सोडियम के स्रोत कार्य फायदे एवं कमी के लक्षण

सोडियम क्लोराइड यह सामान्य नमक या साल्ट का रासायनिक नाम है इसका प्रयोग मानव तब से ही करता आ रहा है जब से इतिहास के अभिलेख प्राप्त हुये हैं। किसी 65 कि.ग्रा. के भार वाले स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सोडियम क्लोराइड की मात्रा 256 ग्राम होती है । इसमें से लगभग आधी मात्रा कोशिका के बाहर द्रव में पाई जाती है। लगभग 96 ग्राम हड्डियों में पाया जाता है तथा कोशिकाओं में 32 ग्राम से कम पाया जाता है ।

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सोडियम क्या है

sodium सफेद-चांदी रंग का, उच्च प्रतिक्रियात्मक, क्षारीय, धात्विक तत्व होता है। यह कोमल तथा ढलनीय होता है। साधारणतया यह शरीर में तथा बाहर अन्य तत्वों के मिश्रण में पाया जाता है। यह जीवन के लिये आवश्यक होता है तथा कोशिकाओं के बाहर द्रवों में उपस्थित होता है। सामान्य व्यक्ति में sodium लगभग पूरी तरह से पेट-आंत के मार्ग से अवशोषित होता है लेकिन उल्टी तथा डायरिया होने के कारण इसमें कमी आ सकती है। सेवित किए गए sodium की अधिकांश मात्रा का उत्सर्जन गुरदों द्वारा किया जाता है तथा इसकी अलग-अलग मात्रा त्वचा तथा मल द्वारा भी उत्सर्जित होती है। शरीर में sodium का संतुलन हारमोन एल्डोस्टेरोन द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिसका उत्सर्जन एड्रीनल ग्रन्थि द्वारा होता है। जब sodium की आवश्यकता बढ़ जाती है तो एल्डोस्टेरोन के उत्सर्जन में वृद्धि हो जाती है जिसके कारण गुरदों की नलिकाओं द्वारा sodium का अवशोषण बढ़ जाता है। त्वचा से होने वाली सोडियम की हानि उस समय बढ़ सकती है जब गरम वातावरण में कठोर शारीरिक परिश्रम के कारण अत्यधिक पसीना आता है। ऐसी परिस्थितियों में साल्ट की क्षति के कारण थकान हो सकती है। ऐसी अवस्था में साल्ट की गोलियों को पानी की अधिक मात्रा के साथ लेना चाहिये।

सोडियम के शरीर में कार्य:

सोडियम शरीर के कोशिका-के बाहर द्रव में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैटाइयान (cation) होता है। यह अन्य इलेक्ट्रोलाइट, विशेषकर पोटाशियम के साथ अंतर-कोशिका द्रव में कार्य कर ओस्मोटिक दाब को नियमित करता है तथा शरीर में पानी के उचित संतुलन को बनाता है। यह एसिड और बेस के संतुलन को बनाए रखने, नाड़ी का संचार करने तथा पेशियों को आराम देने वाला प्रमुख कारक है। यह ग्लुकोज़ के अवशोषण तथा कोशिका झिल्लियों में अन्य पोषक तत्वों के संचार के लिये भी आवश्यक होता है।

सोडियम के स्रोत (Sources of Sodium in Hindi):

कमलककड़ी तथा पत्ते वाली सब्ज़ियां Sodium में समृद्ध होती हैं साथ ही अनेक प्रकार की दालें तथा फलियां भी इसके समृद्ध स्रोत हैं । फल, मछली तथा मांस में भी Sodium की पर्याप्त मात्रा मिलती है।  इसके अलावा श्रेणी के आधार पर स्रोतों की लिस्ट निम्नलिखित है।

अनाज जिनमें सोडियम पाया जाता है

  • कच्ची मक्का
  • गेहूं का आटा
  • गेहूं
  • सूखी मक्का
  • रागी
  • पोहा
  • बाजरा
  • ज्वार

दालें एवं फलियाँ जिनमें सोडियम पाया जाता है

  • अरहर
  • काला चना
  • मसूर
  • मोठ
  • दली हुई अरहर
  • मूंग

सब्जियाँ जिनमें सोडियम पाया जाता है

  • कमलककड़ी
  • चौलाई
  • मेथी
  • मूली
  • पालक
  • सलाद के पत्ते
  • गोभी
  • हरा टमाटर
  • कच्चा टिंडा

फल जिनमें सोडियम पाया जाता है

  • लीची
  • खरबूजा
  • पका हुआ केला
  • अन्नानास
  • सेब
  • तरबूज
  • पका आम
  • मछली व मांस
  • रोहू
  • भेटकी
  • कोइ
  • मांगरी
  • सिंघी
  • हिलसा
  • कटला
  • मटन पेशी

इन सबके अलावा गाय के दूध, दही, भैंस के दूध में भी सोडियम पाया जाता है ।

सोडियम की कमी के कारण लक्षण

  • अत्यधिक पसीना आना,
  • मूत्र उत्सर्जित करने वाले तत्वों का दीर्घकालिक प्रयोग,
  • लम्बे समय तक डायरिया होने के कारण शरीर में सोडियम की कमी हो सकती है
  • इसकी कमी से उल्टी हो सकती है ,
  • पेशीय कमजोरी हो सकती है ,
  • गरमी के कारण थकान तथा मानसिक अरुचि हो सकते हैं।

सोडियम के स्वास्थ्य लाभ:

sodium क्लोराइड की अल्प कमी में, लगभग 400 मिली पानी या किसी फल के जूस में एक चम्मच सादा नमक लेने से तुरंत स्वास्थ्य लाभ मिलता है। लेकिन गंभीर अवस्था में सोडियम क्लोराइड का प्रयोग घोल के रूप में अंतरशिरा मार्ग से दिया जा सकता है ।

सावधानियां (Precautions) :

अत्यधिक sodium क्लोराइड से शरीर में होने वाले नकारात्मक प्रभाव को नमक का प्रयोग न करने से ही ठीक किया जा सकता है । अधिक नमक वाले भोज्य पदार्थों से बचना चाहिए जैसे नमकीन सूखे मेवे, बिस्कुट, मांस, मछली, चिकन, अंडे, चीज़, सूखे फल, पालक, गाजर तथा मूली । लेकिन कम Sodium वाले भोज्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है जैसे अनाज, चीनी, शहद, ताजे फल, बैंगन, पत्तागोभी, फूलगोभी, टमाटर, आलू, प्याज़, मटर तथा कद्दू। Sodium की अतिरिक्त मात्रा की आपूर्ति एक सामान्य समस्या है। क्योंकि भोज्य Sodium क्लोराइड या सादे नमक का प्रयोग भोजन में अधिक होता है। अत्यधिक सोडियम के कारण पानी का भरना, उच्च रक्तचाप या पेट का अल्सर भी हो सकता है। इसका अर्थ यह हुआ कि भोजन में कम मात्रा में नमक का सेवन करना चाहिए ।

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