पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए बीस बेहतरीन घरेलू नुश्खे

पीलिया का घरेलू ईलाज अत्यंत प्रभावकारी ढंग से किया जा सकता है सामान्य तौर पर खून में उपलब्ध  लाल कणों की आयु 120 दिन की होती है । लेकिन यदि किसी कारण से इनकी आयु कम हो जाये तथा लाल रक्त कण जल्दी ही अधिक मात्रा में नष्ट होने लग जायें तो पीलिया नामक यह रोग होने लगता है । खून में बिलीरुबिन (bilirubin) नामक एक पीला पदार्थ होता है और रक्त में लाल कणों के नष्ट होने से खून में इसकी मात्रा बढ़ जाती है सामान्यतया खून में इस बिलीरुबिन नामक पीले पदार्थ की मात्रा बढ़ जाना ही पीलिया कहलाता है | इसके अलावा यदि लीवर अर्थात यकृत ढंग से काम नहीं कर रहा हो तो तब भी पीलिया होने की संभावना रहती है | पित्त की उत्पति लीवर में होती है इसलिए जब लीवर से आँतों तक पित्त पहुँचाने वाली नलिकाओं में पथरी अर्बुद, किसी विषाणु या रासायनिक पदार्थों से लीवर की कोशिकाओं में दोष उत्पन्न हो जाता है तो पित्त आँतों में पहुंचकर खून में मिलने लगता है | और जब खून में पित्त मिल जाता है तो इसके प्रभाव से त्वचा भी पिली होने लगती है | त्वचा का इस तरह से पीला हो जाना भी पीलिया ही कहलाता है | इससे पहले की हम पीलिया का घरेलू ईलाज करने में सहायक घरेलू नुश्खों की बात करें आइये जानते हैं इसके कुछ मुख्य लक्षणों के बारे में |

पीलिया का घरेलू ईलाज

पीलिया के लक्षण (Symptoms of Jaundice):

  • वर्तमान में लोग अधिकतर तौर पर अभिष्यन्दि पीलिया (Catarrhal Jaundice) से पीड़ित होते हैं । इसमें कुछ दिनों तक जी मिचलाता है, बड़ी निराशा प्रतीत होती है ।
  • ग्रसित मरीज की आँखें, त्वचा पीली हो जाती हैं ।
  • पीलिया में जीभ पर मैल जमा रहता है तथा 99 से 100 डिग्री तक बुखार भी रह सकता है ।
  • पीलिया से ग्रसित रोगी का पेशाब गहरे रंग की होने के साथ साथ अधिक और पीली भी होती है । इस रोग में नाड़ी की गति भी कम हो जाती है |
  • बसा युक्त पदार्थ जैसे घी, तेल इत्यादि पदार्थ नहीं पाच पाते हैं |
  • लीवर टाइट एवं इसमें दुखन हो सकती है |
  • पीलिया से ग्रसित रोगी का शरीर, आँखें, नाखून, मूत्र इत्यादि पीले दिखने लगते हैं ।
  • रोगी को शरीर में खुजली का सा एहसास होता है |
  • इस रोग में चोट लगने पर खून बहुत ज्यादा बह सकता है |
  • इस रोग में रोगी को भूख न लगने की समस्या हो सकती है, रोगी का वजन कम हो सकता है रोगी को दस्त एवं गैस की समस्या भी हो सकती है |
  • इसके अलावा पीलिया के रोगी का मुहं का स्वाद बिगड़ा रहता है उसके शरीर में कमजोरी और उसे बुखार का आभास होता है |

पीलिया में सावधानियाँ:

पीलिया का घरेलू ईलाज तभी संभव है जब रोगी कुछ सावधानियां अपनाये और वर्जित खाद्य वस्तुओं का उपयोग कदापि न करे |

  • पीलिया के रोगी को जुलाब दिया दिया जा सकता है और उसके बाद दवाइयों का सेवन कराया जा सकता है | आम तौर पर यह बीमारी जुलाब से ही ठीक हो जाती है |
  • रोगी को पूरा आराम करना बेहद जरुरी है |
  • पीलिया के रोगी को तरल पदार्थों का सेवन अधिक करना चाहिए |
  • खाने में जल्दी पाचक पदार्थ जैसे दलिया, खिचड़ी, चावल, हरी साग सब्जी, छाछ में नमक डालकर पीना चाहिए |
  • मांसाहार एवं चिकनाईयुक्त पदार्थों को पूर्ण रूप से बंद कर दें |
  • रोग के शुरुआत में गन्ने के रस एवं ग्लूकोज़ के पानी का अधिक इस्तेमाल करें |
  • आलूबुखारा, तरबूज, टमाटर, खरबूजा, नारंगी इत्यादि का सेवन करना पीलिया में लाभदायक है । इसलिए हो सके तो इनका सेवन जरुर करें |

पीलिया का घरेलू ईलाज के लिए नुश्खे (Home remedies for jaundice in Hindi):

पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए यहाँ पर कुछ बेहतरीन नुश्खों के बारे में बताया जा रहा है यदि आप भी पीलिया रोग से ग्रसित हैं तो आपको कौन से नुश्खे का फायदा हुआ यह कमेंट बॉक्स के माध्यम से अवश्य बताएं ताकि और लोग भी उस नुश्खे को अजमाकर पीलिया का घरेलू ईलाज करने में सक्षम हों |

  • दो छुआरे, पांच छोटी इलायची एवं आठ बादाम लें फिर इन्हें रात भर मिटटी के बने कोरे कुल्हड़ में भिगोने के लिए रख दें | सुबह इन सबको निकालकर अच्छी तरह पीस लें फिर मक्खन एवं मिश्री के साथ रोगी को चटायें | तीन दिन यही प्रक्रिया करने पर चौथे दिन मूत्र साफ़ आता है |
  • पीलिया में इमली भी उपयोगी होती है इसका फायदा लेने के लिए इमली को जल में भिगोकर, मथकर उस पानी को पी लें ।
  • पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए लौकी को भी इस्तेमाल किया जा सकता है इसके लिए एक लौकी लें और उसे धीमी आग में चूल्हे के ऊपर साबुत ही रख दें अर्थात लौकी का भुर्ता-सा बना लें, उसके बाद इसका रस निचोड़ लें और फिर स्वादानुसार मिश्री मिलाकर इस रस को पीयें ।
  • पीलिया में करेला भी लाभकारी है इसलिए करेले का रस सुबह शाम पीने से भी लाभ होता है |
  • फिटकरी से पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए दो सौ ग्राम दही में चुटकी भर फिटकरी घोल कर पीला सकते हैं । यदि पीलिया बच्चों को है तो यह मात्रा घटाई जा सकती है |
  • थोड़ी सी चने की दाल लें और इसे पानी में भिगो दें । फिर दाल निकाल कर दाल के बराबर ही गुड इसमें मिला दें और इसे तीन दिन तक खाएं जब प्यास लगे तो वही पानी पीयें जिसमे दाल भिगोई थी ऐसा करने से पीलिया में फायदा होता है |
  • पीलिया में सौंठ एवं गुड़ एक साथ खाने से भी लाभ होता है |
  • लगभग साठ ग्राम ताजे आँवले के रस में तेइस ग्राम शहद मिलाकर एवं आधा गिलास पानी मिलाकर पीने से भी पीलिया नामक रोग में आराम होता है ।
  • पीलिया के घरेलू ईलाज में पीपल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है लेकी यह पीपल का पेड़ नहीं है बल्कि यह काली-सी होती है । और पंसारी के दुकान पर मिलती है । पीलिया में इसका फायदा लेने के लिए तीन पीपल तीन चम्मच छाछ में भिगो दें । उसके बाद चौबीस घण्टे भीगने के बाद पीपल को पीसकर जरा-सा नमक मिलाकर पानी के साथ पी जायें । प्रतिदिन क्रमानुसार एक-एक पीपल बढ़ाएँ । जब दस पीपल हो जाये तो एक-एक पीपल कम करें । इसके सेवन से पीलिया, यकृत, प्लीहा, पुराना ज्वर, भूख कम लगना, अपच के दस्त आदि ठीक हो जाते हैं, पुराने ज्वर में तो यह बहुत लाभ करती है ।
  • इस विधि से पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए सबसे पहले एक प्याज लें फिर उसे काटकर नींबू के रस में डाल दें । प्याज डालने के बाद उसके ऊपर से नमक, काली मिर्च भी डाल दें । इस तरह से प्रतिदिन सुबह शाम एक प्याज खाने से कुछ दिनों में पीलिया ठीक हो जाता है |
  • दूसरी विधि में एक सफेद प्याज लें और इसका रस निकाल लें इस आधे कप रस में गुड़ एवं पिसी हुई हल्दी मिला लें उसके बाद इसे सुबह शाम पीयें |
  • आधा कप गरम दूध में चार लहसुन की कलियाँ पीसकर दाल दें यह दूध तो पी ही जाएँ इसे ऊपर और भी दूध पीयें चार दिन तक ऐसा करने से पीलिया ठीक हो जाता है |
  • कहा जाता है की गाजर पीलिया की प्राकृतिक औषधि है । यूरोप में पीलिया के रोगियों को गाजर का रस, गाजर का सूप या गाजर का गर्म काढ़ा पीने के लिए दिया जाता है ।
  • फूल गोभी से पीलिया का ईलाज करने के लिए फूल गोभी का रस एवं गाजर का रस बराबर मात्रा में लें और इस रस को एक-एक गिलास दिन में तीन बार पिलायें |
  • मूली द्वारा पीलिया का घरेलू ईलाज संभव है इसके लिए रोगी चाहे तो सुबह उठते ही कच्ची मूली खा सकता है | या फिर  मूली के पत्तों का 125 ग्राम रस में 30 ग्राम चीनी मिलाकर छानकर सुबह पिलायें । पीते ही लाभ होगा । यह सब प्रकार के पीलिया में लाभप्रद है ।
  • गन्ने का रस भी पीलिया को नियंत्रण में लाता है इसलिए जौ का सत्तू खाकर ऊपर से गन्ने का रस पीयें । ऐसा करने से एक सप्ताह में पीलिया ठीक हो जाता है । हो सके तो सुबह सुबह गन्ना चूस सकते हैं । और पीलिया में गन्ने का रस दिन में एक नहीं बल्कि कई बार पिया जा सकता है ।
  • पानी के गिलास में एक एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन तीन बार पीयें इससे भी पीलिया में लाभ होता है |
  • पपीता भी पीलिया का घरेलू ईलाज करने में सहायक है इसके लिए 75 ग्राम छिलके सहित कच्चा पपीता लें और उसे चटनी की भांति बारीक पीस लें उसके बाद उसे 250 ग्राम पानी में घोल दें । उसके बाद उसमे स्वादानुसार मीठा मिलाएं और इस पेय को रोगी को प्रतिदिन तीन बार पिलायें | कुछ दिनों पश्चात पीलिया ठीक हो जाता है | यदि इस पेय को स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो इसमें  स्वादानुसार नीबू, काली मिर्च मिला सकते हैं । यदि बच्चों को पीलिया है तो यह मात्रा कम लें । उपर्युक्त विधि से बनाया गया  पपीते का यह शर्बत पीलिया ठीक कर देता है । लेकिन ध्यान रहे पपीता ताजा होना चाहिए क्योंकि  पपीते में जो दूध होता है, वह इस रोग में लाभ करता है ।
  • एक गिलास छाछ लें और उसमे दस काली मिर्च पीसकर डाल दें अब इसका सेवन प्रतिदिन तब तक करें जब तक पीलिया ठीक नहीं हो जाता है |
  • पुदीना से पीलिया का घरेलू ईलाज करने के लिए पुदीने की चटनी बना लें और इसे नित्य रोटी के साथ खाएं |

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