मानव शरीर में पानी की महत्वता – Importance Of water in Human Body

हालांकि मानव शरीर एक नहीं अपितु सैकड़ों कार्य करता है कहने का आशय यह है की मनुष्य का शरीर जितने भी कार्य करता है उन कार्यों को निष्पादित करने के लिए शरीर में पानी अर्थात जल की नितांत आवश्यकता होती है | जहाँ तक मानव शरीर में जल के महत्व का सवाल है उसका अंदाज़ा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है की मनुष्य के शरीर में लगभग 64% मात्रा पानी की ही है | इसलिए इस आंकड़े से यह साबित होता है की मनुष्य शरीर में 64% पानी की मात्रा तो 36% अन्य पदार्थों की मात्रा पायी जाती है इसलिए मनुष्य शरीर में पानी की महत्वता अन्य पदार्थो से कहीं अधिक है | मनुष्य शरीर के प्रत्येक छोटी बड़ी कोशिका में कम या फिर अधिक मात्रा में पानी भरा रहता है | इसके अलावा लसीक, रक्त तथा अलग लग ग्रन्थियों के रस में भी जल का अधिक भाग होता है | पानी सिर्फ मनुष्य के लिए ही उपयोगी नहीं अपितु यह धरती पर प्रत्येक जीव कोष का जीवन दाता है |

शरीर में पानी

शरीर में पानी का कार्य:

किसी भी जीवधारी के शरीर में पानी की बहुत अधिक महत्वता होती है, जीवधारी के शरीर में पानी निम्न कार्य करने में सहायक है |

  • पानी की सहायता से ही शरीर में रक्त संचार होता है |
  • पानी के कारण ही शरीर के भीतर की गंदगी मल मूत्र तथा पसीने इत्यादि के रूप में आसानी से बाहर निकल जाती है |
  • जल की ही सहायता से हमारा भोजन पचता है और पतला होकर शरीर के सभी भागों में पहुँचता है |
  • जल के कारण ही हमारे शरीर की गर्मीं स्थिर बनी रहती है और अतिरिक्त गर्मी शरीर से पसीने के माध्यम से बाहर निकल जाती है |
  • जल हमारे शरीर को हरा भरा रखने के कार्य के अलावा शरीर की भीतरी गंदगी को भी पसीने एवं मूत्र इत्यादि के माध्यम से बाहर निकालकर गंदगी के कारण पैदा होने वाली बीमारियों से हमारी रक्षा करता है |

शरीर में पानी कैसे पहुँचता है :

शरीर में पानी पहुँचाने का स्रोत एक तो प्रत्यक्ष रूप से पानी का सेवन करना है लेकिन पानी के सेवन के अलावा यह हमारे शरीर के भीतर दूध आदि तरल पदार्थों तथा भोजन के साथ भी मिलकर पहुँचता है | भोजन के अन्य उत्पादनों में भी काफी पानी होता है | जैसे मांस में 50% पानी, फलों में 85% और हरी शाक सब्जियों में 90% से भी अधिक पानी की मात्रा पाई जाती है | बीमारियों से हमारा बचाव हो इसके लिए हमें अधिक मात्रा में पानी का सेवन अवश्य करना चाहिए शरीर का लगभग 2/3 भाग पानी ही होता है | पानी शरीर में प्रोटीन और खनिज द्रव्यों की हानि की पूर्ति भी करता है | अस्थि सद्रश कठिन धातु में भी आधा भाग जल ही होता है |

शरीर से जल कैसे बाहर निकलता है :

शरीर में जल धातु का क्षय अनेक रूपों में होता है | जिनका विवरण निम्नवत है |

  • शरीर से जल मूत्र के साथ भी बाहर निकलता है, मूत्र में 96% तक जल ही होता है |
  • पसीने में भी जल की मात्रा पायी जाती है इसलिए पसीने के साथ भी शरीर से पानी बाहर निकलता है |
  • फुफ्फुसों द्वारा श्वास निकालने से भी जल का क्षय होता है |
  • मल के दौरान भी कभी अधिक तो कभी कम पानी शरीर से बाहर निकलता है |

चूँकि अनेक क्रियाओं के माध्यम से पानी शरीर से बाहर निकलता रहता है इसलिए इसकी पूर्ति के लिए पानी पीना अनिवार्य माना जाता है | आहार में जल का प्रमाण कम होने से ऊपर बताई गई क्रियाएं जो की शरीर के लिए बेहद आवश्यक होती हैं एवं जिनसे शरीर के लिए अनुपयुक्त पदार्थ निकलते हैं बिगड़ जाती हैं इस कारण यथावत पाक एवं शोषण नहीं हो पाता है |

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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