Obsessive Compulsive Disorder OCD in Hindi.

Obsessive Compulsive Disorder को हम एक उदाहरण के माध्यम से समझने की कोशिश करेंगे, मोहन जो की अभी अभी घर पहुंचा ही था की अचानक उसके दिमाग में ख्याल आया की ऑफिस से निकलते समय वह अपना कंप्यूटर अर्थात सिस्टम बंद करना भूल गया बस इसी विचार ने उसको पूरी तरह झकझोर दिया की यदि किसी और कर्मचारी ने उसके सिस्टम का दुरूपयोग कर दिया तो क्या होगा? यदि उसके बॉस ने उसका सिस्टम उस अवस्था में देख लिया तो वह उसे लापरवाह समझेगा? इत्यादि इत्यादि? बस इन्ही बातों ने मोहन को बेहद डरा दिया और वह तुरंत घर से मुड़ा तो फिर से ऑफिस की ओर निकल पड़ा ऑफिस पहुँचता है तो देखता है की सब कुछ ठीक ठाक है अर्थात उसका सिस्टम जिस पर मोहन कार्यालय का काम करता था वह बंद है | जी हाँ दोस्तो यह उपर्युक्त स्थिति Obsessive Compulsive Disorder की है | उपर्युक्त तो एक उदहारण है किसी को साफ़ सफाई के प्रति भी यह रोग हो सकता है ऐसे में व्यक्ति बार बार हाथ धोने, नहाने,घर की साफ़ सफाई करने इत्यादि क्रिया को करने को बाध्य हो सकता है |

Obsessive-Compulsive-Disorder OCD in Hindi

Obsessive Compulsive Disorder (OCD) क्या है?

Obsessive Compulsive Disorder (OCD) नामक इस रोग में व्यक्ति के दिमाग में कोई एक विचार बार-बार आता रहता है । वह यह जानते हुए भी कि यह विचार गलत है फिर भी वह उसे अपने दिमाग से हटा नहीं पाता है । उसे ऐसा लगता है कि अगर वह ऐसा नहीं सोचेगा तो कोई अनहोनी घटना या कुछ बहुत बुरा हो जाएगा । इसलिए यह विचार रोगी को कुछ ज्यादा ही आते हैं जो बार-बार किसी विशेष कार्य को करने को बाध्य करते हैं, और यदि Obsessive Compulsive Disorder से प्रभावित व्यक्ति वह कार्य न करे तो उसे बहुत उलझन एवं परेशानी होने लगती है । उदाहरणार्थ: कई बार व्यक्ति को यह अनुभव होने लगता है कि उसके हाथ-पैर या कपड़ों में गन्दगी लगी है और उसे बार-बार नहाना या सफाई करना पड़ता है लेकिन यह सब करने के उपरांत भी उसे यह शंका बनी रहती है कि सफाई ढंग से नहीं हो पाई है । इस प्रकार से वह अपना सभी समय इन्हीं कार्यों अथवा विचारों में व्यतीत कर देता है जिससे ऐसे रोगियों का जीवन बहुत कष्टमय हो जाता है । कई बार इन रोगियों के दिमाग में अपशब्द, सेक्स संबंधी विचार या देवी देवताओं के लिए अपमानजनक बातें आने लगती हैं । यद्यपि रोगी जानता है कि ये विचार पूर्णतया गलत है लेकिन ये विचार उसे इतना अधिक परेशान कर देते हैं कि वह इन सभी स्थितियों से लगातार बचने का प्रयास करते हुए भी बच नहीं पाता है ।

Obsessive Compulsive Disorder (OCD)के लक्षण:

OCD नामक इस रोग के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • अधिकांशतः Obsession से प्रभावित रोगी अपने विचारों से इतने उदास हो जाते हैं कि कई बार आत्महत्या के विचार भी इनके मन में आने लगते हैं और कई बार ऐसे रोगी आत्महत्या का प्रयास भी कर बैठते हैं।
  • यद्यपि Obsessive Compulsive Disorder नामक इस रोग में बुद्धि एवं याददाश्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, लेकिन यह सच्चाई है की इन विचारों के कारण रोगी अपना कोई भी काम समय से नहीं कर पाता है । इसके अलावा यदि रोगी विद्यार्थी है तो उसकी पढ़ाई इस रोग के कारण अत्यधिक प्रभावित हो जाती है।
  • इस रोग के होने की कोई विशेष उम्र निर्धारित नहीं है यह रोग साधारणतया किशोर अवस्था में भी प्रारंभ हो सकता है | किन्तु कभी-कभी यह रोग 8-10 वर्ष के बच्चे में भी प्रारंभ हो जाता है अधिकतर प्रारंभ में रोगी किसी एक विचार से पीड़ित होता है और बाद में उससे संबंधित अन्य विचार आने लगते हैं।

उदाहरणार्थ:  एक स्त्री ने एक बार यह देखा कि उसका बच्चा लेटा हुआ है और उसके पास चीनी के कुछ दाने पड़े हैं और उन दानों पर चीटिया आ गई हैं तब से उसे हर जगह यह भय रहने लगा कि कहीं चीनी के दाने तो नहीं पड़े हैं और इस कारण वह घर के हर स्थान को बार-बार साफ करने लगी । Obsessive Compulsive Disorder के कारण जहां पर चीनी के दाने होने की कोई संभावना नहीं होती वहां भी उसे सफाई करनी पड़ी थी ।

क्या OCD नामक यह रोग ठीक हो सकता है

कुछ समय पूर्व तक यह समझा जाता था कि यह रोग अर्थात OCD बहुत कम मात्रा में होता है कितु पिछले कुछ वर्षों में किए गए शोध कार्यों से पता चला है कि इस प्रकार के रोगियों की संख्या जन साधारण में 1 से 5 प्रतिशत है । अधिकांश रोगियों में इसकी तीव्रता इतनी कम होती है कि वे अपना जीवन बिना किसी चिकित्सा के सुचारू रूप से चलाने में सफल हो जाते हैं यद्यपि उनका जीवन इन विचारों के कारण कुछ हद तक संकुचित हो जाता है । जब रोग बचपन अथवा किशोरावस्था में प्रारंभ होता है तब वह कुछ समय पश्चात् स्वत: ही ठीक हो जाता है, किन्तु कुछ उम्र के पश्चात् यह रोग दुबारा होने की संभावना रहती है और रोग धीरे-धीरे बढ़कर दीर्घकालिक हो जाता है । यदि रोग बहुत तीव्र नहीं है तो अधिकतर रोगी अपने Obsession को किसी हद तक सीमित करने में सफल हो जाते हैं तथा उनका जीवन लगभग ठीक चलता रहता है परंतु यदि रोग का वेग तीव्र है तब यह रोगी के सामान्य जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर देता है । Obsessive Compulsive Disorder (OCD) से पीड़ित लगभग 60 प्रतिशत रोगी अपना जीवन सामान्य रूप से बिताने में पूरी तरह सक्षम हो जाते हैं । शेष 40 प्रतिशत में यह रोग दीर्घकालिक होने की संभावना होती है ।

बीमारी के संभावित कारण (Cause Of OCD in Hindi):

अधिकतर इस प्रकार के रोगियों का व्यक्तित्व रोग शुरू होने के पहले अत्यधिक बाध्यतापूर्ण होता है जिसके कारण उनमें अपने कार्यों को नियम व सुचारू रूप से करने की प्रवृति होती है। वह बहुत सफाई पसंद समय पर पाबंद और प्रत्येक बताए गए नियमों को पूरी तरह से मानने का प्रयास करते हैं वे जो भी कार्य करते हैं उसे बड़ी बारीकी से करने का प्रयास करते हैं इस प्रकार से रोगी बहुधा बड़े कुशाग्र विद्यार्थी भी होते हैं। यह भी देखा गया है कि इन रोगियों के मां-बाप बच्चे को एक आदर्श बालक बनाने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति के लोग किसी भी एक घटना में इतने अधिक उलझ जाते हैं कि वही एक विचार उनके दिमाग में सर्वोपरि हो जाता है, और यह कभी-कभी रोग का रूप ले लेता है। उदाहरणार्थ:  एक रोगी को किसी मित्र ने कहा कि तुम्हारे पायजामें पर मूत्र का निशान लगा है उसके बाद उसे सदैव यह भय रहने लगा कि कहीं उसके पायजामें पर मूत्र का निशान तो नहीं लगा है जिससे कि सब नापाक हो जाए। उसने नमाज इत्यादि पढ़ने जाना भी बंद कर दिया क्योंकि उसे सदैव भय लगा रहता था कि वह कहीं मूत्र लगा होने के कारण नापाक तो नहीं । अभी पिछले वर्षों में शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि Obsessive Compulsive Disorder होने पर मस्तिष्क में एक प्रकार के रसायन की कमी हो जाती है और इस रसायन को पूरा करने में कुछ औषधियों को उपयोग में लाया जा सकता है जो इस रसायन की बढ़ोत्तरी में सहायक होते हैं।

Treatment of Obsessive Compulsive Disorder (ईलाज):

इस रोग की चिकित्सा में साइकोथेरेपी काफी प्रभावी चिकित्सा पद्यति हैं । साइको थेरेपी के द्वारा धीरे धीरे रोगी को अपने रोग के बारे में समुचित जानकारी देने के उपरांत उसको मानसिक तनाव को कम करने की प्रक्रिया समझाई जाती है, तथा उसे सिखाया जाता है कि वह अपने विचारों तथा कपलसन के प्रति केसा व्यवहार करें ताकि उसकी उलझनों व तनाव में कमी आ सके और उन पर वह धीरे-धीरे अपना नियंत्रण कर सके। तदोपरांत कुछ मनोवैज्ञानिक तरीकों द्वारा रोगी के व्यक्तित्व में कुछ परिवर्तन लाने का भी प्रयास किया जाता है जिससे कि वह इन विचारों से अपने आपको मुक्त कर सके । इस रोग में कुछ औषधियां दी जाती हैं जिनमें यदि रोगी पूर्णतया ठीक न भी हो सके तो भी उसका जीवन कुछ हद तक सामान्य हो जाता  है । Obsessive Compulsive Disorder की चिकित्सा में लगभग 3 से 6 माह का समय लगता है। कई बार इससे भी अधिक समय तक चिकित्सा करने की आवश्यकता पड़ सकती है, विशेष तौर से उन रोगियों में जिनमें रोग दीर्घकाल से है ।

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जैसा कि उपर्युक्त वाक्य में पहले भी बता चुके हैं की यह रोग दीर्घकालिक हो जाता है इसलिए चिकित्सा के उपरांत भी इसके पुन: होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है । अतएव यह आवश्यक है कि रोगी चिकित्सक से निरंतर संपर्क बनाए रखे जिससे कि Obsessive Compulsive Disorder (OCD) के दोबारा होने की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सके।

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