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त्वचा की संरचना

त्वचा की संरचना एवं कार्य Skin Structure & function

त्वचा की बनावट कहें या फिर त्वचा की संरचना दोनों का अर्थ एक ही होता है मनुष्य के सम्पूर्ण शरीर पर त्वचा एक चादर की तरह लिपटी हुई होती है, इसलिए यह मनुष्य के अन्दुरुनी अंगों की रक्षा करती है | स्किन का अर्थ प्राय किसी भी जीवधारी के बाहरी खाल से लगाया जा सकता है इसलिए आज हम त्वचा की संरचना एवं कार्यों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे |

त्वचा की संरचना

त्वचा की संरचना (Skin Structure in Hindi):

 जैसा की हम उपर्युक्त वाक्य में भी बता चुके हैं की त्वचा शरीर की ऊपरी खाल को कहते हैं । त्वचा की संरचना की बात करें तो हथेली और तालुओं को छोड़कर लगभग सभी स्थानों पर इसके ऊपर बाल उगे होते हैं । त्वचा को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है ऊपर वाला पतला भाग जिसे उपचर्म कहते हैं और अन्दर वाला भाग जिसे चर्म कहते हैं |

उपचर्म :

शरीर के ऊपरी भाग वाली चमड़ी की मोटाई सब जगह एक जैसी नहीं होती । तलवे, हथेली और पीठ के उपचर्म की मोटाई ज्यादा होती है । इसमें स्नायु या रक्तवाहक नलियां नहीं होती । इसलिए इसमें सुई चुभाने से तकलीफ भी कम होती है ।

चर्म :

उपचर्म के भीतर की खाल को चर्म या खाल कहते है । यह मांसपेशी और चर्बी के ऊपर होती है । यह उपचर्म से अधिक मोटी एवं मजबूत होती है । इसमें कोषों के साथ-साथ कोशिका तंतु, रक्त, लसीका, वाहिनियां और वातसूत भी होते हैं, इसलिए जब इसमें सुई चुभती है तब तकलीफ भी अधिक होती है । और खून भी निकल आता है । चर्म के ऊपर छोटे-छोटे उभार होते हैं । ये उभार रक्त की कोशिकाओं के कारण हो जाते हैं । त्वचा की संरचना में हमारी उंगलियों के शंख या चक्र इन्हीं उभारों के मुंडेरों से बनते हैं । ये दो ग्रांथियां होती है जिन्हें  स्वेद ग्रंथियां और वसा ग्रंथियां कहा जाता है ।

स्वेद ग्रंथियों की संरचना

त्वचा की संरचना में यह ग्रंथियां चर्म के नीचे रहती है । ये हथेली और तलुओं में काफी यानिकी अधिक संख्या में पाई जाती है । हथेली की एक वर्ग इंच त्वचा में 3500 स्वेद छिद्र होते हैं । सारे शरीर में लगभग पच्चीस लाख ( 25,00,000) स्वेद ग्रंथियां होती हैं ।

स्वेद ग्रंथियों के कार्य :

त्वचा की संरचना में स्वेद ग्रंथियों का अहम् योगदान होता है, स्वेद ग्रंथियों में एक प्रकार का तरल पदार्थ बनता है, जिसे स्वेद (पसीना) कहते हैं । यह पसीना उपचर्म के सूक्ष्म छिद्रों (रोमकूपों) के रास्ते से शरीर से बाहर निकलता है ।

वसा या तेल ग्रंथि की संरचना:

त्वचा की संरचना में ये ग्रंथियां चर्म के ऊपर के भाग में रहती हैं । ये नन्हीं-नन्ही थैलियों की तरह होती हैं । ये चेहरे की त्वचा में अधिक होती है, इसलिए इनके कारण ही हमारे चेहरे चिकने और चमकदार रहते हैं ।

वसा या तेल ग्रंथि के कार्य :

वसा या तेल ग्रंथियों की दीवारें एक प्रकार की चिकनी चीज पैदा करके उसे बालों की जड़ों में पहुंचाती रहती हैं, जिससे हमारे बाल चिकने और चमकदार बने रहते हैं । ये वसा या तेल ग्रंथियां हाथ की हथेलियों और पैरों के तलुओं में नहीं पाई जाती है ।

त्वचा के कार्य (Function of Skin in Hindi):

जहाँ तक त्वचा के कार्यों का सवाल है यह हमारे शरीर को सुंदर रखती है । इससे हमारा सारा शरीर ढका रहता है । त्वचा हमारे शरीर के मांस आदि कोमल चीजों की भी रक्षा करती है । यह रोग उत्पन्न करने वाले कीटाणुओं और विषों को शरीर के अंदर घुसने से रोकती है । जब शरीर के किसी भाग से त्वचा कट जाती है तभी त्वचा के कटने पर ही ये कीटाणु शरीर के अंदर जाकर रोग पैदा करते हैं,  त्वचा के द्वारा सर्दी, गर्मी, कोमलता और कठोरता का अनुभव होता है । त्वचा की संरचना की बात करें तो यह एक शोधक अंग है, क्योंकि इससे पसीने, बाल और नख के रूप में कुछ-कुछ मलिन पदार्थ शरीर से बाहर निकलते रहते हैं । इससे रोमकूपों द्वारा कुछ कार्बन डाईआक्साइड गैस शरीर के बाहर निकलती है और उसके बदले में आक्सीजन वायु इसमें प्रविष्ट होती है । स्किन सूर्य की किरणों से हमारी रक्षा करती है । हमारी त्वचा के रंजक कण शरीर के भीतरी अंगों को सूर्य की तीव्र किरणों से बचाते है । यह शरीर की ऊष्मता को स्थिर रखती है और मौसम के अनुसार ऊष्णता का नियंत्रण करती है । हमारी त्वचा की संरचना इस प्रकार हुई है की यह शरीर की ऊष्णता को स्थिर रखकर हमारे जीवन को बचाए रखती है ।

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