Laryngoscopy मेडिकल जांच कराने के कारण एवं प्रक्रिया.

Laryngoscopy गले के अन्दर का एक परीक्षण है जिसमे व्यक्ति के voice बॉक्स यानिकी स्वरयंत्र की जांच की जाती है | व्यक्ति के voice बॉक्स में मुखर तार होते हैं जो व्यक्ति को बोलने में सहायक सिद्ध होते हैं |

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Laryngoscopy Test के लिए तैयारी :

इस परीक्षण के लिए तैयारी लैरींगोस्कोपी के प्रकार पर निर्भर करेगी । अगर यह जांच अर्थात मेडिकल टेस्ट सामान्य एनेस्थेसिया के तहत की जाएगी, तो आपको टेस्ट से पहले कुछ घंटों तक खाने या पीने से मना किया जा सकता है |

लैरींगोस्कोपी टेस्ट करने के कारण:

Laryngoscopy नामक यह मेडिकल टेस्ट चिकित्सक को voice बॉक्स एवं गले सम्बन्धी अनेक रोगों को जानने में एवं उनका इलाज करने में मदद करेगा | लेकिन फिर भी चिकित्सक इन निम्नलिखित कारणों में से किसी एक कारण के चलते लैरींगोस्कोपी टेस्ट के लिए कह सकते हैं |

  • काफी समय से गला ख़राब जो इलाज के बावजूद ठीक न हो रहा हो |
  • पुरानी खांसी या खांसी में रक्त आना |
  • निगलने में परेशानी होना |
  • कान दर्द जो ठीक ही नहीं हो रहा हो |
  • गले में कुछ फंसा हुआ है ऐसा लगने पर |
  • सांस की समस्या |
  • गले में दर्द जो ठीक नहीं हो रहा हो |
  • तीन हफ्ते से अधिक आवाज की समस्याएं जैसे आवाज में गड़बड़ी, कमजोर आवाज, लसलसी आवाज या फिर कोशिश करने पर भी आवाज न निकलना इत्यादि सामिलित हैं |

Laryngoscopy Test कैसे किया जाता है |

लैरींगोस्कोपी नामक इस मेडिकल टेस्ट को अलग अलग तरीकों से किया जाता है |

  • अप्रत्यक्ष लैरींगोस्कोपी यानिकी Indirect laryngoscopy को करते समय चिकित्सक द्वारा व्यक्ति के गले के पीछे एक छोटे दर्पण का उपयोग किया जाता है | गले के अन्दर देखने के लिए चिकित्सक आईने पर प्रकाश डालता है। यह एक बेहद सरल प्रक्रिया है सामान्यतया इस प्रक्रिया को चिकित्सक के कार्यालय में तब अंजाम दिया जाता है जब व्यक्ति जाग रहा हो | इस क्रिया को करने से पहले चिकित्सक द्वारा व्यक्ति के गले के पीछे के स्थल को सुन्न करने के लिए एक दवा इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • फाइबरओप्टिक लैरींगोस्कोपी को nasolaryngoscopy भी कहा जाता है इस परीक्षण को करते वक्त चिकित्सक द्वारा एक छोटे लचीले दूरबीन का उपयोग किया जाता है | इस दूरबीन का दायरा व्यक्ति की नाक के माध्यम से व्यक्ति के गले में जाता है । यह आवाज बॉक्स की जांच करने का सबसे सामान्य तरीका है इस प्रक्रिया को करते वक्त भी प्रभावित व्यक्ति जाग रहा होता है और नलसाजी दवा उसके नाक में छिड़काई जाती है इस प्रक्रिया में आमतौर पर 1 मिनट से कम समय लगता है।
  • स्ट्रोब रोशनी (Strobe Light ) का प्रयोग करते हुए भी लैरींगोस्कोपी किया जा सकता है। स्ट्रोब लाइट का इस्तेमाल करने से डॉक्टर व्यक्ति के वॉयस बॉक्स में हो रही समस्याओं के बारे में अधिक जानकारी दे सकते हैं |
  • डायरेक्ट लैरींगोस्कोपी (Direct Laryngoscopy) में चिकित्सक द्वारा लैरींगोस्कोप नामक एक ट्यूब का उपयोग किया जाता है | यह लैरींगोस्कोप नामक उपकरण व्यक्ति के गले के पीछे रखा जाता है जो की ट्यूब आकृति में लचीला या कठोर हो सकता है | यह प्रक्रिया डॉक्टर को गले में गहराई से देखने और बायोप्सी के लिए Tissues  का नमूना लेने में मदद करती है | डायरेक्ट लैरींगोस्कोपी को जनरल अनेस्थेसिया यानिकी जब मनुष्य अचेत या दर्द से मुक्त वाली स्थिति में होता है तब अस्पताल या मेडिकल सेंटर में किया जाता है |यह भी पढ़ें:

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