सुन्दर एवं सुडौल स्तन बनाने के प्रभावी उपाय

सुन्दर एवं सुडौल स्तन बनाने के प्रभावी उपाय

सुडौल स्तन श्रेष्ठतम नारी के प्रतीक माने जाते हैं, नारी की सुन्दरता की यदि हम बात करें तो उनके इस सौन्दर्य में उनके स्तनों के आकार का विशेष महत्व होता है । नारी के नैन नक्श कितने भी सुंदर क्यों न हो लेकिन यदि उसके वक्षस्थल भरे हुए सुदृढ़ एवं उन्नत नहीं हैं तो उनके अभाव में नारी की सुन्दरता में कमी आ सकती है | उन्नत एवं सुडौल स्तन अर्थात वक्षस्थल वर्तमान में हर नारी की चाहत होती है ताकि उसकी सुन्दरता में निखार आ सके | हालांकि यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी की सुडौल एवं उन्नत स्तन स्त्री के आभूषण होते हैं । क्योंकि उन्नत एवं सुडौल स्तनों वाली स्त्रियाँ पुरुषों में खास तौर पर लोकप्रिय होती हैं क्योंकि सम्भोग या रति क्रिया के दौरान सुडौल एवं उन्नत वक्षस्थ्लों का बेहद महत्व होता है और यही कारण होता है की पुरुषों को अपनी ओर आकर्षित करने में भी स्तनों का एक विशेष योगदान होता है | उन्नत एवं सुडौल स्तन से हमारा अभिप्राय गोल, कठोर एवं पूर्ण विकसित स्तनों से है | जिन पर प्रत्येक नारी नाज कर सकती है हालांकि प्राय यह अवश्य देखा गया है की उचित देखभाल न मिलने के कारण बहुत बार स्त्रियों के स्तन बहुत छोटे रह जाते हैं या फिर बहुत मोटे होकर लटकने लग जाते हैं जिससे उस स्त्री का सौन्दर्य नष्ट हो सकता है और उसमे हीन भावना पैदा होने का खतरा रहता है | इसलिए ब्यूटी टिप्स नामक इस श्रेणी में आज हम उन्नत एवं सुडौल स्तन बनाने के कुछ उपायों पर नज़र डालने की कोशिश करेंगे |

सुडौल स्तन बनाने के उपाय

सुडौल स्तन बनाने के लिए घरेलू टिप्स:

वह स्त्री जो अपने स्तनों को हमेशा उन्नत एवं सुडौल देखना चाहती हैं उन्हें बता दें की नीचे दिए जाने वाले उपाय उन्नत एवं सुडौल स्तन बनाये रखने में मददगार साबित होते हैं |

  • स्त्रियों को चाहिए की वह फलों एवं दूध के साथ पौष्टिक आहार का सेवन करें |
  • वक्ष स्थलों पर हलके हाथों से नीचे से ऊपर की ओर जैतून के तेल से मालिश की जा सकती है |
  • उन्नत एवं सुडौल स्तन के लिए स्त्रियों को चाहिए की वे कुछ इस तरह के व्यायाम करें जिनमें हाथों का उपयोग अधिक हो |
  • व्यायाम करते वक्त गहरी सांस लेकर अंदर रोकनी चाहिए और धीरे-धीरे छोड़नी चाहिए ।
  • स्तनों को सुडौल एवं उन्नत बनाने की इच्छुक महिलाएं चाहें तो हारमोंस विशेषज्ञ से सलाह ले सकती हैं ।
  • आकर्षण ज़माने के लिए स्त्री चाहे तो ऐसी ब्रा का चुनाव कर सकती हैं जिसमे उसके स्तन कुछ मोटे दिखाई दें ।
  • मोटापा से प्रभावित स्त्रियों को मोटापा दूर करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए ताकि स्तनों से भी चर्बी कम हो पाए और स्तन लटके नहीं |
  • सलाद व हरी सब्जियों का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करें ।
  • स्त्रियों को चाहिए की वह अपने स्तनों की अधिक मालिश से हमेशा बचें ।
  • यदि महिला का दूध पीने वाला बच्चा है तो उसे दूध अवश्य पिलाना चाहिए क्योंकि इस क्रिया से स्तन सही आकार में रहते हैं |
  • उन्नत एवं सुडौल स्तनों के लिए स्त्री को चाहिए की वह सम्भोग या रतिक्रिया करते वक्त सावधानी बरते और इस बात का ध्यान रखे की पुरुष साथी द्वारा स्तनों को जोर से नहीं मसला जाना चाहिए |
  • लड़कियों को चाहिए की वे मासिक धर्म शुरू होते ही उचित नाप की ब्रा पहनना शुरू अवश्य कर दें ।

ब्रेस्ट बढ़ाने या उन्नत करने के लिए कुछ अन्य सावधानियां:

  • स्त्रियों को चाहिए की वे अत्यधिक गर्म पानी से स्नान कभी न करें ।
  • बच्चों को दूध पिलाते वक्त स्तनों को खीचने की कोशिश बिलकुल न करें |
  • स्तनों की मालिश करते वक्त हमेशा ध्यान रखे की मालिश हमेशा हल्के हाथ से नीचे से ऊपर की ओर ही होनी चाहिए । क्योंकि नीचे की ओर मालिश करने से स्तन लटक सकते हैं |
  • किसी भी प्रकार की शारीरिक कमजोरी होने पर पौष्टिक आहार लेना बिलकुल न भूलें ।
  • स्तनों को बहुत ज्यादा रगड़ने की कोशिश भी बिलकुल न करें |

उन्नत एवं सुडौल स्तन के लिए ब्रेस्ट इम्प्लांटेशन (Breast Implantation for right shape of breasts in Hindi):

ब्रेस्ट इम्प्लांटेशन के चलते वर्तमान में ऐसी महिलाएं जिनके स्तनों का पूर्ण विकास नहीं भी हुआ है अर्थात उनके स्तनों का आकार छोटा एवं अर्धविकसित है तब भी महिलाएं कुंठा या हीन भावना का शिकार नहीं होती हैं | क्योंकि ब्रेस्ट इम्प्लांटेशन एक ऐसी तकनीक है जिसके माध्यम से कोई भी स्त्री जब चाहे कॉस्मेटिक सर्जन के पास जाकर सर्जरी द्वारा अपने अर्धविकसित वक्षस्थल को उन्नत एवं सुडौल स्तन में परिवर्तित करा सकती है | जहाँ तक ब्रैस्ट सर्जरी की बात है यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है |

  1. रिडक्शन मेमोप्लास्टी:

ब्रैस्ट सर्जरी का यह प्रकार बड़े स्तनों को छोटा करने अर्थात उन्हें सही आकार देने के लिए की जाती है | इस सर्जरी को करते वक्त इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है की सर्जरी की प्रक्रिया में मिल्क डॉट्स खराब न हों | ब्रैस्ट सर्जरी का यह प्रकार वैसे तो अधिकतर युवाओं एवं अविवाहितों के लिए है लेकिन यदि बड़ी उम्र की महिला ऐसा कराना चाहती हैं तो उनकी सर्जरी से पहले निप्पल उतार लिए जाते हैं और सर्जरी के बाद इन्हें उसी जगह अर्थात सही जगह पर पुनः ड्राफ्ट कर दिया जाता है जिससे इसके बाद मिल्क डॉट्स काम करना बंद कर देते हैं |

  1. औग्मेंटेशन मेमोप्लास्टी:

ब्रैस्ट सर्जरी के इस प्रकार को भी उन्नत एवं सुडौल स्तन बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है अर्थात जहाँ उपर्युक्त दिए गए सर्जरी का प्रकार स्तनों के आकार को कम करके सही आकार देने के लिए था | ब्रैस्ट सर्जरी का यह प्रकार छोटे स्तनों अर्थात अविकसित स्तनों को विकसित करने की क्रिया से जुड़ा हुआ है | इस प्रक्रिया में महिला के डील डौल या कद काठी के अनुसार उसके अविकसित स्तनों को तीन प्रकार से उन्नत एवं सुडौल स्तन में परिवर्तित किया जा सकता है |

  • महिला के शरीर के किसी अन्य भाग की चर्बी को स्तनों में भर दिया जाता है |
  • सलाइन से इसमें गुब्बारे के समान वाले पदार्थ में पानी भरकर स्तनों में डाला जा सकता है |
  • तीसरे प्रकार में अर्थात उन्नत एवं सुडौल स्तन बनाने की इस तीसरी विधि में सिलीकॉन जैल फिल्ड को स्तनों में रोप दिया जाता है इस प्रकार का यह तरीका पहले बताये गए दो तरीकों से अच्छा माना गया है कहा यह जाता है की ब्रेस्ट में मेडिकेटेड सिलीकॉन जैल डालने से किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होती है इसलिए इसे स्तनों में इम्प्लांट करा देने के बाद भी बच्चों को फीड कराने में कोई दिक्कत नहीं होती है |

मेस्टोपैक्सी सर्जरी द्वारा लम्बे एवं लटके स्तनों का उपचार :

मेस्टोपैक्सी नामक यह सर्जरी तब की जाती है, जब स्त्री के स्तन काफी लंबे या लटके हुए होते हैं, इसमें स्तनों के टिश्यू को टाइट करके त्वचा के साथ टाइट कर दिया जाता है । लाइपोसक्शन द्वारा स्तन छोटे करने के लिए स्तनों की चर्बी को पिघलाकर बाहर निकाल दिया जाता है ।

धंसे हुए निप्पल का ईलाज :

उपर्युक्त बताये गए उन्नत एवं सुडौल स्तन के उपायों को करते वक्त यदि निप्पल धंस जाते हैं तो इन धंसे हुए निप्पलों का ईलाज करने के लिए एक्शन मशीन को निप्पल में लगाकर खींचा जाता है और परे ऐसा देखा गया है की नियमित रूप से ऐसा करने पर निप्पल ठीक हो जाया करते हैं |

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