पीलिया कारण, लक्षण, खानपान एवं क्या करें क्या न करें?

हालांकि इस लेख के माध्यम से हम पीलिया में क्या खाएं और क्या न खाएं विषय पर विस्तृत तौर पर वार्तालाप करने वाले हैं लेकिन उससे पहले यह समझ लेते हैं की मनुष्य शरीर या कोई अन्य जीव में  रक्त अर्थात खून एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | मानव शरीर के रक्त में जब बिलिरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा 1.10 मिलीग्राम प्रति 100 मिली लीटर से अधिक हो जाती है, तो इस स्थिति में सम्बंधित व्यक्ति की त्वचा, नाखून, आंखें पीले रंग की हो सकती हैं और उसे पीले रंग का या गहरे भूरे रंग का पेशाब भी आ सकता है | इसके अलावा पीलिया नामक इस रोग के और भी बहुत सारे लक्षण हो सकते हैं जिनका जिक्र हम नीचे करेंगे | लेकिन उससे पहले आपको यह बता देना चाहेंगे की पीलिया लीवर से सम्बंधित रोग है इसलिए इसमें खान पान का विशेष महत्व होता है यही कारण है की लोग अक्सर इन्टरनेट पर पीलिया में क्या खाएं क्या नहीं खाएं जैसे विषय पर जानकारी पाना चाहते हैं | अब तक हम समझ चुके हैं की आँखों, त्वचा, पेशाब इत्यादि का पीला हो जाना ही पीलिया कहलाता है | लेकिन कभी कभी ये लक्षण नहीं भी हो सकते हैं और LFT इत्यादि जांच कराने पर बिलीरुबिन बढ़ा हुआ आ सकता है इए में भी पीलिया में क्या खाएं या क्या नहीं? का विशेष ध्यान देना आवश्यक है | आम तौर पर पीलिया नामक यह रोग लीवर की खराबी से पैदा होता है । और तब पैदा होता है जब लीवर का पित्त आंतों में न पहुंचकर सीधे खून में मिश्रित हो जाता है, यही कारण है की सारे शरीर में पीलिया में  पीलापन छाने लगता है ।

पीलिया में क्या खाना चाहिए

पीलिया के कारण (Cause for Jaundice in Hindi):

हालांकि पीलिया एक अच्छे भले स्वस्थ व्यक्ति को भी कभी भी हो सकता है लेकिन इसके होने के कुछ संभावित कारण निम्नवत हैं |

  • पीलिया होने के पीछे मलेरिया होना भी एक कारण होता है |
  • यदि किसी मनुष्य के शरीर से किसी कारणवश अधिक रक्तस्राव हो गया हो तो उसे भी पीलिया होने की संभावना रहती है |
  • भिन्न भिन्न प्रकार के जीवाणुओं या विषाणुओं के संक्रमण से भी पीलिया हो सकता है |
  • पीलिया में क्या खाएं क्या न खाएं लोग इसलिए भी पूछते हैं क्योंकि इस रोग में थोड़े लम्बे समय तक परहेज करने की नितांत आवश्यकता होती है | और इसके होने के पीछे संक्रमित खान पान एवं संक्रमित पानी भी जिम्मेदार है |
  • रक्त का संक्रमण भी एक कारण हो सकता है |
  • पाचन क्रिया की खराबी एवं वीर्य को जरुरत से ज्यादा नष्ट करना भी एक कारण हो सकता है |
  • इसके अलावा सीए लोग जिनमे पौष्टिक भोजन का आभाव होता है उनमे भी पीलिया होने की संभावना अधिक हो जाती है |
  • तीखा चटपटी मिर्च मसालेदार खाने के शौक़ीन लोगों को भी पीलिया की बीमारी होने की संभावना अधिक होती है |
  • बहुत ज्यादा शराब का सेवन भी इस रोग को जन्म देने में सहायक है |
  • यदि किसी स्वास्थ्य कर्मी ने अनजाने या जन बुझकर किसी संक्रमित व्यक्ति को लगाये गए इंजेक्शन का उपयोग किसी स्वस्थ व्यक्ति पर कर दिया तो इससे भी यह रोग हो सकता है |

पीलिया के लक्षण (Symptoms of Jaundice in Hindi):

पीलिया के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार से है |

  • इस रोग में रोगी को कई दिनों तक बुखार बना रह सकता है |
  • रोगी को कमजोरी एवं थकन का अनुभव हो सकता है |
  • इस रोग में भूख नहीं लगती है और घी तेल से बनी चीजो को तो बिलकुल भी खाने का मन नहीं करता है |
  • रोगी का स्वभाव चिडचिडा हो जाता है |
  • रोगी को ठीक से नींद भी नहीं आती और उसके पेट में भी दर्द रहता है |
  • पीलिया से ग्रसित रोगी की आँखों, नाख़ून, त्वचा एवं पेशाब का रंग पीला हो जाता है |

पीलिया के रोगी को क्या खाना चाहिए (What to eat in Jaundice in Hindi):

अनाज जो पीलिया के रोगी को खाने चाहिए

  • चावल खा सकता है |
  • दलिया खा सकता है |
  • खिचड़ी भी खा सकता है |
  • खिचड़ी, बाजरे, जौ, गेहूं की चोकर युक्त रोटी भी खा सकता है |
  • साबूदाना की खीर |

पेय पदार्थ जो पीलिया में पीने चाहिए

  • रोगी को नारियल का पानी पीना चाहिए |
  • बार्ली, मूंग, मसूर, अरहर की पतली दाल पीनी चाहिए |
  • मूली के पत्तों का रस पीना चाहिए |
  • गन्ने का जूस या गन्ना चूसना चाहिए |
  • क्रीम निकला दूध पिया जा सकता है |
  • ताजा छाछ पीना भी फायदेमंद होता है |
  • बुखार हो तो फलों के रस में ग्लूकोज मिलाकर पीया जा सकता है |
  • हमेशा उबला, छना, क्लोरीन से स्वच्छ किया हुआ पानी ही पिएं ।
  • सुबह एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू निचोड़कर पिएं ।

पीलिया में क्या क्या सब्जियां खाएं (Vegetable list to eat in Jaundice in Hindi)

  • कच्ची मूली खाएं
  • लौकी खाएं
  • करेला की सब्जी खाई जा सकती है |
  • प्याज एवं पुदीना भी खाया जा सकता है |
  • पीलिया में फूल गोभी की सब्जी भी खा सकते हैं |
  • पालक की सब्जी
  • धनिया, मेथी, परवल
  • गाजर, लहसुन, पत्ता गोभी भी खा सकते हैं |

पीलिया में कौन कौन से फल खाएं?

  • पपीता लाभदायक होता है |
  • आंवला भी खा सकते हैं |
  • चीकू, खजूर, अंगूर भी खा सकते हैं |
  • मीठा अनार लाभदायक होता है |
  • मौसमी एवं सेब भी खा सकते हैं |
  • टमाटर, संतरा, नीबू का सेवन भी किया जा सकता है |

पीलिया में क्या न खाएं (What Not to eat in Jaundice in Hindi):

  • भारी गरिष्ठ भोजन न करें |
  • घी, तेल, मिर्च मसलों का परहेज करें |
  • ज्यादा नमकीन एवं ज्यादा खटाई वाले पदार्थों का सेवन भी न करें |
  • अचार एवं सिरका न खाएं |
  • मिठाइयों का सेवन न करें |
  • बेसन एवं मैदे से बने भोज्य पदार्थों का सेवन न करें |
  • मी, मांस मछली का परहेज कठोरता से करें |
  • सब्जियों में कचालू, अरवी, राई, हींग, गुड, चना उड़द की दाल इत्यादि देर से पचने वाले एवं गरम खाद्य पदार्थों का भी परहेज करें |
  • पीलिया में चाय, कॉफ़ी, तम्बाकू, गुटखा, मदिरा इत्यादि को बिलकुल त्याग दें |
  • बासी भोजन न खाएं और अशुद्ध पानी कदापि न पीयें |

  पीलिया के दौरान क्या करें (What to do during Jaundice in Hindi):

  • ध्यान रहे भोजन को स्वच्छ बर्तन में हमेशा ढककर रखें |
  • जब तक पीलिया पूर्ण रूप से ठीक न हो भरपूर आराम करें |
  • पीलिया में हाथों के नाखूनों को टाइम टाइम पर काटते रहें |
  • हाथों की साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखें भोजन करने से पहले एवं शौच के बाद हाथों को अच्छे ढंग से साफ़ अवश्य करें |
  • रोगी को भी साफ़ सुथरा बनाये रखें उसके बर्तनों एवं कपड़ों की नित्य सफाई करें |
  • रोगी को किसी भी प्रकार का इंजेक्शन लगाने के लिए डिस्पोजेबल सिरंजी एवं नीडल का इस्तेमाल करें |
  • पीलिया के रोगी को हो सके तो पैरों एवं हाथों के बल घर में चलना चाहिए इससे लीवर का व्यायाम होता है |

पीलिया में क्या न करें (What not to do in Jaundice in Hindi):

  • बहुत बार ऐसा होता है की व्यक्ति केवल झाड़ फूंक पर निर्भर रहता है इससे स्थिति बिगड़ भी सकती है इसलिए केवल झाड़ फूंक पर निर्भर रहना जानलेवा भी साबित हो सकता है |
  • मार्किट में ठेलों पटरियों पर मिलने वाली खुली चीजें बिलकुल भी न खाएं |
  • कोई भी फल एवं सब्जियां बिना धोये इस्तेमाल में न लायें |
  • कब्ज को दूर रखने का उपाय करें |
  • पीलिया के रोगी के कपडे, निजी बर्तन एवं जूठन इत्यादि न खाएं |
  • पीलिया में सहवास से भी परहेज करना चाहिए |
  • मेहनत वाला कार्य करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए |

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