Myelogram Medical टेस्ट क्या है ? और कैसे किया जाता है.

Myelogram नामक यह मेडिकल टेस्ट एक एक्स रे परीक्षण है जिसका उपयोग मनुष्य की रीढ़ की हड्डी की विभिन्न बीमारियों जैसे डिस्क हर्नियेशन, स्पाइनल स्टेनोसिस, tumor या फ्रैक्चर इत्यादि का पता लगाने के लिए किया जाता है | इसके अलावा जब किसी कारण वश रीढ़ की हड्डी की कुछ तंत्रिकाएं अंजान समस्याओं से प्रभावित होती हैं तो उन अंजान समस्याओं का पता करने के लिए भी Myelogram नामक इस मेडिकल टेस्ट को उपयोग में लाया जाता है | इस पूरी प्रक्रिया में Radiographic Contrast Media नामक डाई का उपयोग किया जाता है इस डाई को रीढ़ की हड्डी में मौजूद तरल पदार्थ cerebrospinal fluid (CSF) में इंजेक्ट किया जाता है | डाई इंजेक्ट होने के बाद यह Contrast डाई चित्र लेते समय Spinal Canal cord एवं तंत्रिका मूलों को प्रकाशित करती है | इस तरह से जब CT स्कैन और  Myelography के संयुक्त रूप का उपयोग करके जो चित्र उभरते हैं उनमे रीढ़ की हड्डी की बनावट और उसकी कोशिकाओं के बारे में साफ़ एवं स्पष्ट रूप से जानकारी मिलती है | और इन्ही चित्रों की मदद से चिकित्सक रीढ़ की हड्डी की विभिन्न समस्याओं के बारे में पता लगाने में सक्षम होते हैं |

Myelogram-test-

Preparation for Myelogram:

मायलोग्राम नामक यह परीक्षण सामन्यतया अस्पताल के एक्स रे विभाग या किसी खास रेडियोलांजी केंद्र में की जा सकती है | लेकिन इस परीक्षण से पहले चिकित्सक द्वारा प्रभावित व्यक्ति को जिन निर्देशों का पालन करने को कहा जा सकता है वे निम्न हैं |

  • प्रभावित व्यक्ति को जांच से पहले की मध्य रात्रि से कुछ खाने पीने के लिए मना किया जा सकता है |
  • इस परीक्षण से पहले कराये गए अन्य परीक्षण जैसे एक्स रे, सीटी स्कैन और एम आर आई इत्यादि की रिपोर्ट साथ लाने को कहा जा सकता है |
  • ऐसे रोगी जो मधुमेह या दौरों को नियंत्रित करने की दवाइयां लेते हैं या ऐसे लोग जो खून को पतला करने की दवाइयां लेते हैं उन्हें जांच से पहले चिकित्सक से इस बारे में अवश्य बात करनी चाहिए और चिकित्सक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए |
  • रोगी यदि गर्भवती महिला हैं या Intravenous Paleography (IVP) या अन्य किसी कंट्रास्ट डाई से एलर्जी है या रोगी किसी अन्य बीमारी से पीड़ित है तो यह जानकारी रेडियोलाजी तकनीशियन को अवश्य बतानी चाहिए |
  • परीक्षण परिसर में घर से व्यक्ति के साथ किसी परिवार सगे सम्बन्धी का होना अति आवश्यक है जो रोगी को Myelogram test के बाद घर पहुँचाने में मदद करेगा |
  • यद्यपि Myelogram नामक इस परीक्षण को पूर्ण करने में 1-2 घंटों का समय लग सकता है लेकिन चूँकि मायलोग्राम के बाद सीटी स्कैन भी किया जा सकता है और प्रभावित व्यक्ति को जांच के बाद अस्पताल में आराम करने के लिए ठहरना भी पड़ सकता है इसलिए व्यक्ति को 5-6 घंटों का समय निकालकर परीक्षण परिसर में आना चाहिए |
  • घर पर परीक्षण से निकलने से पहले ढीले वस्त्र पहन लें और आभूषण, घड़ियाँ इत्यादि घर पर ही खोल कर रख लें कोशिश करें की जो ढीले वस्त्र पहने जा रहे हों उन पर स्नैप या जिपर न लगे हों |

मायलोग्राम टेस्ट करने की प्रक्रिया:

  • मायलोग्राम नामक यह मेडिकल टेस्ट को अंजाम देने के लिए अस्पताल के स्टाफ द्वारा प्रभावित व्यक्ति को गाउन पहनने के लिए दिया जा सकता है | उसके बाद रोगी को पीठ के बल या करवट लेकर मेज पर लेटा दिया जाता है |
  • उसके बाद चिकित्सक द्वारा रोगी की पीठ का एक हिस्सा एंटीसेप्टिक का प्रयोग करके साफ़ किया जाता है जिससे रोगी को ठंडा महसूस हो सकता है |
  • अब रोगी की पीठ में शरीर के उस हिस्से को सुन्न करने के लिए लोकल एनिसथेटिक का इंजेक्शन लगाया जा सकता है |
  • जब शरीर का वह ख़ास स्थल सुन्न हो जाता है तो चिकित्सक द्वारा रोगी की पीठ की हड्डियों के बीच एक सूई लगाईं जाती है | रोगी को दर्द महसूस होने पर वह चिकित्सक को इसके बारे में बता सकता है |
  • इस सूई द्वारा चिकित्सक द्वारा रीढ़ की हड्डी से एक द्रव जिसे cerebrospinal fluid (CSF) कहते हैं निकाला जाता है |
  • इस प्रक्रिया के पूर्ण हो जाने के बाद रोगी की पीठ में सूई के माध्यम से कंट्रास्ट डाई पहुंचा दी जाती है इससे रोगी की रीढ़ की हड्डी का आस पास का स्थल एक्स रे में दिखाई देने लगता है |
  • एक्स रे की मेज गतिशील रहेगी और रोगी को विभिन्न आसन बदलने को कहा जा सकता है जब एक्स रे लिए जा रहे हों रोगी को चाहिए की वह स्थिर लेटा रहे |
  • जब जांच पूर्ण हो जाती है तो प्रभावित स्थल से सूई को हटाकर उस पर बैंड ऐड या पट्टी लगाई जा सकती है |
  • Myelogram test के बाद सीटी स्कैन भी किया जा सकता है सीटी स्कैन की प्रक्रिया जानने के लिए यह लेख पढ़ें |

Myelogram test के बाद सावधानियां:

मायलोग्राम नामक यह मेडिकल टेस्ट पूर्ण हो जाने के बाद रोगी को कई घंटे तक स्टाफ या नर्स की निगरानी क्षेत्र में रखा जा सकता है | और रोगी कुछ महत्वपूर्ण निर्देशों के साथ घर जाने की अनुमति अर्थात डिस्चार्ज किया जा सकता है |

  • इसमें रोगी को अपना सिरहाना ऊपर रखने को कहा जा सकता है और सीधे लेटने या आगे झुकने से मना किया जा सकता है ताकि परीक्षण के दौरान दी गई कंट्रास्ट डाई सिर तक न पहुंचे |
  • जांच के बाद कुछ गहनते बिस्तर पर सिरहाना ऊपर रखते हुए आराम करने एवं तरल पदार्थ ज्यादा मात्रा में पीने को कहा जा सकता है |
  • यह भी कहा जा सकता है की जांच के दिन किसी प्रकार का कोई व्यायाम न करें |

Myelogram test के बाद यदि रोगी का सरदर्द बढ़ जाता है, अनिद्रा की शिकायत होने लगती है, बुखार आता है, दौरे पड़ना या कमजोरी महसूस होती है तो रोगी को तुरंत चिकित्सक से सम्पर्क करना चाहिए |

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