ओवुलेशन यानिकी डिम्बोत्सर्ग क्या है इसका समय जानने के तरीके.

प्रत्येक माह स्त्री की दोनों में से एक डिम्बग्रंथि (ovaries) से एक परिपक्व डिम्ब बाहर आता है, जिसे डिम्बोत्सर्ग अथवा ओवुलेशन (Ovulation) कहते हैं । यह प्रक्रिया स्त्री में किशोरावस्था में मासिक प्रारंभ होने पर शुरू होती है । डिम्बग्रंथि (ovan)) से निकलकर अण्डा डिम्बवाहिनी नलिकाओं (fallopian tube में जाता है, जहां 24 घंटे के भीतर यह शुक्राणु द्वारा निषेचित किया जा सकता है । पिट्यूटरी से निकलने वाले हॉरमोन Leutenizing Hormone (LH) के स्तर के अचानक बढ़ने से डिम्बोत्सर्ग अथवा ovulation होता है । यह हॉरमोन हमेशा ही शरीर में मौजूद रहता है, परन्तु कम मात्रा में रहता है । मासिक चक्र के लगभग मध्य में पिट्यूटरी ग्रंथि अन्य समय की अपेक्षा अधिक Leutenizing Hormone (LH) बनाती है । Leutenizing Hormone (LH) का स्तर लगभग 1-3 दिन तक बढ़ा रहता है । इसका स्तर बढ़ने के 20-44 घंटे के भीतर डिम्बोत्सर्ग यानिकी Ovulation हो जाता है । LH के बढ़े हुए स्तर की जांच 8-10 घंटे बाद पेशाब द्वारा की जा सकती है ।

ओवुलेशन

ओवुलेशन अथवा डिम्बोत्सर्ग क्या है ? :

डिम्बग्रंथि से एक अथवा अधिक अण्डे के उत्सर्ग को ओवुलेशन या डिम्बोत्सर्ग कहते हैं । यह मासिक चक्र का सर्वाधिक fertile समय होता है । प्रत्येक माह डिम्बग्रंथि में एक या अधिक अण्डे बनते हैं । व परिपक्व होते हैं । उनमें से सबसे अधिक बडा अण्डा डिम्बग्रंथि द्वारा pelvic cavity में निकाला जाता है, जिसे Fallopian tube द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है । किस माह में किस डिम्बग्रंथि से अण्डा निकलेगा, यह निश्चित नहीं होता है । यह भी आवश्यक नहीं है कि यह क्रम बारी-बारी से दोनों डिम्बग्रंथि में हो । किसी भी माह में किसी भी डिम्बग्रंथि में अण्डा बन सकता है ।

ओवुलेशन का समय कैसे पता करें (Hoe to know the time of Ovulation)?

किसी स्त्री में डिम्बोत्सर्ग अथवा ओवुलेशन का समय मालूम करने के लिये दो विधियां Basal body temperature (BBT) एवं Ovulation prediction kits अपनाई जाती हैं |

  1. Basal body temperature (BBT) :

इस विधि में थर्मामीटर के प्रयोग किया जाता है । सुबह बिस्तर से उठते ही तापमान लिया जाता है । अधिकतर स्त्रियों में डिम्बोत्सर्ग से एक या दो दिन पूर्व शरीर का तापमान अचानक गिर जाता है । यह विधि उन दम्पतियों के लिये उपयोगी है, जो  गर्भधारण के लिये प्रयासरत हैं । यह एक उपयोगी व सस्ती विधि है व सही जानकारी देती है । तापमान में गिरावट के साथ-साथ ओवुलेशन के अन्य लक्षण जैसे म्यूकस में परिवर्तन आदि पर भी नजर रखी जाती है । Ovulation prediction kits के प्रयोग से पूर्व इसका प्रयोग करना उचित होता है ।

  1. Ovulation prediction kits :

जब स्त्री को अपने मासिक की अवधि की जानकारी हो जाये व यह अनुमान हो जाये कि उसका ओवुलेशन कितने दिनों में होता है, तो वह इसका प्रयोग कर सकती है । इस किट के प्रयोग द्वारा स्त्री यह पता कर सकती है कि उसके शरीर में LH का स्तर कब बढ़ रहा है । और कौन-सा समय उसके लिये सबसे अधिक fertile है । यह विधि उपर्युक्त पहली विधि से अधिक उपयोगी है, क्योंकि इसके द्वारा ओवुलेशन का पता 2-3 दिन पहले लग जाता है । जिससे आपको समय मिल जाता है । और यदि आप गर्भधारण की इच्छुक हैं, तो तदनुसार प्लान कर सकती हैं ।

क्या ओवुलेशन गर्भधारण को निर्धारित करता है?

यदि आप गर्भधारण करना चाहती हैं, तो उसके लिये आप ओवुलेशन से 4-5 दिन पहले अथवा डिम्बोत्सर्ग से 24 घंटे के भीतर संभोग करें । इसका कारण यह है कि शुक्राणु चार से पांच दिन तक जीवित रहते हैं, परन्तु अण्डा केवल 24 घंटे तक ही जीवित रह सकता है । अत: इसी बीच में निषेचन व गर्भधारण हो सकता है । यदि आपने डिम्बोत्सर्ग के समय के करीब ही संभोग किया है, तो आपके गर्भधारण की संभावनाएं बढ़ जाती हैं । सामान्य रूप से फर्टाइल दम्पतियों में प्रतिमाह गर्भधारण की संभावनाएं 25 प्रतिशत होती हैं । जो स्त्रियां बिना परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करते हुए सेक्स करती हैं, उनमें से 75 से 85 प्रतिशत एक वर्ष के भीतर गर्भवती हो जाती हैं । आप अपने डिम्बोत्सर्ग अथवा ओवुलेशन का समय मालूम करके अपने गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ा सकती हैं । इस प्रकार आप डिम्बोत्सर्ग अथवा ovulation के निश्चित समय का पता करके इसका प्रयोग परिवार नियोजन के लिये भी कर सकती हैं ।

कैसे पता करें कि ओवुलेशन कब होगा व कौन सा समय सर्वाधिक fertile होगा ? :

अपने अगले मासिक की तिथि का अनुमान करें, उसमें से 12 से 16 दिन पीछे आ जायें | यही समय संभवतया आपके डिम्बोत्सर्ग का समय होगा । जिन स्त्रियों का मासिक चक्र 28 दिन का होता है, उनमें यह अधिकतर 14वें दिन होता है । इस विधि का प्रयोग करने के लिये आपको यह पता होना चाहिये कि सामान्यतः आपका मासिक चक्र कितने दिन का है । अपने ओवुलेशन का पता करने के लिये आप अपने अन्य शारीरिक परिवर्तनों का भी ध्यान रखें, जो सामान्यतः इस निश्चित समय पर होते हैं |

ओवुलेशन में शरीर में होने वाले परिवर्तन:

ओवुलेशन के दौरान महिला के शरीर में मुख्य रूप से दो परिवर्तन हो सकते हैं |

  1. सर्विकल म्यूकस में परिवर्तन :

जैसे-जैसे आपका मासिक चक्र आगे बढ़ता है व ओवुलेशन का समय पास आता है, सर्विक्स से निकलने वाले म्यूकस की मात्रा में वृद्धि होने लगती है व इसका स्वरूप बदलने लगता है । इस समय स्त्री के शरीर में एस्ट्रोजिन का स्तर भी बढ़ जाता है । यह समय स्त्री के लिये सर्वाधिक fertile होता है । इस समय म्यूकस साफ, पतला व चिकना हो जाता है । इस समय म्यूकस शुक्राणु के पोषण, सुरक्षा व उसको गति प्रदान करने में सहायक होता है, जिससे शुक्राणु आसानी से गर्भाशय व डिम्बवाहिनियों (जहां निषेचन होता है) वहां पहुंचने में समर्थ होता है व अधिक समय तक जीवित रह सकता है ।

  1. शरीर के तापमान में वृद्धि :

ओवुलेशन के बाद आपके शरीर का तापमान 0.5 से 1.6 डिग्री तक बढ़ जाता है । आप इसे अनुभव तो नहीं कर पाती हैं, परन्तु थर्मामीटर द्वारा यह अंतर देखा जा सकता है । तापमान की यह वृद्धि इंगित करती है कि आपका डिम्बोत्सर्ग अथवा ओवुलेशन हो चुका है । आपके तापमान में वृद्धि से पूर्व के तीन-चार दिन सर्वाधिक fertile समय होता है, परन्तु विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में जैसे ही वृद्धि होती है, उसके बाद के भी 12 से 24 घंटे fertile होते हैं। पेट के निचले हिस्से में दर्द : लगभग 1/5 महिलायें डिम्बोत्सर्ग के समय पेट के निचले हिस्से में हल्के से दर्द का अनुभव करती हैं। इस स्थिति को mittelschmerz कहते हैं । यह कुछ मिनटों से कुछ घण्टों तक रह सकता है ।

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