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coronary- artery disease

खान-पान द्वारा कोरोनेरी आर्टरी बीमारी से बचाव कैसे करें ।

शाकाहारी भोजन हिंसा रहित और वातावरण के लिए भी हितकारी होता है। शाकाहारी भोजन पेड़ पौधों से मिलता है इसलिए उसे पाने में निर्दयता का भाव नहीं आता, जितनी जमीन में 5-7 पशुओं के लिए भोजन प्राप्त होगा उतनी जमीन से 80-100 आदमियों के लिए अनाज उत्पन्न हो जाता है। भारतीय उपमहाद्वीप में आज जमीन की कमी के कारण जंगल काटे जा रहे हैं। खेती योग्य जमीन पर बड़े पैमाने पर मकान बन रहे हैं और करीब-करीब यही हालत दूसरे घनी आबादी वाले महाद्वीपों की है, जंगलों के कटने से बहुत से पशु-पक्षी मिटने की कगार पर पहुंच गए हैं। शाकाहारी भोजन में तरह-तरह के अनाज फल और सब्जिया उपलब्ध हैं। कई तरह की चीजें मिला जुलाकर खाने से सभी आवश्यक ऐमाइनों एसिड, विटामिन, खनिज, लवण और कुछ अभी भी अनजाने तत्त्व मिलते रहते हैं। जिससे कुपोषण का डर घट जाता है।

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कोरोनेरी आर्टरी बीमारी से बचने के लिए शाकाहारी भोजन करें

बड़ी आंत का कैन्सर शाकाहारी व्यक्तियों में काफी कम होता है और दूसरे प्रकार के कैन्सर में भी कमी देखी गई है। अगर तले हुए खाद्य पदार्थ का सेवन कम से कम किया जाए। शाकाहारी भोजन से गुर्दो पर, यूरिया, यूरिक ऐसिड और दूसरे हानिकारक पदार्थों को साफ करने को हटाने का बोझ घट जाता है। कई बार देखा गया है कि कम चिकनाई वाला शाकाहारी भोजन करने वाले लोग मानसिक रूप से अधिक संतुलित, शारीरिक रूप से शक्तिवान और सही शरीर के वजन वाले होते हैं।

चिकनाई तले भुने खाने से परहेज करें  

अगर ईमानदारी से देखें तो फौरन समझ में आ जाएगा कि मोटे लोगों की मूल समस्या ही है तला हुआ खाना, ठोस खाना, कम से कम पानी वाला सूखा खाना। पानी में कोई शक्ति नहीं होती। जैसे 100 ग्राम बेसन के लड्डू में करीब 50 प्रतिशत कैलौरी ज्यादा होगी। पूरी, कचौड़ी और परांठा और सूखी चपाती का कोई मुकाबला ही नहीं। बिना गिनती बढ़ाए परांठे में कैलोरी करीब 3 गुनी अधिक होती है। अमरूद, सन्तरा, अन्नानास फल है और केला भोजन है 3-4 सिंगापुरी केले खाने से पेट भर जायगा, 3-4 सन्तरे से नहीं। आलू भोजन है। लौकी, तोरई, भिन्डी पालक, सिर्फ तरकारी, भोजन नहीं है। अगर आप चिकनाई (कोई भी घी या तेल ) कम से कम खाते हैं तो आपको मोटे होने का कोई रास्ता नही। सिंघाड़ा, कचौड़ी, पकौड़ी नमकीन सब तले हुए पदार्थ है और पनीर में वह सारा घी मौजूद है जो दूध में था जिससे पनीर बना। हम किसी मरीज को डाइट चार्ट नहीं देते वह तो मूर्ति की तरह अलमारी में सहेज कर रख दिया जाता है। उसे कोई देखता, पढता या उस पर अमल नहीं करता। वजन घटाना है तो चिकनाई और मिठाई से परहेज करना ही होगा।

छेना दूध घी बंद कर दें

एक अजीब स्थिति देखने में आती है कि हमारे डाक्टर ने घी, तेल बिलकुल मना किया है परंतु छेना खाने की सलाह दी है या छूट दी है तो भाई जान इस पर थोड़ा गौर तो करिए। दूध से ही देशी घी निकलता है। और दूध से ही छेना तैयार किया जाता है तो दूध का घी कहां गया। वह तो छेने में ही मौजूद है। अब आप ही देखिए आधा लीटर फुल क्रीम दूध से 25-30 ग्राम घी उनके पेट में है तो फिर कोलेस्ट्राल कैसे घटे। छेना सिर्फ उन रोगियों को बताया जाता है जो लम्बी बीमारी से बाहर आए हैं । और अभी भूख ही बहुत कम है तो छेना में पानी छोड़कर दूध के सभी पोषक तत्त्व मौजूद हैं जिससे उन्हें थोड़ी मात्रा में अधिक कैलोरी मिल जाती है। जिन्हें अपना वजन काबू में रखना हो या फिर जिन्हें कोरोनेरी आर्टरी डिजीज है उनके लिए छेना कतई मना है ।

वनस्पति तेलों का संयमित इस्तेमाल

नारियल के तेल में कोलेस्ट्राल बहुत ज्यादा है जो कोरोनेरी आर्टरी डिजीज को बढ़ाता है और वनस्पति तेल होने पर भी इसका उपयोग वर्जित है। तेल या घी कोई भी, किसी नाम से पर 100 ग्राम में कैलोरी पूरी 900अक्सर लोग कैलोरी और कोलेस्ट्राल को एक ही समझ लेते हैं। कहते हैं कि वनस्पति तेलों में कोलेस्ट्राल नहीं के बराबर होता है । इसीलिए वे परांठा, पकौड़ी, कचौड़ी, पोस्टमैन, सफोला या किसी दूसरे तेल में बनवाते हैं और मजे से खाते हैं और इसीलिए उनका वजन घटने का नाम ही नहीं लेता।

 संयमित आदत डालें

हमारे यहां डॉक्टर को चकमा देकर अपनी मनमानी करने का रिवाज पुराना है। किसी डायबिटीज के मरीज को देखने और जांच पड़ताल के बाद मरीज को समझाइए कि आपको चीनी, मिठाई का परहेज करना होगा और साथ में इन्सुलिन की सुई लेनी होगी। इसके बाद भी यह रोगी पूछेगा कि हार्लिक्स पी सकता हूं। उसी तरह तम्बाकू के इस्तेमाल के बारे में पूछने पर जवाब मिलेगा ‘नहीं’ हम तो गुल से दिन में 6-8 बार मुह धोते हैं (दांत साफ करते हैं) या हम तो सिगरेट पीते हैं। तम्बाकू का उपयोग नहीं करते। यह किसी तरह की सच्चाई है समझ है यह अब आप स्वयं देखें।

कम एवं संयमित भोजन करें

सारी दुनिया में जब भारी-भरकम व्यक्ति से पूछा जाता है कि आप अपने खाने के बारे में बताइए तो जो बताया जाता है उस पर हंसी बिना आए नहीं रहती। किस होशियारी से ये लोग पकौड़ी, कचौड़ी, मिठाई, नमकीन इत्यादि के बारे में चुप रहते हैं यह देखते ही बनता है। इन सभी का एक जाना पहचाना तरीका है। जब घर में रसोई तैयार है उस समय ये सब कहते हैं, भूख नहीं, अभी नहीं खाएंगे। फिर 3-4 बजते-बजते तले हुए नाश्ते की तैयारी शुरू।  किसी ने एक बहुत अच्छा कार्टून बनाया एक खाती-पीती महिला, डाक्टर से कह रही हैं कि मैं तो चिड़िया की तरह खाती हूं तो आर्टिस्ट ने गिद्ध की तस्वीर बना दी।

इंग्लैंड के एक डॉक्टर ने बड़ा अच्छा प्रयोग किया- उन्होंने इन भारी भरकम रोगियों से लिखकर देने को कहा जो कुछ भी सुबह उठने के बाद से रात होने तक खाते हैं जो उनकी रोज की खुराक है। उसके बाद इन सभी को अस्पताल में 15 दिन के लिए भर्ती कर लिया गया और अस्पताल के रसोई घर को उनकी लिखी सूची, फेहरिस्त भेज दी गई जिससे उन्हें बिल्कुल वही खाना मिल सके जो उनके लिखे अनुसार वे सब खा रहे थे। इन सभी को 1.5-2 किलो वजन आठ दिन में घट गया और वे सभी जल्दी से जल्दी अपने घर जाने को उतावले थे। क्योकि जवाब आप अवश्य ही समझ गए होंगे।

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