Peptic Ulcer – अल्सर के लक्षण, कारण एवं ईलाज |

Peptic Ulcer नामक यह रोग भी पेट सम्बन्धी अर्थात उदर सम्बन्धी बीमारी है अल्सर का अर्थ एक पेट की ऐसी परिस्थति से लगाया जाता है जब अमाशय अर्थात पेट में किसी कारणवश जैसे गैस्ट्रिक इत्यादि से जख्म हो जाता है | या फिर दूसरी स्थिति में यह भी हो सकता है की पेट एवं छोटी आंत के अग्रभाग की आंतरिक झिल्ली जिसे Lining Mucosa भी कहते हैं अपनी जगह से हट जाती है या फिर नष्ट हो जाती है | जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की Peptic Ulcer नामक इस रोग की श्रेणी में Gastric तथा duodenal Ulcer नामक बीमारियाँ अर्थात रोग आते हैं |

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Cause of Peptic Ulcer in Hindi (पेट के अल्सर के कारण):

कहा जाता है की में 1982 ऑस्ट्रेलिया के दो चिकित्सकों Barry Marshall & Robin Warren ने चिकित्सा विज्ञानं में Peptic Ulcer होने के कारणों में दुनिया के सामने एक नया तथ्य पेश किया | जिसमे उन्होंने दुनिया को यह बताया की Peptic Ulcer नामक यह बीमारी HPylori नामक बैक्टीरिया से उत्पन्न होती है । इसी तथ्य के मद्देनज़र या खोज पर उन दोनों चिकित्सकों को 2005 में नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया वर्तमान में निसंदेह तौर पर इस बीमारी का असली कारण HPylori नामक बैक्टीरिया को ही माना जाता है | इसके अलावा लम्बे वक्त तक दर्द निवारक, सूजन कम करने वाली दवाइयों का सेवन इत्यादि को भी इस रोग की उत्पति का कारण माना जाता है इन सबके अलावा कुछ निम्नलिखित कारण हैं जो Peptic Ulcer नामक इस बीमारी को बढ़ावा देने में सहायक हैं |

  • तेज मिर्च एवं मसाले वाला भोजन खाने से इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है |
  • तला हुआ गरिष्ठ भोजन खाने से भी यह रोग हो सकता है |
  • धूम्रपान एवं शराब का अधिक सेवन भी एक कारण हो सकता है |
  • चाय एवं काफी का अधिक सेवन भी एक कारण हो सकता है |
  • कत्थे वाले पान खाने की आदत एवं हर काम में जल्दबाजी भी इस बीमारी की उत्पति होने का कारण हो सकती है |
  • इसके अलावा मानसिक तनाव, चाहे वह संबंधों को लेकर हो या आर्थिक या प्रोफेशनल कारणों से हो, मानसिक तनाव का कारण जो भी हो लेकिन इससे भी Peptic Ulcer नामक इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है
  • एक अन्य तथ्य जो इस रोग के बारे में पाया गया है वह यह कि यह टाइप ए पर्सनेल्टी के पुरूषों में स्त्रियों की अपेक्षा ज्यादा पाया जाता है ।

Symptoms of Peptic Ulcer in Hindi (लक्षण):

Peptic Ulcer के कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • शुरू की अवस्था में छाती के बीच में तथा पेट के ऊपरी भाग में जलन हो सकती है |
  • इसके अलावा हल्का दर्द, बेचैनी, भारीपन, पेट फूलना या अधिक गैस का बनना इत्यादि लक्षण भी शुरुआत में दिखाई दे सकते हैं |
  • Peptic Ulcer नामक इस रोग की अवस्था बढ़ने पर रोगी को पेट में तेज दर्द शुरू हो सकता है |
  • इस रोग के रोगियों को खाली पेट दर्द ज्यादा होता है तथा कुछ खाने के बाद दर्द में राहत महसूस होती है।
  • कुछ रोगियों को दर्द के साथ उल्टी भी आ सकती है।
  • रोग बढ़ने की स्थिति में रोगी को उल्टी के साथ खून भी आ सकता है ऐसा तब हो सकता है जब अल्सर के अंदर मौजूद रक्त की नली फट जाय | Peptic Ulcer नामक इस रोग का यह एक खतरनाक लक्षण है ।

अल्सर की निरीक्षण एवं जांच:

इस रोग अर्थात Peptic Ulcer से ग्रसित रोगी का सामान्य तौर पर पेट का निरीक्षण करने से इस रोग के बारे में कुछ अनुमान लगाया जा सकता है । इस रोग से ग्रसित कुछ रोगियों को पेट के ऊपरी भाग (Epigastrium) में छूने से दर्द महसूस होता है इसके अलावा पेट में फूलावट भी महसूस हो सकती है । और अल्सर फटने की स्थिति में पेट सख्त हो सकता है तथा आंत की ध्वनि (Bowel Sounds) भी गायब अर्थात लुप्त हो सकती है।

  • Peptic Ulcer की जांच के लिए पेट का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है हालंकि पेट की अल्ट्रासाउंड जांच से सामान्य रोगी में कोई विशेष विकृति नहीं मिलती है । कुछ रोगियों में पित्त की थैली में पत्थरी इत्यादि भी पाई जा सकती है। अन्य रोगियों में अल्सर फटने की स्थिति में सोनोग्राफी द्वारा फ्री फलूयिड का पता चल सकता है। इसके अतिरिक्त यदि अल्सर में कैंसर के लक्षण आ चुके हैं तो उस स्थिति में गांठ, टयूमर, लिम्फ नोड इत्यादि का भी सोनोग्राफी से पता लगाया जा सकता है ।
  • Peptic Ulcer की जांच के लिए एंडोस्कोपी (Endoscopy) भी की जा सकती है इस प्रक्रिया में
  • एक दूरबीन की सहायता से खाने की नली, आमाशय तथा आंत के पहले भाग (डयूडिनम) की आंतरिक जांच की जाती है । इससे अल्सर है या नहीं, है यदि है तो कौन से हिस्से में तथा कितना गंभीर है, इन तथ्यों की जांच की जाती है । इसके अतिरिक्त अल्सर में से एक छोटा टुकड़ा बायोप्सी के लिए लैबोरेट्री में जांच के लिए भी भेजा जा सकता है । बायोप्सी के माध्यम से लेबोरेट्री जांच में अल्सर में Pylori बैक्टीरिया तथा कैंसर की जांच की जाती है |
  • Peptic Ulcer का पता लगाने के लिए आँतों का रंगीन एक्सरे यानिकी Barium Meal किया जा सकता है इस प्रक्रिया में रोगी को दवाई पिलाकर खाने की नली, आमाशय तथा छोटी आंत के पहले भाग (ड्यूडनम) के एक्सरे लिए जाते हैं । इसमें Spot films के द्वारा अल्सर का बारीकी से अध्ययन किया जा सकता है। डयूडीनल कैप में बदलाव की स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है।
  • मल की परीक्षा करने पर अकाल्ट (Occult) रक्त का पता लगाया जा सकता है।
  • पेट का अल्सर फटने की स्थिति में पेट का साधारण एक्सरे इस रोग के निदान में अहम भूमिका निभाता है । इसमें Diaphrogm के नीचे हवा एकत्रित होना तथा पेट में फलूयिड लेवलज का होना काफी महत्वपूर्ण संकेत है।

Peptic Ulcer Treatment in Hindi (ईलाज):

Peptic Ulcer से पीड़ित व्यक्ति अर्थात रोगी को अपनी दिनचर्या अनुशासित तरीके से बिताने की आवश्यकता होती है | अनुशासित तरीके से दिनचर्या बिताने के कुछ टिप्स निम्नवत हैं |

  • किसी भी काम को करते वक्त जल्दबाजी या हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए |
  • नियमित रूप से प्रात: की सैर करना जरुरी होता है |
  • समय पर भोजन एवं समय पर सोने की आदत डालना आवश्यक है |
  • देर तक जागने एवं देर से खाना खाने की आदत का त्याग कर देना चाहिए |
  • रात का खाना सोने के दो घंटे पहले खाना चाहिए |
  • Peptic Ulcer से प्रभावित व्यक्ति को भरपूर नींद अर्थात 6-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए |
  • किसी प्रकार की मानसिक चिंता, व्यक्तिगत संबंधों में तनाव व आर्थिक उलझनों का संभवतः व्यवहारिक हल ढूंढ़कर इनका निवारण करने की पूर्ण कोशिश करनी चाहिए |
  • इस रोग से ग्रसित व्यक्ति को चाहिए की वह उन दवाओं का सेवन बंद कर दे जो अल्सर को बढ़ावा देने में सहायक हों |
  • तेज मिर्च मसाले, तला हुआ या अधिक बसा वाला भोजन इसके अलावा अधिक चाय का सेवन, काफी, शराब इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए |

दवाइयों द्वारा अल्सर का ईलाज:

यदि रोगी का रोग अधिक बढ़ चुका है तो ऐसी स्थिति में चिच्कित्सक द्वारा ऐसे रोगी को இ एण्टासिड दवाईयां उपयोग के लिए परामर्शित की जा सकती हैं | जिनमे मुख्य रूप से Digene Tablet एक दिन में तीन से चार बार, Digne Gel 15 Ml, इसके अलावा अन्य दवाइयां जैसे Gelusil Tablet, Gelusil ge, polycrol Forte gel, Ulgel इत्यादि को डॉक्टर द्वारा परामर्शित किया जा सकता है |

पेट में एसिड बनने से रोकने की दवा के रूप में h2 blockers मेडिसिन जैसे की ranitidine जिन्हें व्यवसायिक नामों के तौर पर Tab zantac, Tab Aciloc, Histac, Tab Rantac, tab Uitac से जाना जाता है |

इसके अलावा proton pump inhibitors medicine जैसे Omeprozol Capsule दिन में एक बार Omeprozol की दवाइयां जो बाज़ार में उपलब्ध हैं उनमे Ocid, omez, omizac इत्यादि सम्मिलित हैं | Panta prozole की दवाइयां जो बाज़ार में उपलब्ध हैं उनमे pantodac, pantocid, pantop इत्यादि मौजूद हैं |  proton pump inhibitors medicine के अनुभाग Robeprozole में Razo, Rablet, Veloz, happi इत्यादि दवाएं व्यवसायिक नामों से उपलब्ध हैं |

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की Peptic Ulcer नामक इस बीमारी के होने का मुख्य कारण H Pylori नामक एक वैक्टीरिया है यदि किसी रोगी में H Pylori बैक्टीरिया की पुष्टि हो जाती है तो निम्न दवाइयों के माध्यम से इसका इलाज किया जा सकता है | इसका दवाओं द्वारा ईलाज करने के लिए चिकित्सक के पास विभिन्न प्रकार के कॉम्बिनेशन जैसे Triple Therapy, Dual Therapy इत्यादि उपलब्ध रहते हैं |

  • Triple Therapy के अन्तरगत चिकित्सक द्वारा Omeprozole के साथ Clarilhromycin और Amoxicilin निर्धारित मात्रा के आधार पर दी जा सकती हैं |
  • Dual Therapy में Peptic ulcer का ईलाज करने के लिए Omeprozole के साथ  Amoxicilin निर्धारित मात्रा के आधार पर दी जा सकती हैं |

इन सबके बावजूद यदि किसी कारणवश Peptic Ulcer से ग्रसित रोगी दवाइयों से भी ठीक नहीं हो पाता या अल्सर फट जाता है तो शल्य चिकित्सा अर्थात सर्जरी की आवश्यकता हो सकती  है। ऐसी स्थिति में रोगी या उसके सम्बन्धियों को किसी कुशल सर्जन से तुरंत संपर्क स्थापित करना चाहिए । रोगी के आपरेशन की विधि तथा समय, विभिन्न जांचों की रिपोर्ट के आधार पर सर्जन द्वारा ही तय किया जाता है । अल्सर में से खून की उल्टी होना (Haemetemis) तथा अल्सर का फटना (Peptic Perforation) दोनों ही स्थितियों में Peptic Ulcer से ग्रसित रोगी की  स्थिति बेहद नाजुक होती है। उचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध न होने की अवस्था में रोगी की मौत भी हो सकती है । Peptic Ulcer में अधिक देरी करने से अच्छी चिकित्सा सेवा करने के बावजूद भी रोगी को बचा पाना मुशिकल हो जाता है। अत: रोग के शुरू की अवस्था में ही रोग के लक्षणों को पहचाना जाना चाहिए तथा उचित ईलाज करवाना चाहिए कहने का आशय यह है की इमरजेंसी का इन्तजार नहीं करना चाहिए |

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