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मैग्नीशियम क्या है इसके कार्य, स्रोत, फायदे एवं कमी के लक्षण.

मानव ऊतकों में मैग्नीशियम की मात्रा कम होती है । वयस्क मानव शरीर में इस खनिज का लगभग 25 ग्राम होता है, जिसका अधिकांश भाग हड्डियों में फास्फेट तथा कार्बोनेट के साथ संयोजन में उपस्थित होता है । शरीर में उपस्थित कुल Magnesium का पांचवां भाग कोशिकाओं के भीतर कोमल ऊतकों में स्थित होता है, जहां यह मुख्यरूप से प्रोटीन से जुड़ा होता है । ऐसा माना जाता है कि शरीर में कहीं भी खनिज की कमी होने पर हड्डियां इसकी आपूर्ति करती हैं ।

मैग्नीशियम  खनिज क्या है (What is Magnesium in Hindi):

मैग्नीशियम एक हलका, सफेद-चांदी रंग का, ढलने-योग्य तथा लचीला (ductile) धात्विक तत्व होता है । यह तेज़ आग के साथ जलता है तथा इसका प्रयोग हलके वज़न की मिश्रित धातुओं को बनाने में होता है । बायोकेमिस्ट Magnesium को ठंडा, क्षारीय, ताज़गी प्रदान करने वाला, निद्रा लाने वाला खनिज कहते हैं । यह अधिक गरमी के महीनों में व्यक्ति में शीतलता को बनाये रखता है । मूत्रवर्धक दवाईयों तथा शराब के कारण Magnesium अप्रभावी हो सकता है । इस खनिज का सक्रिय अवशोषण छोटी आंत के इलियम में होता है । मैग्नीशियम आंत से कैल्शियम अवशोषण में प्रतियोगिता करता है तथा इसकी मात्रा को कम कर सकता है । इसी प्रकार का प्रभाव Magnesium पर पैराथोरमोन का होता है जो एक पैराथायरायड हारमोन होता है तथा सीरम में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करता है । कोमल ऊतकों की तुलना में हड्डियों में मैग्नीशियम की दोगुनी मात्रा भंडारित होती है । लेकिन हड्डियों का मैग्नीशियम कोमल ऊतकों में उपस्थित मैग्नीशियम के साथ तुरंत ही आदान-प्रदान नहीं करता है । चूंकि भोजन में उपस्थित मैग्नीशियम की बड़ी मात्रा का अवशोषण नहीं हो पाता अतः यह मल में उत्सर्जित हो जाता है । सेवन किए गए Magnesium की एक-तिहाई मात्रा का उत्सर्जन मूत्र में होता है । शरीर में इस खनिज की की न्यूनता होने पर मूत्र में होने वाला उत्सर्जन कम हो जाता है । रक्त में मैग्नीशियम की मात्रा प्रति 100 मि. ली. में लगभग 2 से 3 मि.ग्रा. होती है ।

मैग्नीशियम के शरीर में कार्य (Functions of Magnesium in Hindi):

मैग्नीशियम नाड़ियों को शांत रखता है । यह सभी प्रकार की पेशियों की गतिविधि के लिये आवश्यक है । यह कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन के पाचन में सम्मिलित अधिकांश इंजाइम तंत्रों को सक्रियता प्रदान करता है । यह अल्कलाइन (Alkaline) फास्फेटेस को सक्रिय बनाने के लिये आवश्यक होता है जो कैल्शियम तथा फास्फोरस के पाचन में योगदान देने वाला इंज़ाइम है । Magnesium विटामिन बी तथा ई के उपयोग में भी सहायता करता है । यह अन्य खनिजों जैसे कैल्शियम, सोडियम तथा पोटाशियम के साथ कार्य करता है ताकि शरीर में द्रव तथा इलेक्ट्रोलाइट के संतुलन को कायम रख सके । मैग्नीशियम के उचित स्तर को बनाए रखना सामान्य तंत्रिका-पेशीय संकुचनों के लिये आवश्यक है । यह खनिज लेसीथिन के उत्पादन में भी सम्मिलित होता है । यह कोलेस्ट्रोल तथा इससे होने वाले आर्थेरोस्क्ले रोसिस (artherosclerosis) की रोकथाम करता है । Magnesium हृदय तथा रक्तवाहिनियों को स्वस्थ रखता है जिससे हृदय आघातों की रोकथाम होती है । यह तनाव से लड़ने में सहायता करता है । यह गुरदों तथा पित्ताशय में कैल्शियम के जमा होने को रोकता है और अपाचन से भी आराम दिलाता है ।

मैग्नीशियम के प्रमुख स्रोत (Sources of Magnesium in Hindi):

मैग्नीशियम हरी सब्ज़ियों में क्लोरोफिल का भाग होता है । यह खनिज सूखे मेवे, सोयाबीन, अल्फाल्फा, सेब, अंजीर, नींबू, आडू, बादाम, अनाज, भूरे चावल, सूरजमुखी के बीज तथा तिल इत्यादि में प्रमुख रूप से पाया जाता है | इस खनिज के अन्य अच्छे स्रोत में अनाज तथा सब्ज़ियां मिलकर दैनिक Magnesium की आवश्यकता का दो-तिहाई भाग से अधिक उपलब्ध कराते हैं । श्रेणी के आधार पर इस खनिज केर मुख्य स्रोत निम्नवत हैं |

Magnesium-sources

अनाज जिनमे मैग्नीशियम पाया जाता है

  • ज्वार
  • हाथ से कूटे हुए चावल
  • सूखी हुई मक्का
  • बाजरा
  • रागी
  • गेहूं का शुद्ध आटा
  • पोहा
  • उबले और पिसे हुए चावल
  • कंगनी

दालें तथा फलियाँ जिनमे मैग्नीशियम पाया जाता है

  • काली सोयाबीन
  • मोठ
  • राजमां
  • सफ़ेद सोयाबीन
  • पूर्ण काला चना
  • उड़द
  • भुनी हुई मटर
  • दली हुई अरहर
  • मसूर
  • दला हुआ काला चना

सब्जियां जिनमें मैग्नीशियम पाया जाता है

  • पान पत्ते
  • मूली
  • सूखी कमलककड़ी
  • चौलाई
  • प्याज
  • पालक
  • अजवायन के पत्ते
  • ग्वार फली
  • सैजन के पत्ते
  • सफ़ेद करेला
  • मेथी के पत्ते
  • सलाद के पत्ते
  • आलू

सूखे मेवे जिनमे मैग्नीशियम पाया जाता है

  • बादाम
  • काजू
  • अखरोट

फल जिनमे मैग्नीशियम पाया जाता है

  • पका हुआ आम
  • बेर
  • शरीफा
  • अंगूर
  • अनार
  • पका हुआ केला
  • जामुन
  • अन्नानास
  • खरबूजा
  • लाल चेरी
  • अमरुद
  • नाशपाती

मैग्नीशियम की कमी के लक्षण (Deficiency of Magnesium in Hindi):

मानव शरीर में मैग्नीशियम की न्यूनता मुश्किल से ही होती है क्योंकि यह खाने वाले भोज्य पदार्थों में पर्याप्तरूप से मिलता है । लेकिन इसकी न्यूनता कुछ पाचन अवस्थाओं में हो सकती है जैसे दीर्घकालिक डायरिया के कारण होने वाली इसकी अत्यधिक हानि । Magnesium की न्यूनता को उन रोगियों में देखा गया है जिनमें ऐसी नैदानिक अवस्थाएं उपस्थित थीं जिसमें इसका सेवन कम था तथा इसका उत्सर्जन अधिक । इन अवस्थाओं में सम्मिलित हैं दीर्घकालिक मद्यपान, मधुमेह, अनावशोषण (malabsorption), गुरदे सम्बन्धी बीमारी, पैराथायरायड ग्रन्थि का रोग तथा आपरेशन के बाद का तनाव इत्यादि । magnesium की लंबे समय तक कमी रहने के कारण शरीर से कैल्शियम तथा पोटाशियम का ह्रास हो जाता है जिससे इन खनिजों की भी कमी हो जाती है । इस कमी के कारण गुरदों की हानि या गुरदों में पथरी हो सकती है साथ ही इसके कारण पेशीय संकुचन, एथेरोस्क्लेरोसिस, दिल का दौरा, मिर्गी का दौरा, चिड़चिड़ापन, विशिष्ट तनाव तथा घबराहट, अस्वस्थ प्रोटीन पाचन तथा समयपूर्व झुर्रियां हो सकते हैं । magnesium की कमी से किसी भी व्यक्ति को उच्च रक्तचाप हो सकता है ।

मैग्नीशियम के स्वास्थ्य सम्बन्धी फायदे :

Magnesium नामक यह खनिज निम्न बीमारियों में स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है |

मद्यपान में अधिक आवश्यकता  :

दीर्घकालिक शराबियों में अक्सर कम प्लाज्मा मैग्नीशियम सघनता तथा मूत्र की अधिकता देखी गयी है । इसलिये उन्हें मैग्नीशियम की अतिरिक्त मात्रा के सेवन की आवश्यकता होती है, विशेषकर डेलीरियम ट्रेमेंस (delirium tremens) के तीव्र आघात में ।

 गुरदे की पथरी :

magnesium मूत्र में कैल्शियम की घुलनशीलता को बढ़ाकर गुरदे की पथरी को रोकता है । इसे विटामिन बी6 या पाइरोडोक्सिन के साथ गुरदों की पथरी की रोकथाम तथा इलाज में लाभदायक पाया गया है । जब भी आवश्यकता हो, Magnesium को प्रतिदिन 700 मि.ग्रा. की नैदानिक खुराक में लिया जा सकता है । मैग्नीशियम क्लोराइड सप्लीमेंटरी मैग्नीशियम का सर्वश्रेष्ठ रूप होता है, हालांकि इसका अन्य रूपों में भी सेवन किया जा सकता है । मुख द्वारा लेने वाले magnesium लवण मूत्र तथा मल बनाने वाले होते हैं ।

हृदयाघात (Heart Attacks) :

जिन लोगों की अचानक दिल के दौरे से मृत्यु होती है, उनमें Magnesium की कमी पायी गयी है । मैग्नीशियम की न्यूनता के कारण हृदय की धमनियों में संकुचन या ऐंठन हो सकता है । जिसका परिणाम हृदय को मिलने वाले रक्त तथा आक्सीजन के प्रवाह में कमी होती है । मैग्नीशियम के उपचार से हृदय रोग के विरुद्ध कुछ सुरक्षा मिलती है ।

सावधानियां :

यदि कैल्शियम तथा फास्फोरस का सेवन अधिक है तो magnesium की बड़ी मात्रा को लंबे समय तक लेना विषाक्तता का कारण हो सकता है । मैग्नीशियम के सप्लीमेंट को भोजन के बाद नहीं लेना चाहिए क्योंकि यह खनिज पेट की एसिडिटी को निष्क्रिय बना देता है ।

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