प्राकृतिक वेगों को रोकने से शरीर को होने वाले नुकसान.

प्राकृतिक वेगों को रोकना अति हानिकारक साबित हो सकता है | हमारे शरीर में विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान या बाद में तरह-तरह के व्यर्थ के अंश मल, मूत्र इत्यादि पैदा होते हैं जिन्हें इस लेख में प्राकृतिक वेगों की संज्ञा डी गई है । क्योंकि मल मूत्र इत्यादि को शरीर से बाहर निकालने के लिए वेग निर्मित होते हैं । इन वेगों की अनुभूति होते ही जीवधारी को इनका तत्काल विसर्जन कर देना चाहिए, ताकि शरीर स्वस्थ और निर्विकार बना रहे, लेकिन अक्सर देखा गया है की अनेक लोग अपने मल, मूत्र, अपानवायु इत्यादि के वेगों को किसी शर्मिंदगी या अपने आलस्य के कारण रोके रहते हैं । ऐसे लोगों को हम बता देना चाहेंगे की उनके लिए ऐसा करना उनके स्वास्थ्य की दृष्टी से बेहद हानिकारक सिद्ध हो सकता है । आज हम इस लेख के माध्यम से प्राकृतिक वेगों को रोकने से होने वाले नुकसान के बारे में जानने की कोशिश करेंगे | ताकि इनका अध्यन करने के बाद कोई भी व्यक्ति इन्हें जान बुझकर रोकने की कोशिश कदापि न करे |

प्राकृतिक वेगों को रोकने के नुकसान

प्राकृतिक वेगों को रोकने के नुकसान:

जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में बता चुके हैं की विभिन्न प्रक्रियाओं के दौरान शरीर में भिन्न भिन्न प्राकृतिक वेगों की उत्पति होती है | इसलिए आगे इस लेख में हम किस-किस वेग को रोकने से क्या-क्या नुकसान होते हैं की विस्तृत जानकारी देने वाले हैं | तो आइये जानते हैं कौन से वेग को रोकने से क्या स्वास्थ्य की दृष्टी से क्या नुकसान हो सकते हैं |

 अपानवायु या पाद को रोकने के नुकसान:

  • पाद को रोकने से सिर दर्द हो सकता है |
  • पेट फूलने की समस्या हो सकती है |
  • मल, मूत्र की रुकावट हो सकती है |
  • पेट में दर्द हो सकता है |
  • आंखों में भारीपन आ सकता है |
  • बिना कुछ काम धाम अर्थात श्रम किये थकान लग सकती है |
  • शरीर में कहीं भी दर्द हो सकता है |
  • हृदय की कार्यशैली पर दुष्प्रभाव हो सकता है |
  • नज़र में कमी या विकृति, भूख न लगने जैसी इत्यादि समस्याएं पैदा हो सकती हैं |

 मल, मूत्र का वेग रोकने के नुकसान:

  • प्राकृतिक वेगों में मल का वेग रोकने से सिर और पक्वाशय में दर्द होना शुरू हो सकता है |
  • पिंडलियों में दर्द, ऐंठन, का आभास हो सकता है |
  • प्रतिश्याय के अलावा वायु एवं मल का रुकना इत्यादि समस्याएं पैदा हो सकती हैं |
  • मूत्र के वेग को रोकने से शरीर में टूटन की सी पीड़ा महसूस हो सकती है |
  • शिश्न व मूत्राशय में दर्द की अनुभूति हो सकती है |
  • मूत्रमार्ग में वेदना, पथरी इत्यादि भी हो सकती है |
  • प्राकृतिक वेगों में मूत्र नामक वेग को रोकने से पेट के निचले भाग में शोथ और पीड़ा होने के अलावा | पेशाब में रुकावट इत्यादि कष्ट हो सकते हैं ।

छींक रोकने के नुकसान:

  • प्राकृतिक वेगों में छींक का वेग रोकने से सिर में भारीपन, दर्द, आधा सीसी का दर्द हो सकता है |
  • इंद्रियों में दुर्बलता हो सकती है |
  • चेहरे का पक्षाघात हो सकता है |
  • तथा शरीर में अकड़न भी पैदा हो सकती है।

वीर्य के वेग को रोकने के नुकसान:

  • वीर्य के वेग को रोकने से पौरुष ग्रंथि, शुक्राशय, शुक्र प्रणाली व अंडकोश में पीड़ा हो सकती है |
  • इंद्रिय में जलन के साथ दर्द का एहसास हो सकता है |
  • अंडकोश में सूजन हो सकती है |
  • पेशाब रुक-रुक कर आ सकता है |
  • शरीर टूटने का सा एहसास हो सकता है |
  • अंगड़ाइयां, पथरी और नपुंसकता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं |

नींद के वेग को रोकने के नुकसान:

  • प्राकृतिक वेगों में नींद के वेग को रोकने से आंखों में भारीपन हो सकता है |
  • जंभाई आ सकती है |
  • आलस्य एवं शरीर टूटने की सी पीड़ा हो सकती है |
  • तंद्रा, आंखों में जलन हो सकती है |
  • सिर का भारी होना एवं उसमे दर्द भी हो सकता है |

 प्यास का वेग रोकने के नुकसान:

  • प्यास का वेग रोकने से चक्कर आ सकते हैं |
  • मुंह और कंठ सूख सकता है |
  • उत्साह कम होकर कमजोरी महसूस हो सकती है |
  • थकावट, भ्रम, अवसाद, हृदय रोग की उत्पत्ति हो सकती है ।

डकार रोकने के नुकसान:

  • प्राकृतिक वेगों में डकार का वेग रोकने से छाती में जकड़न हो सकती है |
  • हिचकी, भोजन में अरुचि हो सकती है |
  • पेट में गैस भी हो सकती है |
  • शरीर में कंपन, हृदय में भारीपन आदि समस्याएं हो सकती हैं ।

अन्य प्राकृतिक वेगों को रोकने के नुकसान:

  • प्राकृतिक वेगों में खांसी या श्वास का वेग रोकने से यह समस्या बढ़ सकती है | इसके अलावा हृदय पीड़ा, घबराहट तथा श्वास रोग की आशंका भी बढ़ जाती है ।
  • उलटी के वेग को रोकने से शीतपित्त, कंडू, सूजन, जी घबराना, मिचलाहट, एवं हिचकी, खांसी, श्वास, नेत्र रोग, विसर्प इत्यादि जैसी बीमारियां हो सकती हैं ।
  • प्राकृतिक वेगों में आंसुओं का वेग रोकने से नेत्र, सिर और हृदय में दर्द हो सकता है, और जुकाम, भोजन में अरुचि, भ्रम, शरीर में भारीपन इत्यादि समस्याएं पैदा हो सकती हैं ।
  • भूख का वेग रोकने से शरीर कमजोर हो सकता है, शरीर में दुबलापन, चक्कर आना, रक्त की कमी, लीवर की खराबी, शरीर टूटना, अरुचि, अवसाद, भ्रम इत्यादि विकार पैदा हो सकते हैं ।
  • प्राकृतिक वेगों में जंभाई के वेग को रोकने से अंगों में सिकुड़न, आक्षेप, हाथ-पैरों में कंपन, शरीर का झुकना, भारीपन इत्यादि समस्याएं पैदा हो सकती हैं |

उपर्युक्त प्राकृतिक वेगों के रोकने के नुकसान से स्पष्ट है की इन्हें किसी भी व्यक्ति को रोकना नहीं चाहिए |

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