पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए और क्या परहेज करना चाहिए ।

पेट के अल्सर की बात करें तो यह पाचन सिस्टम से जुड़ा हुआ एक विशेष रोग होता है । इस रोग में सम्बंधित व्यक्ति के पेट में, खाने की नाली में या छोटी आंत के शुरू के हिस्से जिसे ड्यूडीनम कहा जाता है में जख्म हो जाते हैं । जिस कारण रोगी को काफी परेशानियाँ होने लगती हैं। यही कारण है की पेट के अल्सर में खान पान का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है ताकि पेट के अन्दर हुए जख्म खान पान के कारण और न बढ़ें । आज हम हमारे इस लेख के माध्यम से पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं के बारे में वार्तलाप करेंगे लेकिन उससे पहले एक नज़र इसके कारणों एवं लक्षणों पर भी डाल लेना बेहद जरुरी है।

पेट के अल्सर के कारण:

पेट के अल्सर के कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं।

  • अधिक मानसिक तनाव होने के कारण भी इस रोग की उत्पति हो सकती है।
  • चिंता, क्रोध या परेशानियों में घिरे रहने से भी यह हो सकता है ।
  • अनियंत्रित आहार विहार करना भी एक कारण हो सकता है ।
  • मिर्च मसालेदार भोजन का अत्यधिक सेवन करने से भी यह हो सकता है।
  • शराब, बीड़ी, सिगरेट इत्यादि नशीलों चीजों का सेवन करना।
  • चाय, कॉफ़ी जैसे उत्तेजक पदार्थों का अत्यधिक सेवन भी पेट के अल्सर का एक कारण हो सकता है।
  • ज्यादा गरम एवं ठण्डी चीजों का अधिक सेवन करना।
  • दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन करने से भी यह स्थिति पैदा हो सकती है।

पेट के अल्सर के लक्षण:

  • छाती एवं नाभि के उपरी भाग में खाली पेट या भोजन के बाद जलन हो सकती है।
  • दर्द भी हो सकता है ।
  • बैचैनी एवं उल्टी करने की इच्छा हो सकती है ।
  • उल्टी होने पर रोगी को आराम मिल सकता है ।
  • खून की उल्टियाँ भी हो सकती है ।
  • आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है और शौंच करते समय काला मल निकलना भी पेट के अल्सर का एक लक्षण हो सकता है ।

पेट के अल्सर में क्या खाना चाहिए

पेट के अल्सर में क्या खाएं क्या नहीं
  • भोजन एक साथ बहुत ज्यादा न करके थोड़ा थोड़ा करके 5-6 बार में करने की आदत डालें।
  • प्रत्येक दिन 7-8 कप ठंडा दूध पी सकते हैं लेकिन ध्यान रहे इसे भी एक साथ नहीं बल्कि घूँट घूँट करके 7-8 बार में अलग अलग समय पर पीयें ।
  • पेट के अल्सर के रोगी को साबूदाना खिचड़ी, चावल, मूंग की दाल, टोस्ट, बिस्कुट,चपाती, दलिया, दूध, मक्खन, मलाई इत्यादि लेना चाहिए।
  • फलों में पका केला, अंगूर, सेब खाए जा सकते हैं इसके अलावा गाजर का मुरब्बा भी लाभकारी होता है ।
  • रोगी को प्रोटीनयुक्त पदार्थों जैसे अंडा, पनीर, दाल इत्यादि का सेवन करना चाहिए।

पेट के अल्सर में क्या न खाएं (परहेज):

  • ज्यादा गरम एवं ज्यादा ठन्डी वस्तुओं के सेवन से बचें।
  • एक बार में ही अधिक मात्रा में भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • भोजन यदि गरम हो तो उसे जल्दी जल्दी खाने की कोशिश न करें ।
  • ध्यान रहे लाल मिर्च, हरी मिर्च, मसाले से भरपूर चटपटी सब्जी, इमली, छाछ इत्यादि का अधिक सेवन न करें ।
  • मदिरा एवं चाय कॉफ़ी का सेवन न करें।
  • दूध का सेवन भी थोड़ा थोड़ा करके करें अर्थात एक बार में एक कप से अधिक दूध न पीयें ।
  • तली एवं गरिष्ठ खाद्य पदार्थों का परहेज करें ।

पेट के अल्सर में क्या करें

  • भोजन करते वक्त किसी प्रकार का तनाव न लें और भोजन आराम से चबा चबाकर करें ।
  • पेट के अल्सर के रोगी को शारीरिक एवं मानसिक रूप से आराम की आवश्यकता होती है ।
  • तनाव एवं चिंता को अपने पास न फटकने दें दोस्तों के बीच रहें हँसें और तनाव को दूर भगाएं ।
  • यदि घर के बाहर होने पर पेट में जलन होने लग जाय तो दो तीन बिस्कुट खा सकते हैं ।
  • शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग करने की आदत बनायें ।

पेट के अल्सर में क्या न करें

  • बहुत देर तक खाली पेट न रहें अर्थात ऐसी स्थिति न आने दें की आपको ज्यादा देर तक खाली पेट रहना पड़े।
  • व्रत एवं उपवास करना छोड़ दें ।
  • मानसिक तनाव बिलकुल न लें ।
  • रात को देर तक जागने की आदत न बनायें ।
  • पेट के अल्सर के रोगी को दर्द निवारक दवाएं अपने मन से नहीं खानी चाहिए ।
  • दिन में सोने की आदत नहीं डालनी चाहिए ।
  • काली चाय का परहेज करें अर्थात काली चाय न पीयें ।

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