डिलीवरी के बाद महिलाओं में होने वाले शारीरिक परिवर्तन

डिलीवरी के बाद महिलाओं के शरीर में अनेकों परिवर्तन हो सकते हैं | गर्भावस्था व शिशुजन्म के दौरान गर्भस्थ महिला के शरीर में बहुत सारे शारीरिक परिवर्तन होते हैं । जन्म के तुरंत बाद भी महिला कुछ और परिवर्तनों का अनुभव कर सकती हैं । महिला का गर्भाशय सिकुड़ना प्रारंभ हो जाता है व धीरे-धीरे यह अपने पहले वाली स्थिति में आने लगता है । डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में सूजन रहती है, पीठ में दर्द रहता है व महिला को अधिक पसीना आ सकता है । ऐसी महिलाओं के लिये प्रसन्नता की बात यह है कि ये सारे शारीरिक परिवर्तन अस्थायी होते हैं और जल्दी ही महिला अपनी सामान्य शारीरिक स्थिति में वापस आ जाती हैं । लेकिन फिर भी हम नीचे कुछ ऐसे शारीरिक परिवर्तन बताये जा रहे हैं, जिनका अनुभव महिला डिलीवरी के पश्चात् यानिकी बच्चे को जन्म देने के बाद कर सकती हैं |

डिलीवरी के बाद

डिलीवरी के बाद रक्तस्राव हो सकता है  :

डिलीवरी के बाद महिला को रक्तस्राव होता है, जो प्रारंभ में गाढ़ा लाल होता है व धीरे-धीरे गुलाबी व भूरा होता जाता है । और यह स्राव बंद होते समय क्रमशः पीला, फिर सफेद हो जाता है । फिर स्वत: ही बंद हो जाता है । यह स्राव प्रारंभ में अधिक होता है, फिर धीरे धीरे हल्का होता जाता है | नॉरमल व ऑपरेशन दोनों ही प्रकार से डिलीवरी होने पर रक्तस्राव होता है । ऑपरेशन द्वारा डिलीवरी में यह रक्तस्राव अपेक्षाकृत कम होता है । यह रक्तस्राव सामान्य बात है । अत: महिला को चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु यदि महिला का डिलीवरी के बाद रक्तस्राव बहुत अधिक मात्रा में है अथवा उसमें थक्के जैसे निकलते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।

योनि व गुदा के मध्य दर्द हो सकता है  :

डिलीवरी के बाद महिला की योनि व गुदा के मध्य अर्थात् महिला के मूलाधार क्षेत्र में दर्द हो सकता है । यह दर्द प्रसव के दौरान खिंचाव कट व चीरा आदि के कारण हो सकता है । यदि महिला की  एपिसोटॉमी हुई है, तो इस स्थान पर अधिक दर्द हो सकता है, परन्तु यह जल्दी ही ठीक हो जाता है ।

डिलीवरी के बाद का दर्द :

यह दर्द गर्भाशय के संकुचन के कारण हो सकता है , जो डिलीवरी के कुछ दिन बाद शुरू हो सकता हैं । यह इस बात का संकेत होता है कि महिला का गर्भाशय सिकुड़ रहा है व अपनी पुरानी स्थिति में वापस आ रहा है । इस दर्द में आराम के लिये महिला अपने पेट की सिकाई कर सकती हैं ।

डिलीवरी के बाद स्तनों का कड़ा होना :

जब महिला के बच्चे के पोषण के लिये महिला के स्तनों से दूध का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है, तब महिला इनमें भारीपन का अनुभव करती हैं । महिला बारी-बारी से दोनों स्तनों से बच्चे को दूध पिलायें । जैसे ही महिला बच्चे को स्तनपान कराती हैं, पुन: दूध का उत्पादन प्रारंभ हो जाता है । यदि महिला के स्तन कड़े हो गये हैं, और बच्चे को अधिक दूध की आवश्यकता नहीं है अथवा दूध पर्याप्त मात्रा से अधिक मात्रा में है, तो महिला बीच-बीच में स्तनों में से कुछ दूध हाथों से दबाकर निकाल दें, जिससे महिला स्तनों के कड़ा होने से बच सकती हैं । यदि महिला स्तनपान नहीं कराती हैं अथवा किसी कारणवश नहीं करा पाती हैं, तो भी महिला स्तनों के कड़ेपन व दर्द की परेशानी हो सकती है । इस परेशानी व दर्द से बचने के लिये सुविधाजनक ब्रा पहनें व बर्फ की थैली से सिकाई करें, जिससे दूध सूख सके । स्तनों को रगड़े नहीं और न ही गर्म पानी डालें, क्योंकि इससे स्तनों को उत्तेजना मिलती है । अधिक कठिनाई होने पर डॉक्टर से सलाह लें ।

पेशाब व आंत संबंधी परिवर्तन :

डिलीवरी के बाद कुछ दिनों तक महिला का मूत्र पर संयम अथवा नियंत्रण नहीं रहता है । इसके लिये महिला को चाहिए की वह जल्दी-जल्दी अपना ब्लैडर खाली करते रहें व कीगल एक्सरसाइज करें । जैसे-जैसे ब्लैडर की मांसपेशियां सिकुड़ेंगी और मजबूत होंगी, यह असंयम स्वत: ही दूर होता जायेगा । महिला को कब्ज बवासीर का अनुभव भी हो सकता है, क्योंकि डिलीवरी की प्रक्रिया महिला की आंतों में पाचन की प्रक्रिया को धीमा कर देती है, जिसके कारण महिला कब्ज का अनुभव करती हैं । महिला के भोजन में परिवर्तन, महिला की दर्द निवारक दवाएं व लगातार लेटे रहना भी कब्ज के कारण हो सकते हैं । इसके लिये महिला भोजन में परिवर्तन कर सकती हैं । पानी व तरल पदार्थ अधिक पियें व डॉक्टर की सलाह लें ।

पोषण में परिवर्तन:

डिलीवरी के बाद महिला को यह जानकर आश्चर्य होगा कि यदि महिला स्तनपान करा रहीं हैं, तो महिला को बहुत अधिक व तेज भूख लगती है । इस समय आपको भोजन के साथ-साथ उचित पोषण की भी आवश्यकता होती है । यदि महिला स्तनपान कराती हैं, तो महिला के बच्चे का पोषण महिला द्वारा लिये गये भोजन पर निर्भर करता है । स्तनपान के लिये महिला के शरीर में पोषण की आवश्यकतायें गर्भावस्था से भी अधिक बढ़ जाती हैं । इसलिये डिलीवरी के बाद महिला को प्रतिदिन 500 अतिरिक्त कैलोरीज की आवश्यकता होती है । इस समय महिला को डाइटिंग से दूर रहना चाहिए, बिना कैलोरीज का अथवा जंक फूड नहीं खाना चाहिए व अधिक पानी पीना चाहिए |

व्यायाम में परिवर्तन: डिलीवरी के बाद व्यायाम भी महिला के लिये लाभकारी होता है । एकदम हल्के व्यायाम से प्रारंभ करें | प्रारंभ में मांसपेशियों में खिंचाव लायें व कीगल एक्सरसाइज करें | महिला  घूमना भी प्रारंभ कर सकती हैं, लेकिन डिलीवरी के बाद कोई भी व्यायाम प्रारंभ करने से पूर्व डॉक्टर की सलाह अवश्य लें । यदि महिला की डिलीवरी ऑपरेशन से हुई है, तो महिला को बहुत ध्यान रखने की आवश्यकता होती है । किसी प्रकार का बोझ न उठायें व ऐसा कोई भी कार्य न करें, जो महिला के पेट की मांसपेशियों में दबाव अथवा खिंचाव पैदा करे ।

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