गर्भधारण से पहले बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे करें?

लिंग निर्धारण से आशय यह जानने की प्रक्रिया से होता है की गर्भ में पलने वाली संतान लड़का है या लड़की | चूँकि हमारा देश भारतवर्ष प्राचीनकाल से ही पुरुष प्रधान देश रहा है इसलिए यहाँ हर घर में हर गर्भवती महिला से यही उम्मीद की जाती है की वह किसी लड़के को ही जन्म दे | कहने का आशय यह है की हमारे देश में सामान्यतः लड़के को अधिक महत्व दिया जाता है । परम्पराओं के अनुसार यह माना जाता है कि वंश चलाने के लिये लड़का होना आवश्यक है । इसी कारण कई स्त्रियों को लड़के के जन्म के लिये कई बच्चों को जन्म देने के लिये बाध्य किया जाता है । अनपढ़ लोगों में कई बार पुत्र का जन्म न होने के कारण विवाह विच्छेद व दूसरे विवाह के प्रकरण भी दिखाई देते हैं । इसलिए अधिकतर माता पिता भी यही चाहते हैं की उनकी होने वाली संतान लड़का ही पैदा हो | इसी कारण वे गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग निर्धारण करना चाहते हैं ताकि लड़की होने पर वे उस गर्भ को नष्ट करें | हालांकि अल्ट्रासाउंड तकनीक एवं इनवेसिव परीक्षण से बच्चे का लिंग निर्धारण किया जा सकता है लेकिन वर्तमान में इस प्रतिबंध है इसलिए लिंग निर्धारण करना या करवाना दोनों क़ानूनी तौर पर अपराध है | लेकिन अशिक्षित घरों के लोगों के मन में लड़का पाने की चाहत आज भी ज्यों के त्यों होती है ग्रामीण इलाकों में एक दम्पति लड़का पैदा होने की उम्मीद में दर्जनों बच्चे पैदा कर देता है | इसलिए आज हम इस लेख के माध्यम से लिंग निर्धारण समबन्धी बेहद महत्वपूर्ण बातों को जानने की कोशिश करेंगे और यह भी जानेंगे की कैसे कोई दम्पति गर्भधारण से पहले लिंग निर्धारण की योजना बनाकर इसे प्राकृतिक रूप से सफल बना सकता है |

लिंग निर्धारण

बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?(Sex Determination process in Hindi) :

बच्चे में क्रोमोसोम के 46 जोड़े होते हैं, जिनमे से 23-23 वह माता-पिता दोनों से प्राप्त करता है । पुरुष में सेक्स क्रोमोसोम में XY होता है, जबकि स्त्री के अण्डे में सिर्फ XX होता है । बच्चे का लिंग निर्धारण इस बात पर निर्भर करता है कि फर्टिलाइजेशन किस प्रकार होता है । यदि X क्रोमोसोम वाला शुक्राणु अण्डे को फर्टिलाइज करता है । तो बच्चा लड़की पैदा होता है और यदि Y क्रोमोसोम वाला शुक्राणु अण्डे को फर्टिलाइज करता है, तो बच्चा लड़का पैदा होता है । अतः प्रत्येक गर्भधारण में दोनों की पचास-पचास प्रतिशत संभावनाएं होती हैं । यह संयोग पर ही निर्भर करता है, अत: किसी को उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है । बच्चे का लिंग निर्धारण केवल पुरुष के क्रोमोसोम के कारण होता है, अत: स्त्री की इसमें कोई भूमिका नहीं होती है । इसलिए महिलाओं को लड़की पैदा होने के लिए जिम्मेदार ठहराना सामाजिक तौर पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक तौर पर भी गलत है |

गर्भावस्था के दौरान लिंग निर्धारण :

यद्यपि गर्भावस्था के दौरान बच्चे का लिंग पहचानने की तकनीकें भी उपलब्ध हैं, जैसे- Amniocentesis, ultrasound examination, इत्यादि  परन्तु जन्म से पूर्व बच्चे का लिंग मालूम करना अब कानूनन अपराध है । यह कानूनी तौर पर उन्हीं मामलों में किया जा सकता है, जिनमें घातक Sex linked disorder-Thalassemia, hemophilia, duchenne muscular dystrophy आदि हों । इनमें यदि भूण लड़का है, तो उसे जान-बूझकर मेडिकल ग्राउण्ड पर समाप्त कर दिया जाता है । इन बीमारियों की जांच के लिये गर्भ की समाप्ति से पूर्व हमारे पास कई एडवांस तकनीकें हैं, जिनसे इनका पता लगाया जा सकता है ।

क्या गर्भधारण के पूर्व लिंग निर्धारण किया जा सकता है?:

जैसा की हम बता चुके हैं गर्भ में पल रहे बच्चे का लिंग निर्धारण करना क़ानूनी अपराध है इसलिए इससे बचना चाहिए | लेकिन कई बार माता-पिता के लिये गर्भधारण से पूर्व बच्चे का लिंग निर्धारण करना अपेक्षित होता है । इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये कई विधियां हैं । ये विधियां timing, acidity, sperm motility or density, and sperm genetic composition आदि पर निर्धारित हो सकती हैं । इसमें बाद वाली विधि अधिक विश्वसनीय है । इस विधि में शुक्राणुओं को 70 प्रतिशत तक purify किया जाता है । इन्हें लैब में स्टोर किया जाता है, फिर इस प्रकार प्यूरीफाई किये गये शुक्राणुओं का प्रयोग intrauterine insemination(IUI), in vitro fertilization(IVF), or intracytoplasmic sperm injection आदि के लिये किया जाता है ।

गर्भधारण से पूर्व लिंग निर्धारण की विधियाँ:

गर्भधारण से पूर्व लिंग निर्धारण के लिए निम्नलिखित विधियां अपनाई जा सकती हैं |

जैनेटिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी :

यह गर्भधारण से पूर्व बच्चे के लिंग निर्धारण की सर्वाधिक विश्वसनीय विधि है । क्योंकि IVF Technique में यह विकल्प रहता है कि X वY शुक्राणु को अलग किया जा सकता है । उसके द्वारा अण्डे का फर्टिलाइजेशन किया जा सकता है । यह एक जटिल व महंगी प्रक्रिया है । इसका प्रयोग केवल बच्चे के लिंग निर्धारण के लिये ही नहीं किया जाना चाहिये । इसका प्रयोग X-linked disorder से युक्त परिवारों में लड़की के जन्म को सुनिश्चित करने के लिये भी किया जाता है ।

शैटल्स विधि (Shettles method) :

गर्भधारण की यह विधि दम्पति पर निर्भर करती है इसमें चिकित्सक द्वारा दम्पति समय इत्यादि का ध्यान रखकर सहवास करने की सलाह डी जाती है | शैटल्स विधि से लिंग निर्धारण करने में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है |

संभोग की टाइमिंग :

  • यदि दम्पति लड़का होने की इच्छा रखता हो अर्थात Male infant के लिये संभोग को ovulation के अनुसार करना आवश्यक है । संभोग ovulation के 12 घंटे पहले करना चाहिये । ovulation का पता शरीर के तापमान अथवा सर्विकल म्यूकस द्वारा लगाया जा सकता है । संभोग या तो सबसे कम तापमान वाले दिन किया जाये या फिर तापमान गिरने के अगले दिन सुबह करना चाहिये । इसी प्रकार सर्विकल म्यूकस जब पतले से गाढ़ा होना शुरू करे तब संभोग करना चाहिए ।
  • लड़की की चाह रखने वाले दम्पति को अर्थात Female infant के लिये ovulation के दिन से 2 या 4 दिन पहले संभोग करना चाहिए । सर्वाधिक म्यूकस वाले दिन संभोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए ।

संभोग में संयम अथवा परहेज :

  • Male infant अर्थात लड़के के लिये ovulation के 4 से 5 दिन पहले संभोग ना करें । उससे पहले कन्डोम का प्रयोग करें अथवा निश्चित दिन से पहले अथवा बाद में पूरी साइकिल में कन्डोम का प्रयोग करें ।
  • Female infant अर्थात लड़की पैदा करने के लिए कन्डोम का प्रयोग न करें । मासिक चक्र में प्रारंभ से रोज संभोग करें । Ovulation के 2 से 3 दिन पूर्व संभोग ना करें । इसके बाद कन्डोम का प्रयोग करें ।

अंडकोष की थैली  का तापमान :

Male infant अर्थात लड़का पैदा करने के लिए इसको ठण्डा रखना चाहिये हॉट टब में पुरुषों को अधिक देर तक नहीं बैठना चाहिये । गर्म स्थान जैसे भट्ठी के पास अथवा गर्म वाहनों पर अधिक नहीं बैठना चाहिये ।

संभोग से पहले तनाव दूर करें :

चूँकि इस विधि में लिंग निर्धारण संभोग करने के समय एवं अन्य कारको पर निर्भर करता है इसलिए यदि दम्पति लड़का प्राप्त करने इच्छा रखता हो तो उसे तनाव दूर करने के लिए एवं Male infant के लिये संभोग के 30 मिनट पहले कुछ कप कड़क caffeinated कॉफी पीनी चाहिए ।

डाउचिंग करें :

  • Male infant के लिये संभोग से पहले बेकिंग सोडा से डाउच करें ।
  • Female infant के लिये ovulation के 2 से ढाई दिन पूर्व सफेद सिरके से डाउच करें ।

लिंग का योनि में प्रवेश (Penetration) :

  • गर्भधारण से पहले लिंग निर्धारण के लिए अर्थात ऐसे दम्पति जो लड़के की कामना रखते हैं यानिकी Male infant के लिये पुरुष साथी को गहरे व अंदर तक लिंग प्रवेश अर्थात penetrate करना चाहिए ।
  • लड़की चाहने वाले दम्पति के पुरुष साथी को लिंग का प्रवेश कम गहराई तक कराना चाहिए और penetrate करते समय missionary position में रहना चाहिए |

गर्भधारण से पहले लिंग निर्धारण की इस शैटल्स विधि की Reported efficacy अर्थात प्रभावकारिता लड़का पैदा (Male infant) करने के लिए 80-85%  रही है जबकि Female infant के लिये यह 75-80% रही है | कहने का आशय यह की यदि दम्पति टाइमिंग, संयम, परहेज इत्यादि का ध्यान रखे तो वह गर्भधारण से पहले भी लिंग निर्धारण कर सकता है |

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