गर्भावस्था के महीने Pregnancy-month-by-month in Hindi.

महिलाओं के जीवन में गर्भावस्था एक सुखद अनुभव होता है इस स्थिति से भावनात्मक रूप से परिवार का हर एक सदस्य जुड़ा रहता है | क्योंकि महिला के गर्भवती होने पर परिवार का हर सदस्य कुछ न कुछ बनने वाला होता है कोई माता पिता बनने वाले होते हैं, तो कोई दादा दादी, कोई ताऊ ताई तो कोई चाचा चाची यही कारण है की किसी महिला की गर्भावस्था पूरे परिवार के लोगों के चेहरे पर खुशी लेके आती है | लेकिन गर्भावस्था के दौरान एक माँ को अपने शिशु को अपने पेट में नौ महीने तक रखना होता है इसलिए आइये जानते हैं की इन नौ महीनों में पेट में पल रहे शिशु का विकास कैसे होता है |

  1. गर्भावस्था का पहला महीना (First month) :

गर्भावस्था पहला महीना

गर्भावस्था का यह प्रथम माह वास्तव में वह समय है, जब आप गर्भवती होती ही नहीं हैं, आपका मात्र डिम्बोत्सर्ग होता है । अण्डा स्त्री के डिम्बाशय से निकलकर स्त्री की डिम्बवाहिनी नलिकाओं में, शुक्राणु द्वारा अण्डे को निषेचित (fertilize) किया जाता है । उसके 5 से 7 दिन बाद वह निषेचित अण्डा (fertilized ovum) गर्भाशय की परत से जुड़ जाता है । इस प्रक्रिया को Implantation कहा जाता है । इस समय आपके बच्चे को ब्लास्टोसिस्ट कहा जाता है । यह निषेचित अण्डा गर्भाशय में विकसित होना प्रारंभ कर देता है । इस समय इसका आकार प्रतिदिन दोगुना होता जाता है । इस अवस्था में इसे भ्रूण  कहते हैं । Implantation के बाद Placenta व Umbilical Cord का बनना प्रारंभ हो जाता है, जिसके द्वारा बच्चे को मां से पोषण व ऑक्सीजन प्राप्त होती है व उत्सर्ग बाहर निकलता है । इस समय आपका बच्चा एक थैली में रहता है, जो फ्लूइड से भरी रहती है । इस थैली को Aminiotic sac कहते हैं । यह बच्चे को बाहरी झटकों व दबाव से बचाती है | गर्भवस्था के एक सप्ताह बाद बच्चे की रीढ़ विकसित होने लगती है । बच्चे का स्नायु विकास प्रारंभ हो जाता है । आपकी गर्भावस्था के छ: सप्ताह के अंत में बच्चे का सिर व धड़ बनता है । पांचवें सप्ताह के करीब भूण में तीन पर्ते बनती हैं । बाहर की परत में मस्तिष्क स्नायु व त्वचा होती है । बीच की परत में हड्डियां, मांसपेशियां, रक्त वाहिकायें, हृदय व प्रजनन अंग होते हैं व अंदर की परत में आमाशय, लीवर, आंतें, फेफड़े, व यूरिनरी ट्रैक्ट होते हैं । आंखें आदि बनना प्रारंभ हो जाती हैं । हाथ-पैर के स्थान पर छोटी छोटी कोपलें दिखाई देने लगती हैं । हृदय भी बनता है, जो गर्भधारण के 25 दिन बाद अथवा छ: सप्ताह की आयु में धड़कना प्रारंभ कर देता है । छ: सप्ताह की समाप्ति पर आपके बच्चे की लंबाई लगभग आधा इंच व वजन लगभग एक औंस तक होता है । गर्भावस्था के प्रथम माह के दौरान आपको थकान व अनिद्रा रहती है, बार-बार पेशाब आती है, उल्टी व अपच के लक्षण रहते हैं । भिन्न चीजें खाने की तीव्र इच्छा होती है व आपके स्तनों में परिवर्तन होगा । आवश्यक नहीं है कि सभी स्त्रियों में गर्भावस्था के ये लक्षण समान हों । सभी स्त्रियों में अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं । कुछ स्त्रियों में सभी लक्षण होते हैं, कुछ में कुछ सीमित लक्षण होते हैं व कुछ में कोई भी लक्षण नहीं होते है । इस अवस्था में भावनात्मक परिवर्तन भी होते हैं । आपका मूड निरंतर बदलता रहता है, आपको रोने का मन करता है । आपमें डर व प्रसन्नता की भावना रहती है ।

  1. गर्भावस्था का दूसरा महीना (Second month):

गर्भावस्था दूसरा महीना

आपकी गर्भावस्था का दूसरा माह बच्चे के विकास के लिये नाजुक होता है । इस समय आपका बच्चा  ब्लास्टोसिस्ट से एम्ब्रियो में परिवर्तित हो जाता है । इस माह में बच्चे का हृदय धड़कना प्रारंभ कर देता है, यह गति प्रारंभ में धीमी होती है, फिर तेज हो जाती है, उसके पश्चात् गर्भावस्था के दौरान यह धीमी ही रहती है । दूसरे माह के दौरान आपके बच्चे का विकास तेजी से होता है । दूसरे माह के अंत में बच्चे के शरीर के सभी प्रमुख अंग, सभी तंत्र जैसे मस्तिष्क, फेफड़े, लीवर व आमाशय आदि विकसित होना प्रारंभ हो गये होते हैं । पलकें बनती हैं, बढ़ जाती हैं, लेकिन बंद रहती हैं । आंतरिक कान बनना प्रारंभ हो जाते हैं । घुटने, कलाई, उंगलियां व जनन अंग विकसित होने लगते हैं । गर्भावस्था के दूसरे माह के अंत में बच्चा एक छोटे मानव की आकृति को प्राप्त कर लेता है । बच्चे की लंबाई लगभग एक इंच व वजन अभी भी एक औंस तक ही होता है ।  इस अवस्था में नशीली वस्तुएं, वाइरस या पर्यावरण संबंधी कारक जैसे कीटनाशक आदि आपके बच्चे में जन्मजात दोष पैदा कर सकते हैं । इस अवस्था में आपके डॉक्टर आपके वजन, ब्लड प्रेशर, हिमोग्लोबिन, पेशाब में शुगर व प्रोटीन की मात्रा व आपके बढ़ते हुए गर्भाशय के आकार की जांच करते हैं । आपके मन में भी गर्भावस्था को लेकर कई सवाल उठते हैं, जिनका निदान आप अपने डॉक्टर से पूछकर कर सकती हैं । इस अवस्था में कुछ स्त्रियों को अभी भी गर्भावस्था का आभास नहीं होता है । इसके दौरान सामान्य लक्षण हैं- थकान अनुभव होना, बार-बार पेशाब आना, उल्टी होना, अधिक लार बनना, कब्ज होना, व अपच आदि । अब भी भिन्न-भिन्न चीजें खाने की तीव्र इच्छा होती है । स्तनों में भारीपन का अनुभव होता है व स्तन में निप्पल के चारों ओर का हिस्सा अधिक काला होने लगता है । कभी-कभी सर में दर्द होता है । कभी-कभी बेहोशी जैसी लगती है। भावनात्मक स्थिति लगभग प्रथम माह जैसी होती है।

  1. गर्भावस्था का तीसरा महीना (Third month) :

गर्भावस्था तीसरा महीना

इस समय बच्चा एम्ब्रियो से फीटस में परिवर्तित हो जाता है । गर्भावस्था के तीसरे माह के अंत तक बच्चे का पूरा शरीर बन जाता है । बच्चे की हड्डियां कठोर होने लगती हैं । बच्चा अपने हाथ, पैरों व सिर को हिलाना प्रारंभ पर देता है । वह मुंह खोलता व बंद करता है, पर बच्चे का आकार इतना छोटा होता है कि उसकी गतिविधियों को आप अनुभव नहीं कर पाती हैं । बच्चे की उंगलियां अलग-अलग दिखाई देने लग जाती हैं व उनके सिरों पर कोमल नाखून भी बन जाते हैं । बच्चे के हाथ पैरों से अधिक विकसित होते हैं । व बांहें पैरों से अधिक लंबी होती हैं । बच्चे की आंखें बड़ी व खुली दिखती हैं, बाह्य कान बन जाते हैं । इस समय किडनी बन जाती है व कार्य करना प्रारंभ कर देती है । इस माह के अंत में Umbilical Cord पूर्ण विकसित हो जाती है । बच्चे का सिर शेष शरीर की  अपेक्षा बड़ा होता है । यह आकार में शेष शरीर का आधा होता है । सिर पर बालों का बनना प्रारंभ हो जाता है । मसूढ़ों के अंदर दांतों की कोपलें बन जाती हैं । वोकल कॉर्ड का विकास भी इसी माह में होता है । बच्चे के हृदय के चार चैम्बर बन जाते हैं व उसके दिल की धड़कन लगभग 120-160 प्रति मिनट होती है । गर्भावस्था के तीसरे माह के अंत में बच्चे की लंबाई लगभग चार इंच व वजन एक औंस से ज्यादा हो जाता है । बच्चे के बाहरी अंग बन जाते हैं, भूण का पूंछ वाला भाग गायब हो जाता है | इस अवस्था में आपके डॉक्टर पुन: आपके वजन, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन व पेशाब की जांच करते हैं । वे बच्चे की धड़कन व बढ़ते हुए गर्भाशय के आकार की जांच करते हैं । गर्भावस्था के प्रारंभ के कुछ लक्षण अभी भी दिखाई देते हैं । आपके स्तन, पेट व पैर आदि स्थानों पर कुछ अतिरिक्त नसें दिखाई देने लगती हैं, जो शरीर में रक्त के संचार को बढ़ाती हैं । इस माह के अंत तक आपका पेट कुछ बड़ा दिखने लगता है । साथ ही आपकी भूख में भी वृद्धि होने लगती है ।

  1. गर्भावस्था का चौथा महीना (Fourth month) :

गर्भावस्था चौथा महीना

इस अवस्था में प्लेसैन्टा आवश्यक हॉरमोन बनाने का कार्य करना प्रारंभ कर देती है । अब बच्चा घूमना, पैर चलाना, सोना, जागना, निगलना व पेशाब करना आदि क्रियायें प्रारंभ कर देता है । इस अवस्था में आप अपने पेट के निचले हिस्से में कुछ संवेदना अथवा हरकत का अनुभव कर सकती हैं । जब भी आप अपने बच्चे की हरकत को अनुभव करें, तो उस तारीख को नोट कर लें, क्योंकि यह आपके प्रसव की नियत तारीख को निश्चित करने में सहायक होगा । बच्चे की त्वचा गुलाबी व कुछ पारदर्शक होती है । कानों के स्थान पर कोपल जैसी बन जाती हैं । बच्चे का चेहरा विकसित होने लगता है । बच्चे की गर्दन इतनी लंबी हो जाती है कि वह आसानी से अपना सिर उठा सकता है । गर्भावस्था के चौथे महीने के अंत में आपके बच्चे का वजन लगभग छ: औंस व लंबाई लगभग 8 से 10 इंच हो जाती है । इस माह में आपके डॉक्टर पूर्व में की जाने वाली जांच करते हैं । वे आपके बढ़ते हुए गर्भाशय के आकार की भी जांच करते हैं । ये सभी जांच आपकी पूरी गर्भावस्था के दौरान आवश्यक होती हैं । क्योंकि ये आपके बच्चे के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती हैं व आपको गर्भावस्था के दौरान सम्भावित परेशानियों से भी बचाती हैं ।इस माह में आपको अपने गर्भवती होने का अनुभव होने लगता है । आपको शारीरक रूप से थकान, कब्ज, अपच, सिर-दर्द आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं । प्रारंभिक लक्षण लगभग गायब होने लगते हैं । इस अवस्था में कुछ नये लक्षण उभरने लगते हैं, जैसे नाक व मसूड़ों से खून आना, भूख बढ़ना, हाथ-पैरों में सूजन आना, योनि से श्वेत प्रवाह आना, बेडोल अनुभव होना व बच्चे की गतिविधियों को अनुभव करना आदि । याद रखें कि कुछ स्त्रियां ये लक्षण अनुभव करती हैं व कुछ नहीं भी करती हैं । अतः आवश्यक नहीं कि सभी स्त्रियों के अनुभव समान हों । इस अवस्था में भावनात्मक परिवर्तन भी होते हैं । समय-समय पर आपको खुशी व शंका दोनों का अनुभव होता है । चिन्ता के कारण तनाव व चिड़चिड़ापन दिखाई देता है । स्त्री अपने शरीर के प्रति संकोच का अनुभव करने लगती है, क्योंकि उसके पहले वाले वस्त्र फिट नहीं आते हैं । आप भूलने भी लग जाती हैं ।

  1. गर्भावस्था का पांचवां महीना (Fifth month):

गर्भावस्था पाँचवा महीना

इस अवधि में कोई विशेष नया अंग निर्मित नहीं होता है, परंतु इस माह में आपके बच्चे का सर्वाधिक विकास होता है । उसके आंतरिक अंग परिपक्व होने लगते हैं । बच्चे के नाखून बन जाते हैं । बच्चे की त्वचा के नीचे वसा इकट्ठी होने लगती है । बच्चे के फिंगरप्रिंट्स बनने लगते हैं । मांसपेशियां बनने लगती हैं व उसका शरीर दिनोंदिन मजबूत होने लगता है । रक्त कोशिकायें रक्त बनाने का कार्य करने लगती हैं । बच्चे का गॉलब्लैडर क्रियाशील हो जाता है । दूध के दांत मसूड़ों के अंदर बन चुके होते हैं, उनके नीचे स्थायी दांतों की कोपलें भी बनने लगती हैं । शरीर के रोयें, पलकें व भवें विकसित होने लगते हैं । आपका बच्चा नियमित अंतराल में सोना व जगना प्रारंभ कर देता है । अब आप अपने बच्चे की गति को अनुभव कर सकती हैं । वह एक ओर से दूसरी ओर करवट बदलने लगता है । वह अंगूठा चूसना भी प्रारंभ कर देता है । गर्भावस्था के इस माह के अंत तक बच्चे की लंबाई लगभग 10 से 12 इंच व वजन लगभग एक पौंड हो जाता है । इस माह में भी आपके डॉक्टर आपके वजन, हिमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, पेशाब, बच्चे के हृदय की धड़कन व सूजन आदि की जांच करते हैं । वे आपके बढ़ते हुए गर्भाशय के आकार की भी जांच करते हैं । पांचवे माह में आप भूख बढ़ना, हाथ पैरों में सूजन आना, योनि से श्वेत प्रवाह आना, कानों में घुटन जैसा अनुभव होना, बेडौल अनुभव होना व बच्चे की गतिविधियों को अनुभव करना, गर्भाशय बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, कब्ज, अपच, सिरदर्द, बेहोशी, पीठदर्द, त्वचा में परिवर्तन, हृदय की गति बढ़ना आदि लक्षणों को अनुभव कर सकती हैं । भावनात्मक रूप से आपका स्वभाव शांत होने लगता है । अब आपके मूड में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होता है ।

  1. गर्भावस्था का छठा महीना (Sixth month):

गर्भावस्था छठा महीना

इस माह में भी बच्चे का तीव्र विकास होता है । बच्चे की त्वचा में wrinkle होते हैं व यह लाल होती है । उसकी त्वचा lanugo (fine, soft hair) and vernix से ढकी रहती है । उसके बाल व पैरों के नाखून बनने प्रारंभ हो जाते हैं । बच्चे का मस्तिष्क तेजी से बढ़ने लगता है । उसमें Meconium (first stool) विकसित होने लगता है । बच्चे में एक विशेष प्रकार की वसा, brown fat बनने लगती है, जो बच्चे को जन्म के समय गर्म रखता है । यदि गर्भस्थ शिशु लड़की है, तो इस माह में उसकी डिम्बग्रंथियों में अण्डे विकसित होने लगते हैं । बच्चे की हड्डियां मजबूत होने लगती हैं । उसका लगभग पूरा शरीर बन जाता है और वह एक छोटे मानव शरीर के रूप में दिखाई देने लगता है । चूंकि बच्चे के फेफडे, अभी पूर्ण विकसित नहीं हो पाते हैं और बच्चा अभी काफी छोटा होता है, इसलिये वह इस अवस्था में गर्भाशय के बाहर नहीं रह सकता है । गर्भावस्था के छठे माह के अंत में बच्चे की लम्बाई 11 से 14 इंच होती है व वजन लगभग एक से डेढ़ पौंड होता है । इस समय आपके डॉक्टर आपकी जांच को जारी रखते हैं । यह आवश्यक होता है कि आपके वजन, ब्लडप्रेशर, पेशाब, हिमोग्लोबिन, बच्चे के हृदय की धड़कन व गर्भाशय के आकार आदि की जांच पूरी गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से की जाय । अब आप अपने गर्भस्थ शिशु की गतिविधियों को अधिक अनुभव करने लगती हैं, क्योंकि एक तो उसका आकार बढ़ जाता है व उसकी हड्डियां अधिक मजबूत हो जाती हैं और वह अधिक सक्रिय रहने लगता है । अभी भी आप भूख बढ़ना, हाथ-पैरों में सूजन आना, योनि से श्वेत प्रवाह आना जैसा अनुभव होना, बेडोल अनुभव होना, गर्भाशय बढ़ने के कारण पेट के निचले हिस्से में दर्द होना, कब्ज, अपच, सिरदर्द, बेहोशी, पीठदर्द, त्वचा में परिवर्तन, हृदय की गति बढ़ना आदि लक्षणों का अनुभव करती हैं । अब आपको अपने पेट पर खुजली जैसा अनुभव होता है । भावनात्मक हो सकती हैं । और आप खोई सी, चिन्तित व बोर अनुभव करने लगती हैं ।

  1. गर्भावस्था का सातवां महीना (Seventh month):

गर्भावस्था सांतवा महीना

गर्भावस्था के इस माह में आपके बच्चे का विकास होना जारी रहता है । बच्चा अपनी आंखें खोलने व बंद करने लगता है । प्रकाश व अंधकार को अनुभव करने लगता है और इसका प्रभाव उसके सोने व जगने को भी प्रभावित करता है । बच्चे के चेहरे से कोमल रोयें की परत हटने लगती है । उसकी सुनने की शक्ति में वृद्धि होती है । वह अब बाहर की आवाजों को सुन सकता है । वह आपकी हृदयगति को सुन सकता है, पाचन तंत्र आदि को भी सुन सकता है । वह हाथ-पैर चलाकर अपना व्यायाम करता है । अब वह अपना अंगूठा चूसना पसंद करता है । गर्भावस्था के इस माह के अंत तक बच्चे की लंबाई लगभग 15 इंच व वजन लगभग दो से ढाई पौंड हो जाता है । यदि बच्चा इस माह में जन्म लेता है, तो उसके बचने की संभावनाएं छठे माह से अधिक हो जाती हैं । इस समय आपके डॉक्टर आपके वजन, ब्लडप्रेशर, पेशाब, हिमोग्लोबिन, बच्चे के हृदय की धड़कन व गर्भाशय के आकार आदि की जांच को जारी रखते हैं । वे बच्चे के आकार व गर्भाशय में उसकी स्थिति की भी जांच करते हैं । अभी भी आप कब्ज़, अपच आदि अनुभव करती हैं । आपके पेट के निचले हिस्से में खुजली जैसा अनुभव होता है । योनि से श्वेत प्रवाह आना बढ़ जाता है । हॉरमोन में होने वाले परिवर्तनों के कारण नाक बंद होने लगती है । कान बंद से लगते हैं । सिरदर्द, बेहोशी, पीठदर्द, त्वचा में परिवर्तन आदि लक्षण रहते हैं । सांस फूलने लगता है । सोने में दिक्कत होती है । बच्चे की गतिविधियों का अनुभव बहुत होता है । आपका पेट एकदम से कड़ा हो जाता है व फिर नरम हो जाता है, पर इसमें दर्द का अनुभव नहीं होता है । आपके स्तनों से अब Colostrum का स्राव होने लगता है । इस समय तक स्त्रियां अपनी गर्भावस्था से बोर होने लगती हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि यह चक्र अब जल्दी ही पूरा हो । अब वे अपने बच्चे, प्रसव व मातृत्व के बारे में सोचने लगती हैं ।

  1. गर्भावस्था का आठवां महीना (Eighth month):

गर्भावस्था आठवां महीना

अब बच्चा जन्म के लिये पूर्णतया तैयार होने लगता है । गर्भावस्था के आठवें माह में बच्चा तेजी से बढ़ने लगता है, उसकी हड्डियां और मजबूत हो जाती हैं । अंग सुडौल होने लगते हैं व त्वचा में स्वस्थ-सी चमक आ जाती है । अब मस्तिष्क अपने भिन्न-भिन्न भाग बनाने लगता है । मस्तिष्क व स्नायु शरीर की क्रियाओं को निर्देशित करने लगते हैं । स्वाद कलिकायें विकसित होने लगती हैं । अब आपका बच्चा हिचकी ले सकता है, चिल्ला सकता है, अब वह मीठे व खट्टे में भेद कर सकता है । बच्चा अब दर्द, प्रकाश व ध्वनि के प्रति प्रतिक्रिया करना प्रारंभ कर देता है । बच्चे की लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण पूर्णतया बच्चे के बोन मैरो द्वारा किया जाने लगता है । गर्भावस्था के इस माह के अंत तक आपके बच्चे की लंबाई लगभग 16 से 18 इंच व वजन लगभग 4 पौंड हो जाता है । आपकी गर्भावस्था के 32 सप्ताह के उपरान्त आपके डॉक्टर आपको हर दो सप्ताह में चेकअप के लिये बुलाते हैं, जिससे आपकी गर्भावस्था को ढंग से मॉनिटर किया जा सके । वे आपके वजन, हिमोग्लोबिन, ब्लडप्रेशर, पेशाब, गर्भाशय के आकार, बच्चे की गतिविधियों व उसकी स्थिति व अन्य लक्षणों से बच्चे के स्वास्थ्य का अनुमान लगाते हैं । बच्चे की गतिविधियों को अनुभव करने का अनुभव अब बढ़ता जाता है । अब बच्चा तेजी से हाथ-पैर मारता है और आप अपने पेट पर कभी-कभी छोटे पैर व कोहनी जैसा कुछ अनुभव कर सकती हैं । पिछले महीनों के कुछ लक्षणों के साथ अब पेट अधिक बढ़ने से आपको कब्ज व सांस फूलने की तकलीफ बढ़ जाती है ।

  1. गर्भावस्था का नौवां महीना (Ninth month):

गर्भावस्था नौवां महीना

अब बच्चा प्रसव के लिये तैयार हो जाता है । गर्भावस्था के नवें महीने में आपका बच्चा लगभग आधा पौंड प्रति सप्ताह बढ़ता है । बच्चा पहले से मोटा हो जाता है व उसकी त्वचा की सिलवटें कम हो जाती हैं । उसका सिर गर्भाशय birth canal के नीचे की ओर मुड़ जाता है । पैर छाती की ओर मुड़े होते हैं व घुटने लगभग नाक की सीध में होते हैं । अब बच्चे के फेफड़े पूर्णतया विकसित हो जाते हैं । अब यदि बच्चा समय से पहले भी जन्म लेता है, तो उसके जीवित रहने की संभावनाएं अच्छी रहती हैं । बच्चे के सिर की हड्डियां कोमल व लचीली होती हैं, अत: प्रसव के समय birth canal से निकलने में आसानी होती है । बच्चा sleeping patterns को विकसित करता है । बच्चा अभी भी हाथ पैर चलाता है, यद्यपि वह आपके पेट के नीचे की ओर बढ़ता है । इस प्रक्रिया को lightening कहते हैं । आप बच्चे को गर्भाशय में घूमता हुआ भलीभांति अनुभव कर सकती हैं । गर्भावस्था के इस महीने तक आपके बच्चे की लंबाई लगभग 20 इंच व वजन लगभग 6 से 9 पौण्ड होता है । आपका बच्चा 37 से 42 वें सप्ताह के बीच कभी भी जन्म ले सकता है । केवल 5 प्रतिशत बच्चे ही अपनी निश्चित तिथि पर जन्म लेते हैं । अब आपको बच्चे की गतिविधियों में परिवर्तन दिखाई देगा । अब वह हाथ-पैर चलाने के बजाय घूमता हुआ प्रतीत होगा । श्वेत स्राव (Leucorrhea) कफी बढ़ जाता है व उसमें Docus की मात्रा अधिक होती है । इसमें रक्त की या भूरे रंग की धारियां दिखाई दे सकती हैं । गर्भावस्था के 36 सप्ताह के बाद आपके डॉक्टर आपकी जांच प्रति सप्ताह करते हैं । इस समय आपके डॉक्टर आपके वजन, ब्लडप्रेशर, पेशाब, हिमोग्लोबिन, बच्चे के हृदय की धड़कन व गर्भाशय के आकार आदि की जांच करते हैं । वे बच्चे के आकार व गर्भाशय में उसकी स्थिति की भी जांच करते हैं । 38 सप्ताह के बाद वे आपकी cervix की भी जांच करते हैं । पिछले माह के लक्षणों के अतिरिक्त आप कुछ और परेशानियों का अनुभव कर सकती हैं । आपके कूल्हों में भारीपन व दर्द का अनुभव होता है । श्रोणि क्षेत्र में दर्द होता है । पीठ में तेज दर्द होता है । सोने में बहुत असुविधा होती है । अब आपको बहुत जल्दी-जल्दी व तीव्रता से होने वाले contractions का अनुभव होता है व इसमें दर्द भी हो सकता है । अब बच्चे के नीचे की ओर खिसक जाने के कारण आपको सांस लेने में तो आसानी होती है, परन्तु बार-बार पेशाब आने लगती है । आप या तो अधिक थकान व अधिक शक्ति का अनुभव करेंगी अथवा बारी-बारी से दोनों अनुभव करेंगी । आपकी भूख या तो बहुत बढ़ सकती है या कम भी हो सकती है । इस अवस्था में आप उत्सुकता, उत्साह, चिन्ता, डर आदि का मिला-जुला अनुभव करेंगी । गर्भावस्था के नौवें महीने में अब आपको यह तसल्ली रहती है कि लगभग पूरा समय  व्यतीत हो चुका है । आप कभी-कभी बहुत अधिक भावुक, परेशान व अधीर रहती हैं । ये सभी भावनायें बहुत स्वाभाविक हैं, अत: चिन्ता न करें । गर्भावस्था के इस महीने में आप डिलीवरी के लिये अस्पताल जाने के लिये अपना बैग तैयार करके रख लें, जिसकी आवश्यकता आपको कभी भी पड़ सकती है ।

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