए जाने वाले प्रजनन तंत्र के हारमोंस के बारे में वार्तालाप करेंगे |

स्त्रियों के प्रजनन तंत्र के हारमोंस (Female hormones) :

यौवन के लिये वयस्क अर्थात परिपक्व स्त्रियों की डिम्बग्रंथियों में दो हॉरमोन बनते हैं | जिनका वर्णन निम्नलिखित है |

एस्ट्रोजिन हार्मोन (estrogens) :

एस्ट्रोजिन हॉरमोन स्टेरॉयड्स होते हैं । इस प्रकार के ये प्रजनन तंत्र के हारमोंस  एक लड़की को पूर्ण परिपक्व स्त्री में परिवर्तित करने के लिये उत्तरदायी होते हैं | इनके मुख्य कार्य निम्नलिखित होते हैं |

  • स्तनों का विकास करना
  • गर्भाशय व योनि का विकास करना
  • पैल्विस को चौडा करता है
  • pubic and axillary hair का विकास
  • adipose (fat) tissue में वृद्धि करता है
  • प्रत्येक माह शरीर को संभावित गर्भावस्था के लिये तैयार करता है ।
  • गर्भावस्था होने पर उसमें भाग लेता है ।

एस्ट्रोजिन के कुछ ऐसे भी प्रभाव है  जिनका संबंध प्रजनन तंत्र से नहीं है  यह निम्नलिखित हैं |

  • यह हड्डियों में कैल्शियम की हानि को कम करता है व हड्डियों को मजबूत बनाता है ।
  • यह खून के जमाव को बढ़ाता है ।

प्रजनन तंत्र के हारमोंस

प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन (progesterone) :

प्रजनन तंत्र के हारमोंस में प्रोजेस्ट्रॉन नामक हॉरमोन भी एक स्टेरॉयड है । यह शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करता है । इसके कई प्रभाव ऐसे भी होते हैं, जिनका सेक्स व प्रजनन तंत्र से कोई संबंध नहीं होता है । यहां प्रोजेस्ट्रॉन के ‘मासिक चक्र व गर्भावस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन किया जा रहा है ।

  प्रजनन तंत्र के हारमोंस मासिक चक्र पर प्रभाव :

सामान्यतः लगभग 28 दिनों का मासिक चक्र होता है, परंतु यह अवधि स्त्रियों में अलग-अलग हो सकती है । प्रत्येक 28 दिनों में थोड़ा रक्त व गर्भाशय की अंदरूनी लाइनिंग जिसे endometrium कहते हैं, वह भंग होने के बाद गर्भाशय से बाहर निकलती है, जिसे मासिक चक्र कहते हैं । इसी समय दोनों में से एक डिम्बग्रंथि में एक follicle बनना प्रारंभ हो जाता है । मासिक चक्र समाप्त होने के बाद भी यह follicle विकसित होता रहता है व एस्ट्रोजिन उत्पन्न करता है | प्रजनन तंत्र के हारमोंस का मासिक चक्र पर अन्य प्रभाव निम्नलिखित हैं |

  • एस्ट्रोजिन का बढ़ता हुआ स्तर endometrium को मोटा बनाता है व endometrium में रक्त के प्रवाह व सप्लाई को बढ़ाता है ।
  • luteinizing hormone (LH) का बढ़ता हुआ स्तर follicle के अंदर विकसित होते हुए अण्डे को first meiotic division (meiosis I) को पूरा करने योग्य बनाता है व secondaryoocyte बनाता है ।
  • लगभग दो सप्ताह बाद LH के उत्पादन में एक sudden surge होता है ।
  • LH के उत्पादन में एक sudden surge, ovulation को उद्दीप्त करता है व secondaryoocyte को fallopian tube में भेजता है ।
  • LH के प्रभाव के कारण अब खाली follicle एक corpus luteum में परिवर्तित हो जाता है ।
  • LH के प्रभाव के कारण यह corpus luteum प्रोजेस्टॉन पैदा करता है, जो संभावित गर्भावस्था के लिये गर्भाशय की अंदरूनी परत अर्थात् endometrium को तैयार करता है । गर्भाशय में संकुचन पैदा करता है । व नए follicle की उत्पत्ति का कारण बनता है ।
  • यदि फर्टिलाइजेशन नहीं होता है, तो प्रजनन तंत्र के हारमोंस प्रोजेस्ट्रॉन का बढ़ा हुआ स्तर GnRH को बनने से रोकता है, जो फिर आगे प्रोजेस्ट्रॉन को बनने से रोकता है । जैसे ही प्रोजेस्ट्रॉन का स्तर नीचे गिरता है, corpus luteum भंग होना प्रारंभ हो जाता है, endometrium नीचे गिरना प्रारंभ हो जाता है, गर्भाशय के संकुचन से रोक हट जाती है व मासिक चक्र का रक्तस्राव व दर्द होना प्रारंभ हो जाता है ।

प्रजनन तंत्र के हारमोंस का गर्भावस्था पर प्रभाव :

अण्डे का फर्टिलाइजेशन fallopian tube में होता है । सप्ताह के अंदर यह blastocyst में परिवर्तित हो जाता है । इस समय यह blastocyst गर्भाशय में पहुंच जाता है और वहां गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़ जाता है, जिसे implantation कहते हैं । इसके साथ दसवें या ग्यारहवें दिन गर्भ स्थापित हो जाता है । blastocyst के दो भाग होते हैं |  एक तो inner cell mass होता है, जो बच्चे में परिवर्तित होता है । दूसरा trophoblast होता है, जिससे बाद में extraembryonic membranes, amnion, placenta, umbilical cord and हैं । यह human chorionic gonadotropin(HCG) बनाना प्रारंभ कर देता है ।

प्रजनन तंत्र के हारमोंस गर्भवस्था को हर स्थिति में प्रभावित करते हैं | HCG एक प्रोटीन है | यह LH, FSH की भांति ही कार्य करता है, परन्तु एक अपवाद यह होता है कि प्रोजेस्ट्रॉन के बढ़ते हुए स्तर से इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है । अतः यह चौथे सप्ताह के अंत में corpus luteum को समाप्त होने से रोकता है और सामान्य मासिक चक्र के बाद गर्भ को जारी रखने में सहायक होता है । क्योंकि केवल implanted trophoblast ही HCG बनाता है । इसलिये गर्भावस्था के प्रारंभ में स्त्री की पेशाब में HCG का पाया जाना ही गर्भावस्था का सूचक होता है । आजकल यह गर्भावस्था का अथवा गर्भधारण को टेस्ट करने का साधन बन चुका है, इसका बहुत अधिक प्रयोग भी किया जा रहा है । जैसे-जैसे गर्भ विकसित होता है, प्लेसैन्टा प्रोजेस्ट्रॉन उत्पन्न करने लगती है । गर्भ को बनाये रखने के लिये इसका होना आवश्यक होता है । प्रजनन तंत्र के हारमोंस का गर्भवस्था के अंत में भी प्रभाव देखे जा सकते हैं जो निम्न हैं |

शिशुजन्म के दौरान प्रभाव:

प्रजनन तंत्र के हारमोंस के गर्भावस्था के अन्त में निम्नलिखित प्रभाव देखे जा सकते हैं |

  • प्लेसैन्टा से एस्ट्रोजिन का स्राव बढ़ जाता है । इसको बढ़ाने में भ्रूण की भी भूमिका होती है | प्लेसैन्टा CRH का स्राव करती है, जिससे भूण की पिटयुटरी ACTH का साव करने के लिये उत्तेजित होती है, जो भृण की एड्रीनल को प्रभावित करता है । फलस्वरूप भ्रूण की एड्रीनल ग्रंथि estrogen precursor dehydroepiandrosterone sulfate (DHEA-S) का स्राव करती हैं । जिसे प्लेसैन्टा द्वारा एस्ट्रोजिन में परिवर्तित कर दिया जाता है ।
  • प्रजनन तंत्र के हारमोंस एस्ट्रोजिन का बढ़ा हुआ स्तर गर्भाशय की मांसपेशियों को smooth बनाता है । पिट्यूटरी के posterior lobe से व गर्भाशय से Oxytocin निकलता है ।
  • मां के खून में व amniotic fluid में बड़ी मात्रा में prostaglandins भी दिखाई देते हैं । Oxytocin व prostaglandins दोनों ही गर्भाशय में संकुचन पैदा करते हैं व प्रसव प्रारंभ होता है ।
  • इन्हीं प्रजनन तंत्र के हारमोंस की वजह से बच्चे के जन्म के तीन-चार दिन बाद स्तनों में से दूध निकलना प्रारंभ हो जाता है ।
  • दूध का निर्माण pituitary hormone prolactin (PRL) के कारण होता है ।
  • दूध का स्राव अथवा स्तनों में से दूध निकलना Oxytocin हॉरमोन के कारण होता है ।
  • दूध में एक inhibitory peptide होता है । यदि स्तन पूरी तरह खाली नहीं होते हैं, तो यह दूध के निर्माण को रोक देता है, जिससे आवश्यकता व सप्लाई के बीच में सामंजस्य स्थापित हो जाता है ।

RU-486 :

इसे mifepristone भी कहते हैं । यह एक synthetic steroid है, जो प्रजनन तंत्र के हारमोंस प्रोजेस्ट्रॉन से संबंधित है । यह एक progesterone antagonist है, जो प्रोजेस्ट्रॉन के प्रभाव को रोकता है ।

  • RU-486/receptor complex, transcription factor की भांति सक्रिय नहीं होते हैं ।
  • जीन्स जो प्रोजेस्ट्रॉन के कारण turned on रहती हैं, वे RU-486 से turned off हो जाती हैं । जो प्रोटीन गर्भधारण व उसे बनाये रखने के लिये आवश्यक होते हैं, वे बनना बंद हो जाते हैं ।
  • endometrium नीचे गिर जाती है ।
  • भ्रूण इससे अलग हो जाता है व (HCG) बनाना बंद कर देता है ।
  • corpus luteum प्रोजेस्ट्रॉन बनाना बंद कर देता है ।
  • गर्भाशय के संकुचन पर से रोक हट जाती है ।
  • भ्रूण व endometrium आदि शीघ्र ही योनि से बाहर निकल जाते हैं ।

उपर्युक्त गुणों के कारण ही इसका प्रयोग induce abortion के लिये किया जाता है । RU-486 का प्रयोग गर्भावस्था के पांच से सातवें सप्ताह तक ही सीमित रहता है ।

प्रजनन तंत्र के हारमोंस का रजोनिवृत्ति पर प्रभाव :

स्त्रियों में मासिक चक्र कई सालों तक चलता रहता है, परन्तु लगभग 42 से 52 वर्ष की आयु के बीच follicles, FSH and LH के प्रति कम responsive होने लगते हैं । Ovulation व मासिक धीरे-धीरे अनियमित होने लगता है, फिर बंद हो जाता है । इसे ही रजोनिवृत्ति कहते हैं । इस समय एस्ट्रोजिन का स्तर पहले की अपेक्षा केवल 1/10 अथवा उससे भी कम रह जाता है । खून में FSH and LH दस गुना बढ़ जाता है । यह बढ़ा हुआ हॉरमोन का स्तर शरीर में कई शारीरिक, भावनात्मक लक्षण व कठिनाइयां पैदा कर सकता है ।

एस्ट्रोजिन व प्रोजेस्ट्रॉन का निर्धारण :

एस्ट्रोजिन का स्राव folliclestimulating hormone द्वारा उद्दीप्त होता है, जो स्वयं hypothalamic gonadotropin releasing hormone (GnRH) से नियंत्रित होते हैं । प्रोजेस्ट्रॉन का स्राव luteinizing hormone (LH) द्वारा उद्दीप्त होता है, जो gonadotropin releasing hormone (GnRH) से नियंत्रित होते हैं ।

हॉरमोन रिप्लेसमेन्ट थेरेपी (Hormone replacement therapy) :

रजोनिवृत्ति के बाद कई स्त्रियां, जब उनमे प्रजनन तंत्र के हारमोंस एस्ट्रोजिन व प्रोजेस्ट्रॉन बनना बंद होने लगता है, तब ये हॉरमोन्स लेना प्रारंभ कर देती हैं । इसके निम्नलिखित लाभ होते हैं |

  • शारीरिक, भावनात्मक लक्षण व कठिनाइयों में कमी आ जाती है ।
  • कैल्शियम के loss में कमी आ जाती है ।
  • cardiovascular disease में कमी आ जाती है ।
  • इस बात के भी साक्ष्य मिले हैं कि estrogen component स्तन कैंसर व endometrial cancer के खतरे को बढ़ाता है । इसीलिये selective estrogen response modulators (SERMs) or “designer estrogens” को विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं कि बिना किसी खतरे के सुरक्षात्मक प्रभाव प्राप्त हो सके ।

पुरुषों के प्रजनन तंत्र के हारमोंस (Male hormones) :

पुरुषों में प्रजनन तंत्र के हारमोंस में प्रमुख androgen अथवा सेक्स हॉरमोन testosterone होता है । यह स्टेरॉयड testes में बनता है । testosterone का स्राव किशोरावस्था में बढ़ जाता है । इसी के कारण पुरुषों में दाढ़ी विकसित होती है । testosterone शुक्राणुओं के उत्पादन के लिये भी आवश्यक होता है । testosterone का उत्पादन luteinizing hormone (LH) के द्वारा नियंत्रित होता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि के anterior lobe से निकलता है और हाइपोथैलेमस के GnRH के द्वारा नियंत्रित होता है । LH को interstitial cell stimulating hormone (ICSH) भी कहते हैं । पुरुष प्रजनन तंत्र के हारमोंस Testosterone testosterone का बढ़ा हुआ स्तर हाइपोथैलेमस के GnRH को कम करता है ।

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