संतरे के फायदे गुण एवं संतरे से रोगों का ईलाज

संतरा, नारंगी, माल्टा, मौसमी इत्यादि सब एक ही प्रकृति के फल हैं, संतरे के फायदे का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है की संतरा पेड़ पर पका हो, मीठा हो, तो किसी भी रोग के रोगी को बेखटके दिया जा सकता है । जिस रोगी को कुछ भी खाने की मनाही है, उसे भी संतरा या संतरे का रस पीने को दिया जा सकता है । संतरा शीतल, अम्ल-मधुर, बलवर्धक, रक्तवर्धक, विषनाशक और तृष्णा-(प्यास) नाशक है । संतरे के फायदे में रक्त-पित्त, अतिसार, कृमि (टट्टी में कीड़े आना), पाण्डु (पीलिया) इत्यादि रोगों को दूर करना भी सम्मिलित है | संतरा पेट के रोगों को दूर करता है । एक छोटा ग्लास संतरे का ताजा रस पीने से हृदय-रोग नहीं होता है । हृदयरोग के रोगी को जब चिकित्सा के बाद आराम आ जाए, तब प्रतिदिन दो संतरे अवश्य सेवन करने चाहिये । खूब मीठा संतरा आन्त्रिक ज्वर (टायफ़ायड) के रोगी को भी दिया जा सकता है | परन्तु टाइफाइड के रोगी को देने से पहले फॉकों की ऊपर की झिल्ली उतार लेनी चाहिए । यदि रस निकालकर दें तो 4 प्याली से अधिक एक बार में नहीं देना चाहिए ।

संतरे के फायदे

विभिन्न रोगों के ईलाज में संतरे के फायदे:

विभिन्न रोगों के ईलाज में संतरे की हमेशा से भूमिका रही है यही कारण है की इन रोगों में संतरे के फायदे को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता है | संतरे से वभिन्न रोगों का घरेलू ईलाज संभव है जिनकी लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |

कब्ज़ (Constipation) में संतरे के फायदे:

कब्ज में संतरे के फायदे लेने के लिए दो बड़े, पीले, पके संतरों का रस प्रातः नाश्ते से भी पहले पियें । एक हफ्ते में पुराने-से-पुराना कब्ज़ दूर हो जायेगा ।

संतरे से हिस्टीरिया का ईलाज:

दो बड़े संतरे रोज़ खाने से हिस्टीरिया दूर होता है । जो स्त्रियाँ दो संतरे प्रतिदिन खाएँ या 1 छोटा ग्लास संतरे का ताजा रस प्रतिदिन पियें, उन्हें हिस्टीरिया की बीमारी नहीं होती है ।

विभिन्न रोगों की एक दवा:

संतरे और कन्धारी अनार, दोनों का रस मिलाकर एक ग्लास प्रतिदिन पीने से पुरानी खाँसी, अनिद्रा, पायरिया, मन्दाग्नि, अपच, दुर्बलता, चक्षुरोग, पत्थरी तथा जिगर (Liver) की गर्मी दूर होती है ।

गर्भिणी की उल्टी में संतरे के फायदे:

गर्भवती स्त्री की उल्टियाँ रोकने में भी संतरे के फायदे देखे गए हैं | इसके लिए  25 ग्राम संतरे का रस शुद्ध शहद में मिलाकर प्रतिदिन 4 बार देने से गर्भिणी की उल्टियाँ रुक जाती हैं, अपच दूर हो जाती है । यदि दस्त आ रहे हों, तो बन्द हो जाते हैं ।

संतरे से नन्हे बच्चों के दस्त का ईलाज:

यदि नन्हे बच्चे को बार-बार दस्त आ रहे हों, रुकते न हों, तो संतरे के रस में पानी मिलाकर उसे माँ के दूध या गाय के दूध में मिलाइए तथा दो से चार चम्मच तक पिलाइए । दो-दो घंटे बाद रात्रि को सोने से पहले तक पिलाती रहें ।

दाँत निकलते समय संतरे के फायदे:

संतरा बच्चों को दांत निकलते समय होने वाली पीड़ा से भी छुटकारा दिलाता है |  इसके लिए संतरे के रस को कवोष्ण (मन्द-मन्द गर्म) करके दो-दो चम्मच करके पिलाइए । बच्चे की उल्टी, अपच, पेट व छाती की जलन दूर होगी । दाँत निकलने में सुविधा होगी ।

संतरे से कमज़ोर नज़र का ईलाज:

जिनकी दृष्टि-शक्ति (बीनाई) कमज़ोर हो गई हो, वे संतरे के फायदे लेने के लिए संतरे के रस में काली मिर्च तथा जरा-सा नमक डालकर पी सकते हैं ऐसा करके उनकी दृष्टि-शक्ति बढ़ेगी ।

मुँहासे व झाईं में संतरे के फायदे:

संतरे के फायदे में यह फायदा सुन्दरता अर्थात ब्यूटी से जुड़ा हुआ है | इसके लिए संतरे के छिलकों को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर कपड़छन कर लीजिए । इसे गुलाब के अर्क में मिलाकर झाईं तथा मुहाँसे पर मलने से मुखड़ा निर्मल और त्वचा बेदाग़ हो जाती है । संतरा छीलते ही उसका छिलका झाईं-मुहाँसे पर मलने से त्वचा निखर आती है । चेचक के दाग़ भी दब जाते हैं |

संतरे से गुर्दे की पुरानी बीमारी (क्रॉनिक नेफ़राइटिस) का ईलाज

गुर्दे की पुरानी बीमारी में भी संतरे के फायदे देखे गए हैं इसके लिए रोगी को निम्नानुसार संतरे का रस पिलाना होगा |

पहले दिन 250 ग्राम संतरे के रस में जरा-सा सेंधा नमक डालकर पिलावें ।

दूसरे दिन 400 ग्राम संतरे के रस में ज़रा-सा सेंधा नमक डालकर पिलावें ।

तीसरे दिन 500 ग्राम संतरे के रस में ज़रा-सा सेंधा नमक डालकर पिलावें ।

इस बीमारी में संतरे के फायदे लेने के लिए इसी तरह प्रतिदिन संतरे का रस 100 ग्राम और बढ़ाते हुए पिलाते जाएँ । तीस दिन तक पिलाने से पुराने से पुराना गुर्दे (Kidney) का रोग (सूजन और दर्द) दूर हो जाएगा ।

ध्यान रहे संतरे का कल्प करते समय न रोटी, चावल, मांस आदि खाएँ और न अन्य कोई फल खाएँ । एक मास के बाद साधारण भोजन खाएँ, परन्तु संतरे का रस एक ग्लास प्रतिदिन पीना जारी रखें । 6 मास में यह रोग जडमूल से चला जाएगा ।

संतरे से गर्मी में घबराहट का ईलाज:

गर्मियों के मौसम में गर्मी से घबराहट पैदा हो जाती है इसमें संतरे का शर्बत तुरन्त लाभ पहुँचाता है । प्यास मिट जाती है और काफी देर तक नहीं लगती । संतरे का रस दिन में दो-तीन बार पिया जा सकता है ।

जलोदर (पेट में पानी पड़ने) का ईलाज:

पेट में पानी पड़ने की स्थिति में संतरे के फायदे लेने के लिए संतरे की  शिकंजबीन (शिकंजवी) लगातार पिलाएँ ।

शिकंजबीन कैसे बनायें:

जलोदर के लिए शिकंजबीन बनाने के लिए 1.3 लीटर संतरे का ताजा रस, 20 ग्राम कासनी की जड़ की छाल, 15-15 ग्राम ककड़ी-खीरे के बीज का चूर्ण, 1 किलोग्राम चीनी या खाँड, 250 ग्राम सिरका लें | इसके बाद संतरे के फायदे लेने के लिए इन सब चीजों को संतरे के रस में रात-भर भीगने दें । उसे सवेरे मन्द आँच पर पकाएँ । जब 1 लीटर बाकी बचे तो नीचे उतार लें । अब इसमें 1 किलोग्राम चीनी तथा 250 ग्राम सिरका डालकर दुबारा पकाएँ । इस शिकंजवी में से 25 ग्राम लेकर शुद्ध जल में घोलकर पिलाएँ । इससे जलोदर रोग दूर होता है ।

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