महिलाओं के लिए व्यक्तित्व निखारने के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स.

आपकी वेशभूषा, आपकी चाल-ढाल, आपका रहन-सहन और आपकी गतिविधियां आपके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को उजागर करती हैं । यदि इनमें किसी प्रकार की कोई कमी पाई जाती है तो आपका व्यक्तित्व निष्प्रभावी हो जाता है । ऐसी स्थिति में अपना व्यक्तित्व निखारने का प्रयास कीजिए । लीजिए, हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, व्यक्तित्व को निखारने के कुछ महत्वपूर्ण टिप्स ।

Personality-development

  • सिर के बाल व्यवस्थित रखें। उन्हें उलझा न रखें।
  • कमीज के बटन ठीक से लगाइए। बीच-बीच में लगाने से छूटे बटन व्यक्तित्व में लापरवाही के द्योतक होते हैं।
  • यदि आप चश्मा लगाती हैं तो उसके कांच एवं फ्रेम साफ रखें।
  • अच्छा और व्यवस्थित मेकअप कीजिए, ताकि आकर्षक दिखें।
  • जूते-चप्पलों पर पॉलिश कीजिए और उनके बंद सही तरीके से बांधिए।
  • यह जरूरी नहीं है कि महंगे कपड़े ही पहने जाएं। कपड़े साफ और समुचित प्रेस किए हुए हों।
  • गंदे दांत, आंख एवं कान के मैल व्यक्तित्व को बहुत प्रभावित करते हैं। इनसे सामने वाले के ऊपर आपका खराब प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस ओर सदैव सचेत रहना चाहिए।
  • घड़ी का कांच एवं चेन अथवा बेल्ट साफ रखिए।
  • नाखून व्यवस्थित रूप से काटिए।
  • शर्टिंग सही तरीके एवं व्यवस्थित रूप से कीजिए।
  • हमेशा आत्मविश्वास के साथ बात कीजिए। सहमिए मत, बीच में रुकिए मत, जितना पूछा जाए; उसका तथ्यात्मक उत्तर दीजिए। आदरसूचक शब्दों एवं औपचारिकता का पूर्ण ध्यान रखिए। किसी को गुमराह मत कीजिए।
  • नियमित रूप से समाचारपत्र पढ़िए। देश तथा विश्व की स्थिति जानिए। यह जानकारी होने से बात करने में आपको झिझक नहीं रहेगी।
  • स्कूल-कॉलेज की अंकसूचियों एवं प्रमाणपत्रों को व्यवस्थित रखें।
  • जीवन में समय का काफी महत्व है। इसलिए यदि किसी ने आपको मिलने का समय दिया हो तो ठीक समय पर पहुंचिए।
  • यदि कहीं आवेदनपत्र आदि देना हो तो साफ लिखावट में लिखें।
  • अपना बायोडाटा देते समय क्रम निम्नानुसार रखिए-नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, शैक्षणिक योग्यता (पूर्ण विवरण सहित), घर का पता, हस्ताक्षर। उसके नीचे पुनः ब्रेकट में नाम, स्थान एवं दिनांक लिखें।
  • घर में माता-पिता तथा भाई-बहनों के साथ संतुलित एवं अच्छा व्यवहार कीजिए। उन्हें आवश्यकतानुसार आदरसूचक शब्दों से सम्बोधित कीजिए। बातचीत करने की जैसी आदत बन जाती है, वह आगे भी चलती रहती है। इसलिए शुरू से ही वाणी-माधुर्य तथा स्पष्टवादिता का ध्यान दीजिए।
  • ज्यादा समय तक अनावश्यक रूप से घर के बाहर मत रहिए। रात को समय से घर आइए, क्योंकि ये बातें संगत बिगाड़ने में सहायक होती हैं।
  • आवश्यकतानुसार घर की तरफ भी ध्यान दीजिए। घर में काम भी कीजिए। यदि नौकरी आदि के लिए घर से बाहर रहना पड़ा तो दिक्कत नहीं आएगी।
  • चाय-कॉफी पीते समय मुंह से आवाज मत निकालिए। इसी तरह खाना खाते समय कौर मुंह में डालने के बाद मुंह बंद करके अन्दर ही धीरे-धीरे चबाइए।
  • किसी से कोई सहायता लेने पर उसे धन्यवाद, थैंक्स, शुक्रिया आदि अवश्य बोलिए।
  • यदि आप यह समझती हैं कि आप सामने वाले की आवश्यकतानुसार कोई सहायता कर सकती हैं, तो सदैव तत्पर रहें।
  • सफलता की कुंजी है-आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय, लगन, धैर्य और मेहनत। इसे हमेशा अपने जीवन में अपनाए रहिए।
  • जीवन संघर्षशील है, अतः भाग्य के सहारे ही न बैठे। अनवरत प्रयास तथा कर्म करते रहना चाहिए।
  • अपनी बुराइयों तथा गलतियों को दिल से स्वीकार करें।
  • स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश करें।
  • ‘नहीं’ या ‘असंभव’ आदि शब्दों को अपने जीवन के शब्दकोश से सदा के लिए निकाल दीजिए।
  • वस्त्रों का चयन करते समय विशेष रूप से सावधानी बरतें। अपनी उम्र, व्यक्तित्व, अवसर एवं मौसम का ध्यान अवश्य रखें।
  • प्राकृतिक सुंदरता तथा आपका सौम्य व्यवहार ही आपकी सुंदरता है।
  • यदि कोई व्यक्ति अपनी बातों से आपका विश्वास हिलाना चाहे तो अपना आत्मविश्वास अधिक मजबूत करें।
  • हमेशा अपनी ही बात न करें। दूसरे की भी बातें सुनें। कभी किसी की बात बीच में न काटें। जब भी बोलें, धीरे-धीरे बोलें।
  • किसी से मिलते वक्त होंठों पर हमेशा एक मुस्कान रखें।
  • अपनी मर्यादा तथा संस्कारों को अनदेखा न करें।
  • फुरसत के क्षणों में दिल को खुशी देने वाली बीती बातों एवं यादों में डूबकर आनंदित हों।
  • सोच-समझकर बात करें। कड़वी बात मुंह से न निकालें ।
  • किसी सभा या समूह में सलीके से बैठे। अपनी सभ्यता न भूलें।
  • दूसरों से वैसा ही व्यवहार करें, जैसा आप उनसे अपने प्रति चाहती हों।
  • उम्र चाहे कोई भी हो, खुद को आकर्षक बनाए रखें।
  • आपके उठने, बैठने, चलने आदि में आपका सलीका दिखना चाहिए।
  • जीवन में भय को कभी भी खुद पर हावी न होने दें।
  • अपना ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ बनाए रखें।
  • किताबों को अपना दोस्त बनाएं। ऐसा करने से आपको कभी अकेलेपन का एहसास नहीं होगा।
  • खुद को हमेशा चुस्त एवं उत्साहित महसूस करें।
  • अपनी भावनाओं को चेहरे पर प्रकट न होने दें और दूसरों की भावनाओं को गहराई से समझें।
  • दूसरों की भावनाओं को समझकर उनकी कद्र करना सीखिए।
  • अपने अंदर अच्छे गुणों को विकसित कीजिए तथा अपनी इच्छा शक्ति’ को मजबूत बनाइए। अनुशासनप्रिय बनिए एवं अनुशासन को जीवन का ही एक अंग बनाइए।
  • अपने गुस्से पर नियंत्रण रखिए।
  • स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता भी जरूरी है, यह ध्यान रखिए।
  • किसी की बुराई न करें। जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करने का प्रयास करें। अच्छाइयों की प्रशंसा कीजिए।
  • शिष्टाचार के बिना आपका ज्ञान तथा शिक्षा अधूरी है, अत: व्यक्तित्व के इस आधार स्तंभ को दृढ़ बनाएं। हकीकत में जीना सीखें। स्वप्नों की दुनिया में न जिएं।
  • जीवन की सच्चाई सहर्ष स्वीकार करें। किसी को छोटा न समझें ।
  • अपना स्वाभिमान बनाए रखें। लेकिन व्यवहार कुशल रहें।
  • अपने लक्ष्य तथा उद्देश्य ऊंचे रखें। इन्हें पाने की भी कोशिश करें।
  • कभी-कभी स्वयं का अवलोकन भी करें। अपनी कमियां दूर करें।
  • अनायास ही आ गए कार्यभार को पूरा करने की क्षमता उत्पन्न करें।
  • हाजिर जवाब बनें। लेकिन किसी को गलत बात न कहें।
  • दूसरों से अधिकारपूर्वक कार्य कराने की क्षमता रखें।
  • अपनी स्मरण शक्ति को तेज बनाएं। इसके लिए किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन न करें। किसी भी क्षेत्र में आगे होने के लिए अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाएं। समसामयिक घटनाओं की पर्याप्त जानकारी रखें।

आपकी चाल से भी पता चलता है आपका व्यक्तित्व:

चलने का ढंग भी व्यक्तित्व का एक हिस्सा है। सभी लोग अपने-अपने ढंग से चलते हैं। कोई मरियल-सी चाल चलता है तो कोई काफी फुर्ती एवं चुस्ती से चलता है। वस्तुत: सही ढंग से चलना ही स्मार्टनेस है। चाल ऐसी चलें कि बरबस ही सबकी निगाह आप पर टिकी रह जाए। इसके लिए आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए

  • चलते वक्त पैरों में पहने जूते-चप्पल की आवाज न हो। धूल भी न उड़े।
  • पैर पटककर, सिर हिलाकर या कमर मटकाकर चलना फूहड़ता की निशानी मानी जाती है।
  • पैर या चप्पल को घसीटकर भी न चलें।
  • अपने हाथों की मुट्ठी बांधकर आगे-पीछे हिलाते हुए परेड करने की तरह न चलें। यह भी अच्छा नहीं लगता।
  • सीधे अकड़कर, अस्वाभाविक रूप से तनकर अथवा सारस की तरह भी नहीं चलना चाहिए।
  • हाथ में लिए बैग को आगे-पीछे या गोल-गोल नचाते हुए तेज-तेज कदमों से भी न चलें।
  • रास्ते में अपनी सहेली के साथ हाथ को नचाते हुए, जोर-जोर से हंसते हुए अथवा तेज बातें करते हुए चलना भी अच्छा नहीं होता।

व्यक्तित्व निखारने के लिए चलने का अंदाज़ कैसा होना चाहिए

  • आपको हमेशा सधे हुए कदमों तथा स्वाभाविक गति से चलना चाहिए।
  • कैट वाक की तरह चलना सबसे अच्छी चाल मानी जाती है।
  • यदि आपकी चाल खराब हो तो घर पर आईने के सामने चलकर सही चाल चलने का अभ्यास करें।
  • सही गति से चलने के लिए हमेशा सही नाप के जूते, चप्पल या सैंडल पहनें। गलत नाप के जूते-चप्पल आदि आपकी चाल को बिगाड़ देते हैं।
  • ड्रेस की फिटिंग सही न होने पर भी चाल बिगड़ जाती है। इसलिए हमेशा सही फिटिंग वाली ड्रेस पहनें। मन को सदैव प्रसन्नचित्त रखकर चलें। यदि आपकी चाल सही होगी तो तनाव होने पर बिगड़ जाएगी।
  • अपनी चाल को संतुलित रखते हुए धीरे-धीरे चलना ठीक रहता है।
  • मन में भय या घबराहट होने पर भी चाल खराब होने पर आने के सामने चाल खराब हो जाती है। अतः इन्हें दूर करके आत्मविश्वास के साथ चलें।

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