गर्भधारण से पहले देखभाल क्या क्या ध्यान रखना है जरुरी.

गर्भधारण से पहले देखभाल की जानकारी देने से पहले यह बता देना चाहेंगे की गर्भावस्था एक महत्वपूर्ण अवस्था व स्त्री के जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव भी है । यदि आप अपनी गर्भावस्था के विषय में योजना बना रही हैं, तो गर्भधारण करने से पहले आपको अपने स्वास्थ्य के विषय में समुचित ध्यान रखना होगा । तभी आप गर्भावस्था के दौरान अपने व अपने बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित कर सकती हैं । यदि आप गर्भधारण करने से पूर्व अपनी पर्याप्त देखभाल करती हैं, तो यह आपकी पूरी गर्भावस्था का आधार बनता है व पूरी गर्भावस्था के लिये भी सहायक होता है । यदि आप मां बनना चाहती हैं, तो गर्भधारण से पहले अपनी डॉक्टर से संपर्क करें । डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, डाइट, जीवन शैली व आपके द्वारा प्रयोग किये जा रहे परिवार नियोजन के तरीकों के बारे में पूछते हैं । डॉक्टर पिछली गर्भावस्था व परिवार के विषय की भी जानकारी लेते हैं । आप डॉक्टर को सारी बातें साफ और स्पष्ट तरीके से बता सकती हैं । यह आपकी स्वस्थ गर्भावस्था व स्वस्थ बच्चे के लिये बेहद आवश्यक होता है ।

गर्भधारण से पहले

गर्भधारण से पहले अपनी उम्र देख लें :

किसी भी महिला को गर्भधारण से पहले अपनी उम्र का ध्यान अवश्य रखना चाहिए क्योंकि एक स्त्री के लिये आयु के 15-45 वर्ष उत्पादक माने जाते हैं अर्थात् इस आयु में स्त्री में प्रजनन क्षमता मौजूद रहती है । परन्तु वास्तव में किशोरावस्था में लड़की का शरीर गर्भावस्था के लिये तैयार नहीं होता है, अतः कई खतरों की संभावनाएं होती हैं । इसी प्रकार 35 वर्ष की आयु के पश्चात् भी गर्भधारण में अनेकों जटिलताएं सामने आ सकती हैं । इसलिए उम्र के हिसाब से सोच समझकर ही गर्भधारण की योजना बनायें |

गर्भधारण से पहले परिवार की हेल्थ हिस्ट्री का जायजा लें (Family health history) :

कुछ स्थितियां परिवार में बार-बार पैदा हो सकती हैं । जैसे कि आपके परिवार में, नजदीकी रिश्ते में कोई बीमारी है, तो आपको भी उस बीमारी के होने की संभावना हो सकती है । उदाहरण के लिये आपसे पूछा जाता है कि क्या आपके परिवार में किसी को शुगर, उच्च रक्तचाप इत्यादि तो नहीं था अथवा सिजेरीयन डिलीवरी का इतिहास रहा है? कुछ बीमारियां आनुवांशिक होती हैं, इन्हें genetic disorders कहते हैं । आपकी आयु व पारिवारिक इतिहास के आधार पर आपको जैनेटिक काउन्सिलिंग (genetic counselling) भी दी जा सकती है । इसमें आपकी मीटिंग ऐसे व्यक्ति के साथ होती है, जो जैनेटिक्स में विशेषज्ञ होता है । यह आपके जन्मजात दोष युक्त बच्चे के जन्म की संभावनाओं का पता लगाने में आपकी सहायता करता है । इसके लिये आपके पूरे पारिवारिक इतिहास की आवश्यकता होती है । कुछ मामलों में आपको शारीरिक जांच व टेस्ट की भी आवश्यकता पड़ सकती है । गर्भधारण से पहले कुछ genetic disorders के लिये जांच भी की जा सकती है, जैसे mental retardation इन मामलों में गर्भधारण से पूर्व ही माता पिता की जांच यह पता करने के लिये की जाती है कि क्या उनकी असामान्यता उनके बच्चों में भी जाने की संभावना तो नहीं है? ऐसी बीमारियां जिनके लिये टेस्ट उपलब्ध हैं, वे निम्नलिखित हैं |

  • Canavan disease
  • Cystic fibrosis Fragile X (a cause of mental retardation)
  • Sickle cell disease
  • Tay-Sachs disease

गर्भधारण से पहले पिछली गर्भावस्था को भी ध्यान में रखें :

गर्भधारण से पहले पिछली गर्भावस्था को भी ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि  यदि आपको पिछली गर्भावस्था में कोई समस्या रही हो, तो उसकी पुनरावृत्ति भी हो सकती है । इसीलिये आप तभी गर्भधारण करे जब आप उस समस्या से निबटने के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से तैयार हों | डॉक्टर आपसे आपकी पिछली गर्भावस्था के बारे में जानकारी लेते हैं । यदि आपको पूर्व में एक से अधिक बार गर्भपात हुआ हो अथवा आपके पहले बच्चे में कोई जन्मजात दोष है, तो डॉक्टर उसका कारण जानने के लिये पूरी जांच की सलाह देते हैं ।

अपनी शारीरिक व मेडिकल स्थिति को भी ध्यान में रखें (Medical conditions) :

कुछ स्त्रियों को मेडिकल समस्यायें होती हैं, जैसे- शुगर, उच्च रक्तचाप व कार्डियोवस्क्युलर इत्यादि समस्यायें होती हैं । ये समस्यायें स्त्री व भूण दोनों के लिये खतरा पैदा कर सकती हैं । ऐसी स्थिति में डॉक्टर गर्भधारण से पहले आपके उपचार के बारे में पूछते हैं । आपकी इन समस्याओं के कारण आपको गर्भावस्था के दौरान विशेष देखभाल की आवश्यकता पड़ सकती है । आपके उपचार में भी परिवर्तन किया जा सकता है । यदि आपको कोई शारीरिक समस्या है, तो गर्भधारण से पहले उसे नियंत्रित करने का प्रयास करें । ऐसा करना आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिये अच्छा होगा । उदाहरण के लिये, यदि किसी स्त्री का ब्लड-शुगर काफी बढ़ा हुआ है, तो उसके बच्चे में जन्मजात दोष की संभावना रहती है । अत: ऐसी स्थिति में, गर्भधारण से पहले और गर्भावस्था के दौरान, उचित भोजन व व्यायाम द्वारा शुगर को नियंत्रण में रखते हुए बच्चे के स्वस्थ रहने की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है । यदि आपको ऐसी कोई समस्या है, तो परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करें व गर्भधारण से पूर्व अपने डॉक्टर की सलाह लें । यदि आप किसी प्रकार की दवाएं ले रही हैं, तो भी डॉक्टर को बता दें, क्योंकि यह आपके भूण पर अपना प्रभाव डाल सकती हैं ।

गर्भधारण से पहले इन्फेक्शन व टीकाकरण :

इन्फेक्शन मां व बच्चे दोनों के लिये नुकसानदायक होते हैं । गर्भावस्था के दौरान कुछ इन्फेक्शन्स भ्रूण में गंभीर जन्मजात दोष व बीमारी पैदा कर सकते हैं । कुछ इन्फेक्शन्स से टीकाकरण द्वारा बचा जा सकता है । यदि आपने measles, mumps and rubella आदि के लिये टीका लगवाया है, तो अपने डॉक्टर को बता दें । यदि आपने गर्भवती होने से पूर्व टीका लगवा लिया है, तो यह भविष्य में आपके बच्चे की भी रक्षा करता है, परन्तु इस टीके व गर्भधारण के बीच तीन माह का समय होना चाहिये । अतः टीका लगवाने के बाद तीन माह तक परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करें । गर्भधारण से पहले स्त्री को अपने जीवन के reproductive years में निम्नलिखित टीके लगवाने चाहिये व उन्हें अपडेट करना चाहिये |

  • Tetanus-diphtheria booster (every 10 years)
  • Measles, mumps, rubella (once if not immune)
  • Chicken pox (once if not immune)
  • Hepatitis A vaccine
  • Hepatitis B vaccine
  • Influenza vaccine Lyme disease Pneumococcal vaccine

टीके लगवाने के संबंध में अपने डॉक्टर की सलाह भी ले लेनी चाहिये । इन्फेक्शन, जो सेक्स के द्वारा स्थानान्तरित होते हैं अथवा sexually transmitted diseases (STDs) भी गर्भावस्था के दौरान हानिकारक होते हैं । कुछ sexually transmitted diseases आपके गर्भधारण की क्षमता पर भी प्रभाव डालती हैं । ये आपके बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं । कुछ STDs निम्न हैं |

  • Chlamydia
  • Gonorrhea
  • Genital herpes
  • Syphilis
  • Human immunodeficiency virus (HIV)

परिवार नियोजन के साधनों, जैसे कण्डोम व spermicides द्वारा कुछ STDs के खतरे को कम किया जा सकता है । जब स्त्री गर्भधारण को नियोजित करती है, तब STDs की संभावना व खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि तब स्त्री परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग नहीं करती है । यदि स्त्री का सहवास एक से अधिक लोगों के साथ होता है, तो भी STDs का खतरा बढ़ जाता है । यदि आपको ऐसा लगता है कि आपको STD है, तो आप तुरंत टेस्ट करायें व इनका तुरंत उपचार करायें । आपके पति का उपचार भी आवश्यक है । जब तक आपका उपचार पूरा न हो जाये, तब तक आप संभोग न करें । HIV का इन्फेक्शन मां व बच्चे दोनों के लिये हानिकारक है । प्रारंभिक अवस्था में उपचार इन्फेक्शन को भूण में जाने से रोकने में सहायक होता है । इसीलिये यद्यपि आपमें HIV के कोई लक्षण नहीं होते हैं, तो भी डॉक्टर HIV की जांच करते हैं ।

गर्भधारण से पहले जीवन शैली (Life style) :

गर्भधारण से पहले  डॉक्टर आपसे आपकी जीवन शैली के विषय में भी पूछ सकते हैं । जैसे आपका व्यवहार, आपकी आदतें, शौक आदि के बारे में पूछ सकते हैं । इसके अतिरिक्त यदि आप काम करती हैं? तो आपका कार्य क्षेत्र कैसा है? वहां आप किन-किन वस्तुओं के संपर्क में आती हैं व किन वस्तुओं से आपको क्या हानि हो सकती है? आपके घर व कार्यक्षेत्र की ऐसी चीजें, जो आपके गर्भ को प्रभावित कर सकती हैं । क्या आप हॉट टब आदि का प्रयोग अधिक तो नहीं करती हैं? आपका वजन आवश्यकता से अधिक अथवा कम तो नहीं है? आपके घर में घरेलू हिंसा आदि का वातावरण तो नहीं है । अधिक तनाव का वातावरण भी आपके व आगे आने वाले बच्चे के लिये हानिकारक हो सकता है ।

गर्भधारण से पहले भोजन व पोषण (Diet & Nutrition) :

गर्भधारण से पहले महिला या आप क्या भोजन लेती हैं?  इससे काफी फर्क पड़ता है चिकित्सक आपको गर्भधारण करने के लिए निम्नलिखित में परिवर्तन की सलाह दे सकते हैं |

  • आपका वजन
  • विटामिन व फूड सप्लीमेन्ट्स का प्रयोग
  • आपकी भोजन की आदतें, शाकाहारी अथवा व्रत रखने वाली आदतें ।
  • आपके भोजन में होने वाली कमी ।

यदि आप मां बनने की योजना बना रही हैं, तो आपको एक healthy weight प्राप्त करना चाहिये । आपका वजन न तो बहुत कम होना चाहिये और न ही बहुत अधिक होना चाहिये । अत: आपको उचित वजन के लिये अपनी डाइट को नियोजित करना चाहिये । आपको पर्याप्त पोषण तो लेना चाहिये, परन्तु कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिये, जैसे कि क्या आप विटामिन ए व डी का आवश्यकता से अधिक प्रयोग तो नहीं कर रहीं है? कैफीन के अधिक प्रयोग से बचना चाहिये । आपके जीवन में संतुलित भोजन आपके स्वास्थ्य का आधार होता है । क्योंकि गर्भावस्था से पहले अथवा उसके दौरान आप जो भी खाती हैं, वह आपके बच्चे के स्वास्थ्य में सहायक होता है व उसका आधार होता है । एक स्त्री को सामान्यत: प्रतिदिन 2200 कैलोरीज की आवश्यकता होती है, लेकिन जब आप गर्भवती होती हैं, तब आपको अपने भूण के विकास व उसके स्वास्थ्य के लिये प्रतिदिन 300 अतिरिक्त कैलोरीज की आवश्यकता होती है ।

गर्भधारण से पहले फोलिक एसिड (Folic acid) :

फोलिक एसिड neural tube defects के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है । इसी कारण U.S. Public Health Service का सुझाव है कि गर्भ धारण करने वाली आयु की स्त्रियों को प्रतिदिन 0.4 mg फोलिक एसिड लेना चाहिये । यदि भोजन में आप पर्याप्त मात्रा में फोलिक एसिड नहीं ले सकती हैं, तो आप सप्लीमेन्ट्स के रूप में ले सकती हैं । गर्भवती स्त्री को गर्भावस्था के तीन महीनों तक प्रतिदिन 0.4 mg फोलिक एसिड लेना चाहिये । जिन स्त्रियों के spine or skull defect से युक्त बच्चा पूर्व में हुआ हो, उनके अगले बच्चे में भी यह कमी हो सकती है । ऐसी स्त्रियों को अधिक मात्रा में फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है । ऐसी स्त्रियों को प्रतिदिन 4 mg फोलिक एसिड की आवश्यकता होती है । ऐसी स्त्रियों को गर्भधारण से पहले से गर्भावस्था के तीन महीनों तक फोलिक एसिड का सेवन करना चाहिये । उनको फोलिक एसिड अलग से लेना चाहिये, मल्टी विटामिन के पार्ट के रूप में नहीं ।

गर्भधारण से पहले व्यायाम :

अच्छा स्वास्थ्य उचित भोजन व व्यायाम दोनों पर निर्भर करता है । यदि आप गर्भधारण से पहले  फिटनेस का ध्यान रखती हैं, तो आपकी गर्भावस्था सुविधाजनक रहती है । गर्भावस्था के दौरान आपका व्यायाम आपके स्वास्थ्य व इस बात पर निर्भर करता है कि आप गर्भधारण से पूर्व कितनी ऐक्टिव रही हैं । तैरना व घूमना अच्छा व्यायाम है । जोगिंग व साइकिल चलाने का व्यायाम आप गर्भावस्था में भी कर सकती हैं, परन्तु यह आपकी गर्भावस्था पर निर्भर करता है । अतः गर्भावस्था में किसी भी व्यायाम को करने से पूर्व डॉक्टर की सलाह ले लें । यदि आप अपना वजन कम करना चाहती हैं, तो इसके लिये गर्भधारण से पूर्व प्रयास करें और फिर शिशुजन्म के बाद । गर्भावस्था के दौरान वजन कम करने का प्रयास न करें ।

गर्भधारण से पहले पर्यावरण (Environment) :

यदि आप गर्भवती हैं, तो आपके घर व कार्य क्षेत्र के कुछ पदार्थ भी आपको व बच्चे को हानि पहुंचा सकते हैं । ये भूण का विकास रोक सकते हैं । साथ ही ये शारीरिक व मानसिक दोष भी पैदा कर सकते हैं । कुछ जॉब्स में रेडियेशन का प्रयोग होता है । एक्सरे में रेडियेशन का प्रयोग होता है, जो बीमारियों के डाइग्नोसिस के लिये आवश्यक होता है । उच्च स्तर पर किसी प्रकार के रेडियेशन के संपर्क में रहने से स्त्री व पुरूष दोनों की फर्टिलिटी पर प्रभाव पड़ता है । ये भ्रूण को भी हानि पहुंचा सकते हैं । छाती के एक्सरे में प्रयुक्त मात्रा फर्टिलिटी व भूण को हानि नहीं पहुंचाती है । यदि आपको अन्य एक्सरे जैसे दांत आदि के एक्सरे की आवश्यकता हो और आप गर्भवती हों या आप सोचती हैं कि आप गर्भवती हैं, तो डॉक्टर को बता दें, जिससे भ्रूण की सुरक्षा के लिये सावधानी बरती जा सके । ऐसे पदार्थ जो आपके भूण को हानि पहुंचा सकते हैं उनकी लिस्ट निम्नवत है इसलिए गर्भधारण से पहले ही इन पदार्थों का त्याग कर दें ।

पदार्थप्रयोग के कारणभूण पर प्रभाव
अल्कोहलसामाजिक कारण, आदत व निर्भरताविकास अवरुद्ध होना व

मानसिक असामान्यता

एंटीकन्वलसैन्ट्सseizure disorders व अनियमित हृदयगति के उपचार के लियेविकास अवरुद्ध होना व  मानसिक असामान्यता । विकास संबंधी असामान्यता neural tube

defects

कैंसर ड्रग्सकैंसर व psoriasis (skin disease) के उपचार के लियेगर्भपात व अन्य असामान्यताओं की संभावना बढ़ जाती है ।
आइसोट्रेटिनियनcystic acne के उपचार के लियेगर्भपात व अन्य विकास

संबंधी असामान्यताओं की

संभावना बढ़ जाती है।

लैडlead smelting, पेन्ट बनाने व उसके उपयोग, प्रिंटिंग, सैरेमिक्स आदि संबंधित उद्योग के लियेभ्रूण के स्नायु तंत्र की विकास संबंधी समस्यायें ।

 

लिथियमmanic-depressive disorders के manic part के उपचार के लिये प्रयुक्त होता है ।Congenital heart

disease हो सकती हैं ।

 

टेट्रासाइक्लीनइन्फेक्शन के लिये एंटीबायटिक के रूप में प्रयुक्त होता है।

 

tooth enamel का पूर्ण विकास नहीं होता है।

 

  • गर्भधारण से पहले या गर्भधारण के दौरान यदि आप इन सब पदार्थों के संपर्क में आते हैं, तो इन्हें अपने से दूर रखें । यदि आपको नया जॉब दिया जाये, तो यह देखें कि क्या आप रेडियेशन व केमिकल्स के संपर्क में आती हैं कि नहीं?
  • आपके जीवनसाथी की फर्टिलिटी पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है । photography, solvents, heavy metals आदि में प्रयुक्त होने वाले रसायन जैसे लैड व मरकरी या पारा और कुछ पैस्टीसाइड उनके शुक्राणुओं को नष्ट कर सकते हैं ।

अल्कोहल, तम्बाकू व ड्रग्स आदि का प्रयोग (Alcohol, Tobacco and illegal drugs) :

अल्कोहल, तम्बाकू व ड्रग्स आदि मां व बच्चे दोनों पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं । इन पदार्थों की कोई भी मात्रा ऐसी नहीं है, जो गर्भावस्था के लिये सुरक्षित मानी गयी हो । अल्कोहल व ड्रग्स शरीर को ऐसी हानि पहुंचाते हैं, जो आजीवन पीछा नहीं छोड़ती हैं । ये पदार्थ आगे चलकर बच्चे की मानसिक असामान्यता व जन्मजात दोष का कारण बन सकते हैं । इसलिए इन मादक पदार्थो का त्याग गर्भ की योजना बनाते समय यानिकी गर्भधारण से पहले ही कर देना चाहिए | सिगरेट आदि समय से पूर्व प्रसव, जन्म के समय कम वजन, मैम्ब्रेन के समय से पूर्व फटने व प्लेसैन्टा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं । ये बच्चे की अचानक मृत्यु sudden infant death syndrome (SIDS) का भी कारण बन सकते हैं । यदि आप मां बनने की योजना बना रहीं हैं, तो गर्भधारण से पहले अर्थात शीघ्र ही अल्कोहल, सिगरेट व ड्रग्स आदि का सेवन करना छोड़ दें । इसके लिये आप डॉक्टर की सहायता भी ले सकती हैं ।

गर्भधारण से पहले अन्य योजना बनाना:

गर्भावस्था के दौरान आपके जीवन व आपके घर की व्यवस्था में कई परिवर्तन अपेक्षित हो जाते हैं । इस दौरान आपको कई प्रकार की सहायता की आवश्यकता भी पड़ सकती है । इसके लिये आपको गर्भधारण से पहले ही योजना बना लेनी चाहिए । परिवार के सदस्यों से भी इस विषय में बातचीत करें । बच्चे के होने से आपके खर्च पर भी निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता है, अत: अपने खर्च को भी नियोजित कर लें । यदि आप काम करती हैं, तो गर्भधारण से पहले ही देख लें कि आपको गर्भावस्था के लिये कितनी maternity leave मिलती है । व शिशुजन्म के बाद भी आप और कितना अतिरिक्त अवकाश ले सकती हैं । गर्भावस्था वास्तव में आपके लिये बहुत महत्त्वपूर्ण अवस्था व अनुभव है । अत: गर्भधारण से पहले ही आप अपने को फिट रखें, उचित भोजन करें, हानिकारक पदार्थों से दूर रहें व डॉक्टर की सलाह लें ।

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