माइग्रेन के लक्षण कारण प्रकार सावधानियां खानपान घरेलू नुस्खों से ईलाज

माइग्रेन की बात करें तो यह सिरदर्द का ही एक रूप होता है लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं की यह सामान्य सिरदर्द की तुलना में कहीं अधिक तकलीफ दायक होता है | इसलिए इससे बचने के लिए एवं इसके ईलाज के लिए इसकी पूरी जानकारी का होना आवश्यक हो जाता है | आज इस लेख के माध्यम से हम न केवल इसके बचाव एवं ईलाज की बात करेंगे बल्कि यह क्या होता है? क्यों होता है? इसके लक्षण एवं प्रकार क्या हैं ? इसमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? इसमें क्या खाना चाहिए और इससे बचने के लिए कौन कौन से घरेलू नुश्खों को अपनाया जा सकता है के बारे में वार्तालाप करेंगे | तो आइये सबसे पहले जानते हैं की माइग्रेन होता क्या है |

माइग्रेन क्या है

माइग्रेन क्या होता है (What is migraine in Hindi):

वैसे साधारण शब्दों में हम कहें तो यह भी एक प्रकार का सिरदर्द ही है, लेकिन माइग्रेन के कारण होने वाले सिर दर्द की सबसे बड़ी विशेषता सुबह बिस्तर छोड़ते समय दर्द का शुरू होना  है । इस बीमारी में मरीज के सिर के आधे हिस्से में भयंकर दर्द होता है । क्योंकि इस रोग में सिर के आधे हिस्से में ही दर्द होता है इसलिए इस रोग आधा सीसी भी कहा जाता है । इससे होने वाला दर्द काफी तकलीफदेह होता है | इस रोग में मरीज को पहले आँख व कनपटी के पास  से दर्द शुरू होता है उसके बाद यह धीरे धीरे सिर के एक तरफ से होता हुआ पूरे सिर में फैल जाता है । वर्ष 2016 के एक आंकड़े के मुताबिक दुनिया में 15 प्रतिशत लोग माइग्रेन से पीड़ित पाए गए थे ।

माइग्रेन के लक्षण (Symptoms of migraine in Hindi):

  • सुबह सोकर उठते समय आँखों के ऊपर दाई या बायीं ओर से दर्द शुरू होने लगता है |
  • यह दर्द इतना भयंकर हो सकता है की रोगी अपने दैनिक कार्य कर पाने में भी असमर्थ हो जाते हैं |
  • सिरदर्द के कारण रोगी का किसी भी कार्य को करने में मन नहीं लगता है |
  • चिडचिडापन आ जाता है इसलिए उन्हें किसी के साथ बात करना भी पसंद नहीं होता |
  • रोगी को रौशनी में रहना भी अच्छा नहीं लगता है इसलिए उसे अँधेरे में एकांत में रहना पसंद होता है |
  • इस बीमारी का दर्द कुछ घंटों से लेकर हफ़्तों तक हो सकता है |

माइग्रेन के प्रकार (Types of Migraine):

यह रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का हो सकता है जिनका वर्णन निम्नवत है |

 सामान्य माइग्रेन: इस प्रकार का यह दर्द अचानक उठता है अर्थात दर्द उठने से पूर्व किसी प्रकार की कोई चहलकदमी इसमें नहीं दिखाई देती है |

विशिष्ट माइग्रेन: इसमें दर्द से पूर्व कुछ चेतावनी सूचक लक्षण जैसे चक्कर आना, आंखों के सामने चमकीली रोशनी नजर आना, भूख की कमी होना इत्यादि भी प्रकट हो सकते हैं |

क्या आप जानते हैं क्यों होता है माइग्रेन?

जहाँ तक माइग्रेन का दर्द क्यों होता है? का सवाल है इस सवल का कोई सटीक जवाब तो नहीं दिया जा सकता है | अर्थात यह रोग क्यों होता है  इस बारे में निश्चित तौर पर तो कुछ भी कहना मुश्किल है | लेकिन मनुष्य की खान-पान की गड़बड़ी और कुछ शारीरिक कमियां इस रोग को बढ़ाने का काम करते हैं | तले हुए पदार्थो का अधिक सेवन एवं भारी गरिष्ठ भोजन करने से दर्द के होने की अधिक आशंका होती है |

  • अधिक तनाव एवं थकान भी इसका कारण हो सकते हैं |
  • उच्च रक्तचाप |
  • खाद्य पदार्थों की गंध भी इसका कारण हो सकती है |
  • चॉकलेट, कॉफी या खट्टे फलों से भी कुछ लोगों को इसके दौरे पड़ते देखे गए हैं |
  • प्याज, टमाटर, लहसुन इत्यादि के कारण भी इसके दौरे पड़ते देखे गए हैं ।

माइग्रेन के दौरान क्या करें क्या नहीं?

इस रोग के दौरे के दौरान निम्न सावधानियों को अपनाना बेहद आवश्यक है |

  • दौरा पड़ने के दौरान रोगी को तकिये का उपयोग न कराएँ बल्कि बिना तकिये के ही उसे बिस्तर पर सीधे लिटा दें |
  • चूँकि इस रोग से पीड़ित रोगी को रोशनी अच्छी नहीं लगती है इसलिए उसे अँधेरे कमरे में सुलाया जाना उचित रहता है |
  • रोगी को बिना धूप का चश्मा लगाये चिलचिलाती धूप में बाहर नहीं निकलने देना चाहिए |
  • रोगी को सुबह का ब्रेकफास्ट अवश्य कराये और खाली पेट न रखें |
  • प्रत्येक छह महीने में ब्लड प्रेशर एवं आँखों की जांच करानी चाहिए और जरुरत पड़ने पर उचित उपचार एवं चश्मा बना लिया जाना चाहिए |
  • मूत्रवर्धक खाद्य पदार्थ जैसे चॉकलेट, आइसक्रीम इत्यादि से दूर रहें |
  • शराब, मांस, चाय, कॉफी, इत्यादि मादक वस्तुओं का सेवन रोगी को बिल्कुल बंद कर देना चाहिए ।
  • बसा युक्त पदार्थ जैसे घी-तेल का इस्तेमाल भी जितना हो सके कम से कम करना चाहिए ।
  • दर्द के दौरान सिर ठंडे पानी की पट्टी रखने से लाभ मिलता है ।
  • इस रोग की कोई भी दवाई अपने मन से नहीं लेनी चाहिए बल्कि रोगी को किसी न्यूरोलॉजिस्ट यानी स्नायु रोग विशेषज्ञ से संपर्क करने के बाद ही दवाइयां खानी चाहिए | क्योंकि अपने मन से खायी जाने वाली दवाओं के दुष्प्रभाव हो सकते हैं |

माइग्रेन का दर्द कम करने के लिए क्या खाएं:

  • हमेशा यह जरुरी नहीं होता है की माइग्रेन का दर्द कम करने के लिए दवाई का ही सेवन किया जाय | अर्थात यहाँ पर हम यह कहना चाहते हैं की कुछ खाद्य पदार्थ भी ऐसे हैं जिनका सेवन करके इस दर्द को आसानी से दूर किया जा सकता है ।
  • सुबह उठकर खाली पेट मुनक्का खाकर वापस कुछ देर कम्बल से अपने आप को ढक के वापस लेट जाएँ तीन दिन तक इस उपाय को करने से इस रोग के दर्द में फायदा होता है |
  • ब्रॉकली को भाप देकर यानिकी स्टीम करके या फिर उबाल करके खाना चाहिए क्योंकि इसमें मैग्नीशियम पाया जाता है जिससे इस दर्द में लाभ होता है |
  • माइग्रेन के रोगी को उचित मात्रा में पानी कम से कम 12-14 गिलास अवश्य पीना चाहिए |
  • ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन तत्त्व माइग्रेन का दर्द पैदा करने वाली सनसनाहट को कम करते हैं और ये तीनों तत्व मछली में पाए जाते हैं इसलिए मछली का सेवन करना चाहिए ।
  • मैग्नीशियम नामक रसायन माइग्रेन के दर्द को गायब करने का सामर्थ्य रखता है और यह हरी पत्तेदार सब्जियों, साबुत अनाज, समुंद्री जीव और गेहूं में अधिक पाया जाता है | इसलिए इनका सेवन भी अवश्य करना चाहिए |
  • शायद आपने भी सुना होगा की सिर दर्द में कॉफी पीने से आराम होता है यह बिलकुल सत्य है इसलिए दर्द के तौरण थोड़ी बहुत कॉफ़ी चल सकती है |
  • बाजरा एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जिसमें फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल पाये जाते हैं । इसलिए दर्द के दौरान इसका सेवन भी किया जा सकता है |
  • अलसी का बीज स्सोजन को कम करने वाला होता है क्योंकि इसमें उचित मात्रा में ओमेगा 3 और फाइबर पाया जाता है । जो माइग्रेन के लिए ठीक माना गया है |

बचाव के लिए घरेलू नुश्खे:

  • सिर में माइग्रेन का दर्द होने पर सिर की हल्की मालिश की जा सकती है और इसके अलावा मक्खन में मिश्री मिला कर खाने से भी लाभ प्राप्त होता है |
  • दर्द वाले हिस्से को गर्म या ठंडा सेक दे सकते हैं इसके लिए तौलिये को ग्राम पानी में डुबोकर उपयोग में लाया जा सकता है तो ठन्डे सेक के लिए बर्फ के टुकड़ों को |
  • माइग्रेन से पीड़ित रोगी को बैलेंस्ड डाइट लेनी चाहिए और संतुलित दिनचर्या के साथ साथ नींद भी पूरी लेनी जरुरी है |
  • इस रोग में आराम पाने के लिए ध्यान, योगासन, एक्यूपंक्चर या अरोमा थेरेपी जैसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति भी अपनाई जा सकती है |
  • यह घरेलू नुश्खा थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन यह प्रभावशाली है इसमें रोगी को मुनक्के के बीज को निकालकर इसमें कपूर भरना होता है | उसके बाद इस भरे हुए मुनक्के को बर्तन में डालकर अपने सिरहाने पर रखना होता है और सुबह सूर्योदय से एक घंटे पहले उठना होता है |
  • गाय के शुद्द घी एवं नीम के पत्तों के रस को सूंघने से भी दर्द में लाभ प्राप्त होता है ।
  • नींबू के छिलके को पीस लें फिर इसे दर्द वाली जगह पर लगा लें आराम होगा |
  • रोगी के सिर, गर्दन और कंधों की मालिश करें यह नुश्खा भी दर्द से आराम दिलाने में सहायक होता है | मालिश के लिए हल्की खुशबू वाले अरोमा तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं |
  • मक्खन में मिश्री मिलाकर सेवन करने से और कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश करने से माइग्रेन के दर्द में आराम होता है |

उपर्युक्त घरेलू नुश्खों के अलावा माइग्रेन से पीड़ित रोगी अब छोटे से ऑपरेशन के जरिये भी इस बीमारी से निजात पाने में कामयाब हो पाएंगे । क्योंकि अमेरिकी डॉक्टरों के मुताबिक सिर और गर्दन की कुछ मांसपेशियां हटाकर माइग्रेन नामक इस रोग से होने वाला दर्द हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है ।

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