कब्ज के प्रकार, कारण, नुकसान एवं ईलाज |

Constipation यानिकी हिन्दी में कब्ज से अभिप्राय मानव शरीर की उस अवस्था से है जब मनुष्य का पाचन तंत्र खराब हो जाता है अर्थात मनुष्य कुछ भी खाए उसे पचा पाने में असमर्थ होता है जिस कारण पेट के अन्दर मल कड़ा हो जाता है जो की पेट से बाहर आने में काफी दिक्कतें करता है | कहने का आशय यह है की जब किसी भी मनुष्य का मल पूरी तरह विसर्जित नहीं हो पा रहा होता है या फिर मल सख्त आ रहा होता है तो कहा जाता है की उस व्यक्ति या महिला को Constipation है ।

Kabj-Constipation

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कब्ज के प्रकार (Types of Constipation in Hindi):

कब्ज अर्थात Constipation की यदि हम बात करें तो यह मुख्यत: दो प्रकार की होती है |

  1. Chronic Constipation:

इसमें मल के विसर्जन में बेहद कठिनाई महसूस होती है। कुछ रोगियों का मल बिलकुल नहीं निकलता तथा कुछ का मल पेट से बाहर बेहद कम मात्रा में आता है या सख्त आता है। शौच से निवृत होने के बाद भी रोगी के मन में शौच की शंका बनी रहती है।

  1. Acute Constipation:

इसमें न तो मल, न ही पेट की हवा (फलेटस) का विसर्जन होता है। यह स्थिति प्राय: आंत के बंधे रोगियों में होती है व एक्यूट अबडोमन की अवस्था में होता है। New paragotri पेट के रोगों से पीड़ित व्यक्तियों में लगभग दो तिहाई रोगी Constipation की शिकायत से ही चिकित्सक से परामर्श हेतु आते हैं। यह एक आम समस्या है जिसे प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवनकाल में कभी न कभी अवश्य महसूस करता है।

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कब्ज के कारण (Cause of Constipation):

  • खाने-पीने में रेशेदार पदार्थों की कमी कब्ज का प्रमुख कारण है।
  • मैदे से बने खाद्य पदार्थ (बिस्कुट, पूड़ी, भटुरे, मिठाईयां इत्यादि एवं फास्टफूड, पेस्ट्री, केक, नूडल्स) मांसाहारी भोजन तथा अंडों का अधिक सेवन भी इस रोग को पैदा करते है।
  • चाय, काफी, मदिरा का अधिक सेवन भी कब्ज के रोगियों के लिए नुकसानदायक है।
  • यदि किसी व्यक्ति को कम पानी पीने की आदत है तो वह भी Constipation की चपेट में आ सकता है क्योंकि कम पानी पीना कब्ज के रोग में अहम भूमिका निभाता है।
  • भागदौड़ की जिन्दगी, व्यायाम की कमी, शौच के लिए समय निर्धारण न करना इत्यादि भी कब्ज अर्थात Constipation होने के कारण हो सकते हैं |
  • घण्टों बैठकर काम करना या अधिक देर तक लेटकर टीवी देखना इत्यादि कब्ज को बढ़ावा देता है।
  • खासतौर पर स्कूली बच्चों में देखा गया है कि सुबह देर से उठना फिर जल्दी से तैयार हो जाना, यहां तक कि शौच के लिए समय न निकाल पाना तथा बिना नाश्ता किए स्कूल चले जाना भी कब्ज का कारण बनता है।
  • नींद की कमी भी कब्ज को बढ़ावा देती है।
  • कब्ज कई अन्य रोगों को जैसे की मिसेकडीमा, बड़ी आंत का कैंसर, आंत की स्टरीकचर, पेट की रसौली, आंत का घूम जाना, आंत का उलझ जाना, आंत के स्नायुतंत्र की कमी तथा आंत की टीबी इत्यादि का भी लक्षण हो सकता है ।
  • गर्भावस्था में बच्चेदानी तथा इसमें पल रहे शिशु के वजन से बड़ी आंत पर दबाव से भी कब्ज हो सकती है ।
  • मानसिक परेशानी, बुढ़ापा, इरीटेबल बावल सिन्ड्रोम, इल्कट्रोलाईट असंतुलन तथा स्त्रायुतंत्र के रोगों में आंत की गति धीमी हो जाती है तथा मल का विसर्जन पूरी तरह नहीं हो पाता जिससे कब्ज हो जाती है ।
  • बवासीर, गुदाचीर, पेरीएलएल एबसैस, मलद्वार का संकरा होना तथा मलद्वार का कैंसर भी कब्ज को बढ़ावा देता है।
  • नशीली दवाईयां, नीद की गोलियां, मानसिक रोगी को दी जाने वाली दवाईयां, दर्द निवारक दवाईयां, अफीम व अन्य प्रकार का नशा आदि कब्ज का कारण बन सकता है ।

कब्ज से होने वाले रोग/नुकसान (Disadvantage of Constipation)

प्राचीन चिकित्साविदों के अनुसार Constipation कई रोगों का कारण बन सकता है तथा प्राय: पेट साफ न होने को एक बहुत बड़ी कमी माना गया है। आधुनिक विज्ञान में कुछ रोगों में कब्ज का स्पष्ट योगदान सिद्ध हुआ है | जिसका अभिप्राय है की कब्ज अनेकों बीमारियों को शरीर में आमंत्रित करता है जिनमे मुख्य रूप से कुछ बीमारियों के नाम निम्नवत हैं  |

 गुदाचीर : Constipation की वजह से मल देर तक आंतों में पड़ रहता है। ऐसी स्थिति में उसका तरल भाग आत सोख लेती है परिणामस्वरूप मल शुष्क हो जाता है। अब इस शुष्क मल को विसर्जन में और भी कठिनाई होती है। यदि जबरदस्ती से इसे बाहर निकाला जाता है तो मलद्वार पर जख्म हो जाता है जिसे गुदाचीर या फिशर के नाम से जाना जाता है।

बवासीर: Constipation के कारण नसों पर लगातार दबाव बना रहता है। यह मलद्वार की दीवार के उत्तकों को धीरे-धीरे कमजोर कर देता है शौंच के लिए अनावश्यक जोर लगाना अग्नि में घी डालने के समान माना गया है इसका नतीजा यह है कि बवासीर के मस्से इन उतकों से मिलने वाले सहारे की कमी से फूलने लगते हैं तथा कुछ केसों में गुदाद्वार से बाहर भी आ जाते

 हर्नियां : कब्ज में जोर लगाकर पेट साफ करने से विभिन्न प्रकार के हर्नियां होने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रोलेपस : स्त्रियों में बच्चेदानी व योनी की स्पोर्टस ढीली हो जाती है तथा इन अंगों का प्रलोपस हो सकता है।

Constipation शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। कब्ज की स्थिति में व्यक्ति बेचैनी महसूस करता है तथा काम में मन नहीं लगा पाता। पेट दर्द, गैस बदहजमी, भूख न लगना भी कब्ज के परिणामों से संभव है। कुछ रोगियों में शौच की नियंत्रण प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है।

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कब्ज का ईलाज (Treatment of Constipation in Hindi):

प्राय देखने में आता है कि जैसे ही कब्ज की शिकायत हुई रोगी अपने आप इसके लिए या तो कोई चूर्ण या कोई दवाई लेने लग जाते हैं। Constipation को साधारण या मामूली शिकायत मानकर हर कोई इसका कोई न कोई उपाय सुझा ही देता है। कब्ज का कारण का पता लगाए बिना इसका इस प्रकार अपने आप इलाज करना काफी नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। इसलिए कब्ज की तकलीफ होने पर हमेशा ही कुशल चिकित्सक जिसकी रूचि या विशेषज्ञता पेट के रोगों के इलाज में हो, उससे संपर्क करें। अपनी पूरी दिनचर्या, खान-पान का ब्यौरा, चिकित्सक को दें तथा इसके स्थायी समाधान हेतु प्रयासरत रहें। चिकित्सक को रोगी में ऊपर लिखित कारणों में से कब्ज का कारण पता लगाना होता है जैसे कि खान-पान में गड़बड़ी या अन्य रोगों का लक्षण इत्यादि, इसके लिए रोगी की पूर्ण शारीरिक जांच करना पड़ती है। अक्सर कुछ रोगी दूरभाष या पत्राचार के माध्यम से कब्ज का उपचार सुझाने के लिए चिकित्सक से संपर्क करते हैं। यहां यह उल्लेख करना अति आवश्यक है कि बिना जांच के दवा सुझाना रोगी के हित में नहीं है। इस प्रकार की सलाह के मुताबिक दी गई दवाईयों के दुष्परिणाम उस रोगी की दशा को देखकर ही लगाया जा सकता है जिसने इन्हें झेला हो। Constipation के कारणों की जांच हेतु कुछ रोगियों में अल्ट्रासाउंड, बड़ी आंत तथा छोटी आंत के रंगीन एक्सरे तथा इण्डोस्कोपी की भी जरूरत पड़ सकती है। इस लेख में कुछ साधारण नियमों का ही वर्णन किया जा रहा है जो इस तकलीफ से छुटकारा दिलाने में सहायक हो सकते हैं |

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कब्ज को कैसे दूर करें (How to get rid of constipation in Hindi):

कब्ज अर्थात Constipation से ग्रसित रोगी यदि नीचे बताये गए नियमों का अनुसरण करे तो बहुत जल्दी उसे कब्ज नामक रोग से छुटकारा मिल सकता है |

दिनचर्या एवं खान पान सम्बन्धी नियम:

  • कब्ज से ग्रसित व्यक्ति को चाहिए की वह 7-8 घंटे की नींद प्रतिदिन ले |
  • सुबह जल्दी उठकर टहलने या व्यायाम या दोनों की आदत डालें |
  • शौंच के लिए समय निर्धरण करें शौंच करने में जल्दबाजी बिलकुल न करें |
  • जब भी शौंच जाने का मन करे अवश्य जाएँ अनावश्यक रूप से मल को रोके नहीं |
  • भोजन समय पर करना बेहद जरुरी है |
  • दिन में तीन से चार लीटर पानी या अन्य तरल पदार्थ जैसे छाछ, जूस इत्यादि पीने की आदत डालें |
  • कब्ज को जल्दी से ठीक करने के लिए आहार में रेशेदार पदार्थों को जैसे पालक, साग, घीया, तरबूज, गाज़र इत्यादि को सम्मिलित करें |
  • फल जैसे सेब,नाशपती सब्जियां जैसे खीरा, ककड़ी इत्यादि जो भी छिलके साथ खायी जा सकती हैं छिलके सहित खाएं |
  • कब्ज से ग्रसित व्यक्ति को अपने लिए आटा मोटा पिसवाना चाहिए और उसे छानना नहीं चाहिए इसके अलावा अंकुरित दलों और अनाज का भी उपयोग किया जा सकता है |
  • गेहूं का दलिया को खान पान में सम्मिलित कीजिये क्योंकि यह भी कब्ज को दूर करने में सहायक होता है |
  • माँसाहारी एवं फास्टफूड भोजन का कम से कम प्रयोग करें |
  • उठते समय अर्थात बिस्तर पर चाय पीने की आदत को छोड़ दें |
  • मिर्च मसाले आचार मिठाइयों इत्यादि का सेवन बहुत कम करें |
  • कोल्ड ड्रिंक, काफी, चाय, शराब जितनी कम मात्रा में लेंगे कब्ज से उतनी जल्दी छुटकारा मिलेगा |

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कब्ज को दूर करने की दवाएं (Medicine For Constipation):

Constipation निवारक दवाईयों का सेवन चिकित्सक की सलाह से ही करें। कब्ज निवारक दवाई केवल तब तक लें जब तक आप अपनी दिनचर्या एवं जीवन शैली में बदलाव नहीं कर लेते। कब्ज निवारक दवा तो केवल लक्षण मात्र को ही ठीक करती है न की कब्ज के कारण की। ठीक उसी तरह जैसे की बुखार उतारने की दवा बुखार की तीव्रता को कम करता है न की कारण। आजकल विभिन्न प्रकार की कब्ज दूर करने वाली दवाईयां व चूर्ण बाजार में उपलब्ध है तथा समाचार पत्रों एवं दूरदर्शन के माध्यम से व्यक्ति को प्रभावित करने की विभिन्न कपनियों में होड़ लगी है। कई रोगी तो इनसे प्रभावित होकर वर्षों तक ये चूर्ण व दवाएं प्रयोग करते रहते हैं तथा इन दवाओं पर निर्भरता बना लेते हैं। इसे laxative habit के नाम से जाना जाता है। बिना बीमारी के कारण जाने तथा डाक्टरी सलाह के बिना स्वयं दवा लेना (चाहे देशी या अंग्रेजी) आत्महत्या के प्रयास करने जैसा ही काम है ।

  • कब्ज अर्थात Constipation से ग्रसित व्यक्ति को चिकित्सक द्वारा कुछ इस तरह की दवाइयां कब्ज के निराकरण हेतु दी जा सकती हैं |
  • अगर मल सख्त आ रहा हो तो 0reamaffin Liquid रात को 2 चम्मच से 4 चम्मच तक सोते समय लेने की हिदायत डॉक्टर द्वारा दी जा सकती है या Agrol Liquid रात को 3 से 4 चम्मच सोते समय लेने की हिदायत मिल सकती है इसके अलावा Dupholac, Livoluk भी 25 à 30 मिली. तक लेने की हिदायत मिल सकती है ।
  • अगर मल की मात्रा कम है तो Bulk Forming दवाईयां जैसे कि Naturecure, Naturolex, Softrac, Isogel इत्यादि दो चम्मच रात को पानी या दूध में मिलाकर लेने की हिदायत चिकित्सक से मिल सकती है |
  • अगर मल ज्यादा सख्त है या निकल नहीं रहा तो Glycerin Suppository गुदा मार्ग में लगाने की हिदायत दी जा सकती है।
  • प्राय देखा गया है कि कब्ज के लिए एनीमा लगाने की सलाह कुछ चिकित्सक बिना दूरगामी परिणामों का हिसाब लगाए दे देते हैं। रोगी दूसरे या चौथे दिन एनीमा लगाना शुरू कर देता है। जब तक रोगी प्रशिक्षित डाक्टर के पास पहुंचता है तब तक रोग काफी फैल चुका होता है।कैंसर या आंत की टीबी रोग इत्यादि केसों में ऐसा होता है।

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