निमोनिया के कारण लक्षण एवं ईलाज

निमोनिया नामक यह रोग लगभग सभी उम्र के लोगों में पाया जाता है  । शीत तथा बसंत काल में इस रोग के अधिक होने की संभावना होती है । यह Diptococcus Pneumonia के संक्रमण से होता है । सन् 1881 में Postucher व 1884 में Frankel ने इस जीवाणु की खोज की थी । यह प्रायः कम immidiately वाले लोगों में होता है । लम्बी बीमारी के कारण, जुकाम या Influngae के Virus के कारण जिनके श्वास मार्ग को  क्षति पहुंच गई हो उससे Lungs में Infection होकर शोथ हो जाता है।  इसी शोथ को निमोनिया  (Pneumonia) कहते हैं । सरंचना के आधार पर निमोनिया दो प्रकार Lobar Pneumonia और Interstitial Pneumonia होता है |

निमोनिया

निमोनिया होने के कारण (Cause for Pneumonia in Hindi):

  • निमोनिया वायरल वायरस के कारण भी होता हैं ।
  • Bacterial Pneumonia, PneumococcuX, Stephylococcus, H.influnza, sterptococcus इत्यादि बेक्टेरिया द्वारा होता है ।
  • यह Hstoplasmosis and coccidiodomycosis नामक फुंगी के कारण भी होता है |
  • यह Protozoa के कारण होता है ।
  • यह नासा में डालने वाले तेल Liquid Parafine आदि नासा में डालने के कारण, श्वास नली में चले जाने से भी Pneunonia होता है ।
  • Kerosine poisioning ORUT H Chemical Pheumonitis होता है । जो निमोनिया ही है |

निमोनिया के लक्षण (Symptoms of Pneumonia in Hindi):

  • निमोनिया होने पर सबसे पहले श्वास नली में इंफेक्शन हो जाता है |
  • इन्फेक्शन के बाद श्वास लेने में तकलीफ होती है ।
  • रोगी को तेज बुखार आ जाता है |
  • रोगी की साँसे तेज गति से चलने लगती हैं |
  • रोगी को छाती में दर्द का एहसास हो सकता है |
  • देखने पर नासा फूली हुई पसलियों का अंदर की तरफ धसना, Consolidation के लक्षण भी दिखाई देते हैं ।
  • छाती की जांच करने पर Creps सुनाई देते हैं ।

क्लिनिकल विशेषताएं (Clinical Features):

Pnemoiccal Pneumonia एक साल तक के बच्चों में बहुत कम पाया जाता है । Incubation Period 1 से 3 दिन है । इसमें सर्दी, सिरदर्द, खांसी, जुकाम व तेज बुखार पाया जाता है । पहले कफ कम आता है । बाद में भूरे रंग का कफ आता है । छाती में दर्द के साथ-साथ सांस लेने में कठिनाई होने लगती है । एक्सरे द्वारा इसकी जांच की जाती है । उपचार के लिए एण्टीबायोटिक व Oxygen दी जा सकती है ।

Staphylococcal Pneumonia :

यह निमोनिया प्राय छोटे बच्चों में पाया जाता है । सबसे पहले इंफैक्शन फेफड़ों में होकर सारे शरीर में Septicemia बन जाता है । विकृति के रूप में Influenza और फेफड़ों का Cystic fibrosis हो जाता है |

Staphylococcal Pneumonia के  लक्षण :

  • इसमें सबसे पहले श्वसन क्रिया प्रभावित होती है |
  • फिर रोगी को बुखार,आ जाता है |
  • सांस लेने में कठिनाई होने लगती है |
  • रोगी को भूख नहीं लगती है |
  • Septicem के कारण पेट का फूलने लगता है |
  • रोगी के पेट में दर्द इत्यादि के लक्षण के अलावा कभी-कभी Cynosis भी होता है । इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं ।

 निदान एवं ईलाज :

रोग का पता करने के लिए रोगी का एक्सरे किया जा सकता है | ईलाज के लिए रोगी को तुरंत हस्पताल में दाखिल करवाएं । ज्वर के लिए एंटीबायोटिक दवाईयां दी जा सकती हैं और ठण्डे पानी की पट्टियां माथे पर बदली जा सकती हैं । निमोनिया में पानी  की कमी को दूर करने के लिए I.V. fluid दिए जा सकते हैं । श्वासावरोध व नीलापन दूर करने के लिए आक्सीजन दी जा सकती है । अगर पस हो तब उसे निकाल कर पस की जांच करवाई जा सकती है । Pencilline, elthromycin, cloaxcillin इत्यादि दवाइयां दी जा सकती हैं ।

haemophilus influenzae pneumonia

यह निमोनिया तीन महीने से चार साल तक के बच्चों में ज्यादा पाया जाता है । H.I. अधिकतर Naropharynx होता हुआ Bloodsheais में पहुंचता है ।  इस बीमारी की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ती है तथा Naropharyngeat infection होता है ।

haemophilus influenzae pneumonia के लक्षण:

 

  • बच्चे को थोड़ा बुखार रहता है |
  • सांस लेने में कठिनाई होती है |
  • सांस का तेज गति से आना शुरू हो जाता है |
  • पसलियों के नीचे का हिस्सा अंदर की ओर दब जाता है।

उपचार:

इस प्रकार के निमोनिया में ampicllin antibiotic अच्छा काम करता है । यह 100mg से  150 mg/per kg/perday in divided doses में देना चाहिए ।

hydrocarbon pneumonia:

Kerosene फेफड़ों पर Toxic प्रभाव डालता है। यह नाड़ी तंत्र को प्रभावित करता है क्योंकि यह आंतड़ियों द्वारा कम absorb किया जाता है ।

लक्षण :

  • इसमें रोगी को खासी आती है |
  • सांस लेने में तकलीफ होती है |
  • तेज बुखार आ जाता है |
  • उल्टियाँ हो सकती है |
  • निश्चेत होना आदि लक्षण पाए जाते हैं ।
  • इस निमोनिया कभी-कभी रोगी इसके कारण कोमा में चला जाता है ।

उपचार :

मरीज को उल्टी नहीं करवानी चाहिए । मरीज का पेट साफ नहीं करना चाहिए । मरीज को आक्सीजन देना चाहिए । (stomach wash) और हालत के अनुसार ट्रीटमेंट दें ।

streptococcus pneumoniae:

इस निमोनिया में इंफैक्शन प्रायः Measler influnga के बाद ही होता है। Tracheobranchial mucuso में अल्सर हो जाते हैं । lynpnode सूज जाती है ।  सर्दी लगना, बुखार, सांस का तेज चलना, सांस लेने में कठिनाई, रक्तयुक्त बलगम आना इत्यादि इसके लक्षण हैं । दवाइयों द्वारा इसका ईलाज eg. pencillin 5 lac to 10 lac unit im (आईएम) देकर किया जाता है ।

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