टॉर्च टेस्ट क्या है किन बीमारियों की जांच के लिए किया जाता है

टॉर्च टेस्ट को कभी-कभी टेस्ट पैनल भी कहते हैं । इसमें खून की जांच करके उसमें मौजूद एण्टीबॉडीज व रक्त में उनके स्तर की जांच की जाती है । इस टेस्ट का नाम पांच बीमारियों के पहले अक्षर से आता है, जो निम्नलिखित हैं

  • Toxoplasmosis
  • Other Infections(usually include Syphilis, Hepatitis B, Coxsackie Virus etc.
  • Rubella
  • Cytomegalovirus(CMV)
  • Herpes Simplex Virus (HSV)

उपर्युक्त पांचों बीमारियां भ्रूण को हानि पहुंचाती हैं, जन्मजात दोष पैदा कर सकती हैं व गर्भपात का कारण भी बन सकती हैं । अतः यह परोक्ष रूप से फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं । अत: इनफर्टिलिटी उपचार के दौरान डॉक्टर यह टेस्ट भी करते हैं ।

टॉर्च टेस्ट

टॉर्च टेस्ट द्वारा बीमारियों की जांच

जिन पांच बीमारियों की टॉर्च टेस्ट द्वारा जांच की जाती है, वे निम्नलिखित हैं

  1. Toxoplasmosis :

यह बीमारी Toxoplasma Gondil के कारण होती है । यह एक ऐसा परजीवी है, जो मां के अंदर इन्फेक्शन युक्त बिल्लियों से, पास्च्युरीकृत न किये गये दूध से अथवा मांस के जरिये आ सकता है । यह मां के द्वारा बच्चे में प्लेसैन्टा के माध्यम से जाता है तथा यह आंखों व केन्द्रीय स्नायु तंत्र का इन्फेक्शन पैदा करती है । यदि मां को यह इन्फेक्शन गर्भावस्था के अंत में होता है, तो इसके भूण में स्थानान्तरित होने की संभावनाएं अधिक होती हैं । यदि यह इन्फेक्शन मां को गर्भावस्था के प्रारंभ में ही हो जाता है, तो गर्भपात अथवा बच्चे में जन्मजात दोष होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं ।

  1. Syphilis :

यह बीमारी Treponema Pallidum (spiral or coil shaped bacterium) के कारण होती है । यह वयस्कों में संभोग द्वारा होता है । इस बीमारी के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए, इसे टॉर्च पैनल में शामिल किया गया है । यह भूण के जीवन के लिये घातक बीमारी है । यह समय से पूर्व प्रसव, गर्भपात व मृत शिशु के जन्म का कारण बनती है । इस बीमारी से युक्त बच्चों की मृत्यु दर 54 प्रतिशत होती है ।

  1. Rubella :

यह एक ऐसी बीमारी है, जो मौसम पर निर्भर करती है । यह अधिकतर बसंत मौसम में होती है । इसके कारण बच्चों में जन्मजात दोष होते हैं । उनमें दोष बाद में बचपन में भी विकसित हो सकते हैं ।

  1. Cytomegalovirus(CMV) :

यह बीमारी शरीर से निकलने वाले स्राव व संभोग से होती है । इस बीमारी से युक्त नवजात शिशुओं की मृत्यु दर 20 से 30 प्रतिशत होती है । जो बच्चे इस बीमारी से बच भी जाते हैं, उनमें से 15 प्रतिशत को सुनने की समस्या, 30 प्रतिशत में मानसिक असामान्यता आदि बीमारियां पायी जाती हैं ।

  1. Herpes Simplex Virus (HSV):

यह मनुष्यों में पाया जाने वाला बहुत ही सामान्य वाइरल इन्फेक्शन है, जो मुंह व सेक्स के माध्यम से हो सकता है । इस इन्फेक्शन से 80 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु जन्म की प्रक्रिया के दौरान ही हो सकती  है । वाइरस बच्चे के अंदर आंख, मुंह, त्वचा व श्वसन के द्वारा प्रविष्ट हो सकते हैं । यदि उपचार ना किया जाये, तो इसकी मृत्यु दर 80 प्रतिशत होती है । जिन स्त्रियों में इन पांचों में से किसी बीमारी के lgM antibody पाये जाते हैं, इसका तात्पर्य है कि उन्हें वर्तमान में यह इन्फेक्शन है, जिनमें lgG antibody पाये जाते हैं, इसका मतलब है कि यह इन्फेक्शन उसको पहले हुआ था ।

टॉर्च टेस्ट की सलाह किन्हें दी जाती है ? :

यदि डॉक्टर को गर्भवती स्त्री में उपर्युक्त में से किसी एक बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह देते हैं । यदि किसी स्त्री का बार-बार गर्भपात हो जाता है व Secondary Infertility पायी जाती है, तो डॉक्टर इस टॉर्च टेस्ट की सलाह देते हैं ।

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1 thought on “टॉर्च टेस्ट क्या है किन बीमारियों की जांच के लिए किया जाता है”

  1. Hiii, My 3.5 years old daughter died from CMV infection which has caused 80% of brain damage.

    Can we go for another baby plan. Please advise.

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