गर्भपात क्या है इसके कारण स्टेज एवं अन्य सभी जानकारी.

गर्भपात को अंग्रेजी में Miscarriage कहा जाता है यह कभी कभी अकारण अर्थात बिना कारण के भी हो सकता है इसलिए इसे समझने में थोड़ी कठिनाई होती है | माँ बनने का इंतजार सिर्फ गर्भवती महिला को नहीं होता है बल्कि आने वाले बच्चे के साथ सारे परिवार की खुशियाँ जुड़ी होती हैं और गर्भपात इन खुशियों पर पानी फेरने का काम करता है | इसके अलावा घर के सदस्यों के अंतर्मन में अशांति उत्पन्न हो सकती है जिसको झेलने में पीड़ित महिला को खासी दिक्कत हो सकती है | इसलिए आज हम इस लेख के माध्यम से गर्भपात यानिकी Miscarriage से जुड़ी हुई पूरी जानकारी जैसे यह क्या है, इसके कारण, इसकी अवस्थाएं इत्यादि के बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे |

गर्भपात

पूरा आर्टिकल (लेख) एक नज़र में.

गर्भपात क्या है (What is miscarriage in Hindi) :

गर्भपात का शाब्दिक अर्थ है गर्भ का नष्ट हो जाना या समाप्त हो जाना लेकिन जब यह प्रेगनेंसी के 12 हफ़्तों के अंतर्गत होता है तो इसे प्रारम्भिक गर्भपात कहा जाता है जबकि इसके बाद गर्भ के नष्ट हो जाने की क्रिया को देर से गर्भपात के नाम से जाना जाता है |  शोध कार्यों से आश्चर्यजनक परिणाम ये आये हैं कि हर चार गर्भावस्थाओं में से तीन का अंत शिशुजन्म के रूप में नहीं हो पाता है । इन मामलों में गर्भपात हो जाता है । इस प्रक्रिया में अधिकतर गर्भावस्था का स्वयं ही 20 सप्ताह से पूर्व अंत हो जाता है, 99 प्रतिशत केस में भूण की मृत्यु 13 सप्ताह से पूर्व ही हो जाती है । कई बार भ्रूण  की मृत्यु तो हो जाती है, परन्तु गर्भपात नहीं हो पाता है । इसे missed abortion कहते हैं । abortion गर्भपात के लिये प्रयुक्त होने वाला मेडिकल term है । पहली गर्भावस्था में Miscarriage की संभावना अधिक रहती है ।

गर्भपात के दौरान क्या होता है ?:

इस दौरान होने वाले लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि गर्भपात का कारण क्या है व आपकी गर्भावस्था कितनी हो चुकी है? सामान्यत: गर्भपात में भ्रूण, प्लेसैन्टा व रक्त गर्भाशय से योनि के द्वारा बाहर निकलते हैं । नियमित अल्ट्रासाउण्ड से इस बात का पता लगाया जा सकता है । कि भ्रूण में हृदयगति है या नहीं है अथवा भ्रूण के स्थान पर केवल एक empty foetal sac ही तो नहीं है ।

गर्भपात के कारण (Cause of Miscarriage in Hindi):

गर्भपात के कुछ सामान्य कारण हैं जिनकी लिस्ट निम्नलिखित हैं |

  • 50% प्रारम्भिक Miscarriage early abortion सही भूण न बनने से होते हैं ।
  • conception के दौरान अथवा उसके पश्चात् कुछ ऐसा गड़बड़ हो जाता है कि भूण का विकास ही नहीं हो पाता है । इसे afoetal pregnancy अथवा blighted ovum कहते हैं ।
  • LPD या Luteal Phase defect भी एक कारण हो सकता है |
  • Thynailage की बीमारियां |
  • अनियंत्रित मधुमेह जैसै Chromosomal Abnormalite भी एक कारण हो सकता है |
  • प्लेसैन्टा में कुछ गड़बड़ होना भी एक कारण हो सकता है ।
  • विभिन्न प्रकार के इन्फेक्शन जैसे Viral – Rubella, Cytomyalo, HIV (ii) Parastic – Toxoplasma, Malaria (iii) Bacterial – Chlamydia, Brucella इत्यादि .
  • फर्टिलाइज्ड अण्डा गलत जगह पर implant होने की स्थिति में ।
  • मां का immune system अथवा हॉरमोन स्तर में गड़बड़ भी एक कारण हो सकता है ।
  • माँ का बीमार रहना एवं माँ को चोट लगना भी एक कारण हो सकता है |
  • माँ के गर्भाशय में intrauterine contraceptive device (IUCD) का होना |
  • तनाव की वजह से माँ के गर्भाशय की बनावट में खराबी हो सकती है जिसके कारण Miscarriage हो सकता है |
  • पर्यावरण का प्रदूषण भी इसका एक कारण हो सकता है ।
  • अल्कोहल, धूम्रपान व ड्रग्स का सेवन इसके खतरे को उत्पन्न करते हैं ।
  • पेट पर तेज चोट पड़ने से भी यह हो जाता है ।

दुर्भाग्यवश अधिकतर स्त्रियों को अपने गर्भपात का कारण पता ही नहीं चल पाता है ।

पुनरावर्ती गर्भपात (Recurrent miscarriage) :

इसे Recurrent Pregnancy Loss (RPL) भी कहते हैं । यह कुल जनसंख्या के लगभग एक प्रतिशत हिस्से को प्रभावित करता है । इसे तीन अथवा तीन से अधिक प्रारंभिक गर्भपात (13 सप्ताह के अंदर) के रूप में परिभाषित किया गया है। आवश्यक नहीं कि ये लगातार हों, परन्तु एक ही जीवन साथी से होनी चाहिये। इसमें दो late miscarriages (13 से 20 सप्ताह) भी हो सकते हैं । अधिकतर गर्भपात भूण में खराबी के कारण होते हैं, जिनकी पुनरावृत्ति की संभावना नहीं होती है । इसके विपरीत Recurrent Pregnancy Loss (RPL) माता-पिता की प्रजनन संबंधी समस्याओं के कारण होता है ।

पुनरावर्ती गर्भपात के कारण:

  • मां के प्रजनन तंत्र की हॉरमोन संबंधी समस्यायें इसका एक कारण हो सकती हैं ।
  • गर्भाशय की बनावट में खराबी ।
  • सर्विक्स में खराबी ।
  • autoimmune antibodies की उपस्थिति, जो प्लेसैन्टा की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाओं में रक्त के छोटे-छोटे clots जमा देती है, जिससे भूण तक रक्त नहीं पहुंच पाता है ।
  • इन्फेक्शन ।
  • Chromosomal anomalies

अध्ययनों में आधे से अधिक स्त्रियों में कोई कारण नहीं पाया गया, न ही उन्हें कोई विशेष उपचार ही दिया जा सका है ।

एक्टोपिक प्रेग्नेन्सी क्या है (Ectopic pregnancy) :

जब किसी महिला का गर्भ गर्भाशय के बाहर विकसित होता है । तो इस प्रक्रिया को एक्टोपिक प्रेग्नेन्सी कहा जाता है इसमें अधिकतर फैलोपियन ट्यूब अथवा डिम्बवाहिनी नलिकाओं में इसका विकास हो जाता है । इसके लक्षण निम्नलिखित हैं |

एक्टोपिक प्रेग्नेन्सी के लक्षण:

  • बुरी तरह दर्द होता है, जो मासिक के दर्द जैसा नहीं होता है ।
  • दर्द के बाद गाढ़े रंग का रक्तस्राव होता है ।
  • बेहोशी, जी मितलाना व उल्टी जैसा अनुभव होता है ।

यदि गर्भस्थ महिला को उपर्युक्त में से कोई लक्षण दिखाई दे, तो ऐसी अवस्था में उसे तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि एक्टोपिक प्रेग्नेन्सी खतरनाक हो सकती है । इसलिए महिला का जीवन बचाने के लिये इस गर्भ को तुरन्त समाप्त करना आवश्यक होता है । इसके लिये महिला को अस्पताल में रहना पड़ता है । कितने समय रुकना होगा, यह महिला की सर्जरी पर निर्भर करता है । डॉक्टर या तो महिला के इस गर्भ को पेट में छेद करके laproscope द्वारा निकालते है अथवा वे पेट की सतह को काटकर laporotomy के द्वारा बाहर निकालते हैं । वैसे तो डॉक्टर का प्रयास होता है कि महिला की  फैलोपियन ट्यूब ठीक-ठाक बच जाये, परन्तु यदि इस गर्भ के कारण महिला की ट्यूब खराब हो जाती है, तो इसे निकालना आवश्यक हो जाता है । यदि महिला की एक ट्यूब निकाल दी जाती है, तो फिर महिला  उस तरफ ovulation होने से conceive नहीं कर सकती हैं, परन्तु महिला की दूसरी ट्यूब बिना किसी उपचार के अपना कार्य भली भांति करती रहेगी ।

मोलर प्रेग्नेन्सी क्या है (Molar pregnancy) :

इसे hydatidiform mole भी कहते हैं । गर्भ या तो foetal होता है, अर्थात् उसमें बच्चा होता है या फिर afoetal होता है, अर्थात् उसमें बच्चा नहीं होता है । यह स्थिति तब पायी गयी जब जांच के दौरान खून में HCG (human chorionic gonadotrophin) hormone का स्तर असामान्य रूप से अधिक पाया जाता है । इस गर्भ का गर्भपात कराना आवश्यक होता है, क्योंकि यह अस्तित्व में रहने योग्य नहीं होता है । जैसे ही इसका पता चले तुरन्त D&C करा देनी चाहिये, क्योंकि यदि इसका तुरन्त उपचार न किया जाये, तो यह कैंसर अथवा malignant का रूप धारण कर सकता है । D&C के बाद पुन: HCG के स्तर की नियमित जांच की जाती है, क्योंकि जब तक महिला के हॉरमोन्स का स्तर सामान्य नहीं हो जाता है, महिला पुन: गर्भधारण नहीं कर सकती हैं ।

गर्भपात की अवस्थायें (Stages of miscarriage) :

गर्भपात की मुख्य रूप से चार अवस्थाएं होती हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन निम्नवत है |

  1. Threatening miscarriage :

इसका अनुभव महिला अपने गर्भ के समाप्त होने के कई दिन अथवा कई सप्ताह पूर्व कर सकती हैं । इस स्टेज पर महिला निम्नलिखित लक्षण अनुभव कर सकती हैं |

  • हल्का रक्तस्राव ।
  • मासिक जैसा दर्द ।
  • गर्भावस्था के लक्षण, मितली आना व स्तनों की संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है ।
  • गर्भवती न होने के जैसा अनुभव होता है ।

50 प्रतिशत केसेज में प्रारंभिक गर्भावस्था में ये रक्तस्राव स्पॉटिंग के रूप में उसी समय होता है, जब महिला की मासिक की तिथि निश्चित होती है । ऐसे केसेज में महिला की गर्भावस्था बच्चे को बिना किसी नुकसान के जारी रह सकती है ।

2.  Inevitable-miscarriage:

यह तब होता है, जब सर्विक्स खुल जाती है । व प्लेसैन्टा गर्भाशय की दीवार से हट जाती है । इसके सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं  |

  • इस दौरान दर्द, तीव्र मासिक के दर्द व प्रसव के समय के कान्ट्रेक्शन्स की भांति होता है ।
  • रक्तस्राव अधिक मात्रा में होता है ।
  • बेहोशी व उल्टी जैसी आती है ।
  • रक्तस्राव में प्लेसैन्टा के टुकड़े निकलते हैं, जो खून के थक्के अथवा लीवर जैसे दिखते हैं ।
  • महिला भ्रूण को भी देख सकती है ।
  • यदि महिला का गर्भपात सर्विक्स की खराबी के कारण हुआ है, और 16 सप्ताह के बाद हुआ है, तो जीवित बच्चा भी जन्म ले सकता है ।

3. अपूर्ण गर्भपात (Incomplete miscarriage):

जब प्लेसैन्टा का कुछ हिस्सा महिला के अंदर रह जाता है, तोउस महिला को अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है । महिला का dilatation and curettage (D&C) operation होता है । इसके लिये महिला को  जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है । महिला की सर्विक्स को फैलाया जाता है व गर्भाशय को साफ व खाली किया जाता है । यह अधिकतर 6 से 12 सप्ताह के बीच होता है ।

4. पूर्ण गर्भपात (Complete miscarriage):

इस स्थिति में गर्भाशय खाली हो जाता है, सर्विक्स बंद हो जाती है, दर्द रूक जाता है व रक्तस्राव कम हो जाता है, जो सात दिन बाद बंद हो जाता है ।

घर पर गर्भपात (Miscarriage at home) :

यदि महिला का घर पर गर्भपात हो रहा हो, तो उसे निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए |

  • अपनी डॉक्टर से तुरंत बात करें व उन्हें सारे लक्षण बतायें ।
  • किसी की मदद लें, जो आपको डॉक्टर के पास अथवा अस्पताल ले जाये । स्वयं गाड़ी न चलायें, क्योंकि आप बेहोश हो सकती हैं ।
  • यदि आपके पास कोई नहीं है, तो एम्बुलेन्स को फोन कर सकती हैं ।
  • दर्द से आराम के लिये पैरासीटामोल लें, एस्परिन न लें । लेट जायें व अपने पेट पर गर्म पानी की बोतल रख लें ।
  • अपने रक्तस्राव के लिये सैनिटरी पैड व टॉवल का प्रयोग करें ।
  • ध्यान रखें कि आपने कितने पैड प्रयोग किये हैं, जिससे आप डॉक्टर को बता सकें । टैम्पून का प्रयोग न करें ।
  • जब रक्तस्राव तेज हो जाये व टुकड़े जैसे निकलने लगे, तो किसी ऐसे बर्तन पर बैठे कि आप स्राव को सुरक्षित रख सकें, जिससे आप उसे डॉक्टर को दिखा सकें और यदि आवश्यकता हो, तो उसकी जांच की जा सके ।
  • यदि आपका बहुत अधिक खून निकल चुका है व आप बेहोश हो रही हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टरी सहायता की आवश्यकता होती है । अपने डॉक्टर को तुरंत फोन करें व अस्पताल जाने की तुरंत व्यवस्था करें ।
  • यदि आपको D&C की आवश्यकता है, तो कुछ खायें-पियें नहीं । क्योंकि एनेस्थीसिया के लिये आपका पेट खाली होना चाहिये ।
  • आप अस्पताल जाने के लिये तैयारी करें व घर में बच्चों आदि का प्रबंध कर दें अस्पताल के लिये सामान पैक कर लें ।
  • यदि आपको अस्पताल न जाना हो, तो गर्भपात हो जाने के बाद डॉक्टर से बात कर लें । यह जांच कराना आवश्यक है कि आपका गर्भपात पूर्ण रूप से हुआ है कि नहीं । इसके लिये आपको अल्ट्रासाउण्ड स्कैन की आवश्यकता पड़ती है ।

गर्भपात के बाद अस्पताल क्यों (why to go hospital after Miscarriage  ) :

यद्यपि अधिकतर स्त्रियों का गर्भपात घर पर ही होता है, परन्तु अंतत: उन्हें D&C अथवा स्कैन के लिये अस्पताल जाना होता है । अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर यह जांच करते हैं कि महिला का गर्भपात पूर्णत: हो गया है अथवा नहीं । यदि महिला का complete miscarriage नहीं हुआ है । अथवा यह निश्चित नहीं हो पा रहा है, तो महिला का स्कैन करना आवश्यक होता है । महिला को पानी पीने के लिये कहा जाता है, जिससे महिला का ब्लैडर फुल हो जाये । फिर महिला का स्कैन किया जाता है । यदि स्कैन से यह पता चलता है कि महिला की प्लेसैन्टा का कुछ भाग अंदर रह गया है, तो फिर महिला के लिए D&C operation आवश्यक होता है, जिसके लिये महिला को 24 घंटे तक अस्पताल में रूकना पड़ सकता है । यदि महिला को अपने अजन्मे शिशु का शरीर व प्लेसैन्टा अंतिम संस्कार के लिये चाहिये हो, तो D&C operation से पूर्व अस्पताल के स्टाफ को बता देना चाहिए । आवश्यक है कि महिला के साथ उसके  पति अथवा जो भी अन्य व्यक्ति हो, वह अस्पताल के स्टाफ के संपर्क में रहें ।

डी. एण्ड सी. क्या है (Dilatation & Curettage) :

यह एक छोटा सा ऑपरेशन है, जो अस्पताल में जनरल एनेस्थीसिया देकर किया जाता है । इसमें सर्विक्स को फैलाया जाता है व गर्भाशय को खाली किया जाता है । Incomplete miscarriage में यदि समय से उपचार न किया जाये व गर्भाशय को खाली अथवा साफ न किया जाये, तो इन्फेक्शन व इन्फर्टिलिटी की संभावना होती है । जब स्कैन से missed abortion का पता चलता है, तब भी डॉक्टर D&C करते हैं ।

डी. एण्ड सी. की विशेषताएं:

  • यह जल्दी पूरा हो जाता है ।
  • इसमें गर्भपात के समान कठिनाई नहीं होती है । D&C के बाद मासिक की तरह स्राव होता है ।
  • गर्भपात के पश्चात् महिला को कुछ दिन तक घूमना नहीं चाहिये । आराम करना चाहिये ।
  • यदि महिला ने स्वयं गर्भपात का निर्णय लिया है और यह प्राकृतिक तरीके से हो गया है लेकिन यदि यह पूर्ण रूप से नहीं हुआ है, तो महिला को D&C करवानी पडेगी ।
  • यदि महिला जनरल एनेस्थीसिया न लेना चाहें, तो महिला D&C में लोकल एनेस्थीसिया भी ले सकती हैं ।

यदि महिला का गर्भपात हुआ है अथवा उसने D&C करवाई है और उसका दर्द नहीं रूका है अथवा एक सप्ताह बाद भी रक्तस्राव हो रहा है, तो ऐसी स्थिति में incomplete miscarriage की आशंका पैदा हो जाती है । यदि महिला को बुखार है, तो यह इन्फैक्शन का लक्षण है । ये लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें । ऐसे में महिला के लिये D&C करवाना आवश्यक है और यह देखने के लिये कि गर्भाशय खाली है अथवा नहीं repeat D&C भी करवाई जा सकती है ।

गर्भपात के बाद महिला का स्वास्थ्य (health after miscarriage):

गर्भपात के बाद महिला में निम्न लक्षण उजागर हो सकते हैं | इन लक्षणों से कैसे निबटा जाय उसकी जानकारी हम नीचे दे रहे हैं |

थकान की स्थिति में

गर्भपात के पश्चात् शारीरिक व भावनात्मक रूप से थकान का अनुभव होता है । यदि संभव हो तो कुछ दिन आराम कर लें । यदि ऐसा न कर सकें, तो जल्दी सो जायें व काम को इस प्रकार नियोजित करें कि बीच-बीच में आपको आराम मिलता रहे । जो कार्य आवश्यक न हों, उन्हें छोड़ दें । सर्वप्रथम स्वयं को प्राथमिकता दें ।

रक्तस्राव की स्थिति में

यदि आपका complete miscarriage हो गया है, तो आपका रक्तस्राव जल्दी ही बंद हो जाता है । एक सप्ताह में यह धीरे-धीरे कम होता जाता है, फिर बंद हो जाता है । यह रक्तस्राव सात दिन में पूरा बंद हो जाना चाहिये । यदि यह बंद नहीं होता है अथवा पहले से अधिक स्राव हो रहा है, तो इसका मतलब है कि कुछ सामान्य नहीं है । अतः तुरन्त डॉक्टर से संपर्क करें ।

दर्द होना चाहिए की नहीं :

यदि आपका complete miscarriage हो गया है अथवा आपकी D&C हुई है, तो आपका दर्द बंद हो जाना चाहिये । यदि दर्द जारी रहता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।

बुखार होने पर:

यदि आपका complete miscarriage हो गया है अथवा आपकी D&C हुई है, तो उसके बाद बुखार आपके इन्फेक्शन को इंगित करता है । यह इन्फेक्शन इन्फर्टिलिटी पैदा करता है । अतः तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें । आपका उपचार एण्टीबायोटिक अथवा D&C द्वारा किया जा सकता है ।

दूध बनेगा या नहीं:

यदि गर्भपात 12 सप्ताह बाद हुआ है, तो दूध का बनना सामान्य बात है । यह धीरे-धीरे स्वतः ही ठीक हो जाता है |

मासिक चक्र पर प्रभाव:

Ovulation गर्भपात के 14 दिन बाद होता है व अगला मासिक 28 दिन बाद आता है, परन्तु इसमें व्यक्तिगत तौर पर भिन्नता हो सकती है । धीरे-धीरे आपका मासिक चक्र सामान्य हो जाता है । यदि आपका मासिक चक्र सामान्य है, तो आप गर्भपात के 14 दिनों बाद ही गर्भवती हो सकती हैं ।

गर्भपात के बाद सेक्स:

रक्तस्राव बंद होने तक संभोग नहीं करना चाहिये, क्योंकि इससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है, क्योंकि अभी आपकी सर्विक्स बंद हो रही होती है और शुक्राणु इन्फेक्शन को ऊपर की ओर गर्भाशय में ले जा सकता है, जो हीलिंग स्टेज पर होता है । अत: इस प्रकार गर्भाशय में इन्फेक्शन हो सकता है ।

गर्भनिरोधक

गर्भपात के पश्चात् यदि आप शीघ्र गर्भवती होना नहीं चाहती हैं, तो इसके बाद गर्भनिरोधक का प्रयोग प्रारंभ कर दें ।

शारीरिक व भावनात्मक कष्ट

कई स्त्रियां गर्भपात के बाद भावनात्मक कठिनाई के साथ-साथ शारीरिक कष्ट का भी अनुभव करती हैं । जैसे –

  • नींद न आना
  • भूख न लगना
  • बिना किसी कारण थकान
  • बिना कारण आंसू आना
  • खराब सपने आना व मानसिक कठिनाई होना ।

उपर्युक्त स्थिति में धैर्य रखें व यह सोच लें कि ऐसी स्थिति में ये लक्षण सामान्य होते हैं ।

गर्भपात के बाद गर्भधारण (Subsequent Pregnancy) :

ऐसा माना जाता है कि गर्भपात के बाद रिकवरी के लिये एक मासिक चक्र अथवा 4 से 6 सप्ताह का समय आवश्यक होता है, परन्तु अधिकतर डॉक्टरों का मानना है कि यद्यपि महिला का शरीर इसके बाद कुछ सप्ताह में ovulation व conception के लिये सक्षम हो जाता है, परन्तु यह एक पूर्ण गर्भावस्था के लिये सक्षम नहीं होता है । इसके लिये शरीर को तीन से छ: महीने का समय देना चाहिये ।

गर्भपात के बाद गर्भधारण की सफलता:

  • ऐसे युगल जिनमें पिछला गर्भपात का इतिहास न हो – 80 से 85 प्रतिशत ।
  • ऐसे युगल जिनमें पिछला एक गर्भपात हो – 80 प्रतिशत ।
  • ऐसे युगल जिनमें पिछले 2, 3 अथवा 4 गर्भपात हो – 68 प्रतिशत ।
  • यहां तक कि ऐसे युगल जिनके यहां 5 अथवा उससे अधिक बार Miscarriage हुआ हो, उनके यहां भी बच्चे का जन्म हुआ है ।
  • हॉरमोन संरचना व इन्फेक्शन संबंधी कारण तब तक रहते हैं, जब तक उनका उपचार न हो ।
  • जो क्रोमोसोमल असामान्यतायें by chance होती हैं, उनकी सामान्यत: पुनरावृत्ति नहीं होती है ।
  • लगभग पांच प्रतिशत दम्पतियों में क्रोमोसोमल असामान्यतायें होती हैं, जो उनके बच्चों में भी जाती हैं । इनकी जांच खून की जांच द्वारा की जा सकती है ।

 गर्भपात के बाद महिला को डर :

गर्भपात से गर्भावस्था की सारी खुशी तो समाप्त हो ही जाती है और आगे भी जब महिला  गर्भवती होती हैं, तो उसके मन में यह डर बैठा रहता है  । यह डर तब तक बना रहता है, जब तक महिला बच्चे को जन्म नहीं दे देती हैं ।

  • महिला को डर बना रहता है कि कहीं उसको रक्तस्राव तो नहीं हो रहा है ।
  • पेट में थोड़ा भी दर्द होने से महिला डर जाती हैं ।
  • महिला को ऐसा लगता है कि कोई काम करने से गर्भपात हो सकता है । अतः इस दौरान महिला स्वयं को बहुत नाजुक अनुभव करती हैं ।
  • महिला को डर लगता है कि उसके गर्भस्थ शिशु में कोई असामान्यता तो नहीं है ।
  • महिला अपने बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ने में डरती हैं । महिला उसका नाम सोचने से भी डरती हैं ।
  • महिला जन्म से पूर्व बच्चे के कपड़े व उसका सामान खरीदने में भी डरती हैं ।

गर्भपात महिला की भावनाओं को झकझोर कर उसके अन्दर आगे के लिए भी डर बैठा देता है इसलिए जिन महिलाओं का पहले कभी गर्भपात हुआ हो उन महिलाओं के दुबारा गर्भवती होने पर पति एवं परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा महिला को भावनात्मक सपोर्ट मिलना बेहद जरुरी है |

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