Ultrasound test अल्ट्रासाउंड जांच के प्रकार उपयोग एवं करने की विधि.

Ultrasound का नाम शायद सभी ने अपने जीवन में कभी न कभी अवश्य सुना होगा वह इसलिए क्योंकि शरीर में विभिन्न रोगों की स्थिति जानने के लिए चिकित्सकों द्वारा Ultrasound Test करने को कहा जाता है | अल्ट्रासाउंड नामक यह जांच एक स्कैनिंग जांच है जिसे सोनोग्राफी भी कहा जाता है | अल्ट्रासाउंड नामक इस तकनीक का प्रयोग शरीर में शरीर के अंगों एवं Tissues इत्यादि को देखने एवं उनकी स्थिति जानने के लिए किया जाता है | इस तकनीक के अंतर्गत शरीर के अन्दर निर्मित अंगों एवं उतकों की तस्वीर देखने के लिए इसमें उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगो का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन ये तरंगे इन्सान को सुनाई नहीं देती | Ultrasound process के दौरान जब उच्च आवृत्ति वाली ध्वनी तरंगे शरीर में प्रविष्ट करायी जाती हैं तो कुछ तरंगों को शरीर में उपलब्ध उतकों (Tissues) द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है और कुछ तरंगे टकराकर वापस आती हैं इसी दौरान इन वापस आने वाली तरंगो को अल्ट्रासाउंड मशीन द्वारा माप लिया जाता है और उस क्षेत्र विशेष को छवि के रूप में रूपांतरित कर लिया जाता है |

Ultrasound-test-procedure

अल्ट्रासाउंड के प्रकार Types of Ultrasound in Hindi:

सामान्य तौर पर यदि हम देखेंगे तो हम पाएंगे की सभी प्रकार के अल्ट्रासाउंड लगभग एक जैसे ही होते हैं लेकिन शरीर के अंगों के आधार पर तकनिकी रूप से इन्हें अलग अलग नाम दिए गए हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

  1. Doppler Ultrasound:

एक Doppler Ultrasound एक  ऐसा परीक्षण अर्थात जांच होता है जिसमे व्यक्ति की धमनियों और नसों के माध्यम से रक्त प्रवाह की मात्रा को उच्च-आवृत्ति वाले ध्वनि तरंगों का उपयोग करके मापने की प्रक्रिया की जाती है | इसमें सामान्यतया ऐसी धमनियों एवं नसों का परीक्षण किया जाता है जो हाथों और पैरों को रक्त की आपूर्ति करते हैं | डॉपलर अल्ट्रासाउंड नामक इस परीक्षण से धमियों या रक्त वाहिका में असमान्य प्रवाह, संवहनी प्रवाह, रक्त प्रवाह इत्यादि का अध्यन किया जाता है |

  1. Obstetric Ultrasound (प्रसूति अल्ट्रासाउंड):

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है ऑब्स्ट्रेटिक अल्ट्रासोनोग्राफ़ी गर्भावस्था में मेडिकल अल्ट्रासोनोग्राफ़ी का ही उपयोग है, जिसमें उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग महिला के गर्भाशय में विकासशील भ्रूण या भ्रूण के वास्तविक समय के दृश्य या चित्र बनाने के लिए किया जाता है। साधारण शब्दों में हम यदि हम बाते करें तो ऑब्स्ट्रेटिक अल्ट्रासोनोग्राफ़ी यह पता लगाने में मदद करती हैं की गर्भाशय में बच्चे की स्थिति क्या है और महिला का प्रसव का समय क्या रहेगा |

  1. 3d and 4d ultrasound:

3d and 4d ultrasound अल्ट्रासाउंड का उन्नत रूप हैं कहने का आशय यह है की पारम्परिक अल्ट्रासाउंड जैसे 2D ultrasound के मुकाबले इनमे चित्रों को विभिन्न द्रष्टिकोण से साफ़ एवं स्पष्ट देखा जा सकता है | जैसे यदि किसी गर्भस्थ महिला का थ्री डी अल्ट्रासाउंड किया जाता है यह गर्भ में पल रहे बच्चे की 3d फोटो जारी करता है जिसमे बच्चा किस स्थिति में है स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है और फोर डी अल्ट्रासाउंड करने पर बच्चे के चलचित्र अर्थात वह क्रियाएं जो बच्चा पेट के अन्दर करता है देखी जा सकती हैं |

  1. Echocardiogram Ultrasound:

Echocardiogram नामक यह अल्ट्रासाउंड ह्रदय की जांच करने के लिए किया जाता है इस परीक्षण को विशेष तौर पर प्रशिक्षित तकनीशियन जिसे कार्डियक sonographer भी कहा जाता है द्वारा अंजाम दिया जाता है | इसमें ह्रदय को रक्त पहुँचाने वाली रक्त वाहिकाओं के संकरी होने की भी जांच की जाती है |

  1. Carotid Ultrasound:

Carotid Ultrasound नामक यह परीक्षण गर्दन में उपलब्ध कैरीटीड धमनियों (जिनका काम ह्रदय से मस्तिष्क की ओर रुधिर ले जाने का होता है) की तस्वीरों का निर्माण उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगों का उपयोग करके किया जाता है | इस परीक्षण के अंतर्गत ह्रदय से मस्तिष्क की ओर जाने वाली रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह की जांच की जाती है इसके लिए Carotid Ultrasound के माध्यम से तस्वीरे ली जाती हैं |

  1. Transvaginal ultrasound:

Transvaginal ultrasound नामक इस परीक्षण में उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग महिला के आंतरिक अंगों जैसे फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, गर्भाशय ग्रीवा और योनि इत्यादि की छवियों को बनाने के लिए किया जाता है | इस इमेजिंग परीक्षण की मदद से महिला के विभिन्न अंगों में असमानताओं का पता लगाकर उसका इलाज किया जा सकता है | Transvaginal ultrasound को एक प्रकार का पेल्विक अल्ट्रासाउंड भी कह सकते हैं जिसमे चिकित्सकों द्वारा महिला के प्रजनन अंगों की जांच की जाती है |

अल्ट्रासाउंड के उपयोग Uses of Ultrasound test in Hindi:

चूँकि अल्ट्रासाउंड नामक इस परीक्षण में एक्स रे या सीटी स्कैन की तरह का रेडिएशन अर्थात विकिरण पैदा नहीं होता है | इसलिए इसे गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की स्थिति जांचने के लिए अधिकतर उपयोग में लाया जाता है | लेकिन इसके इन सबके अलावा और भी Uses अर्थात उपयोग हैं जिनका संक्षिप्त वर्णन कुछ इस प्रकार से है |

  • पित्ताशय की थैली में रोग का पता करने के लिए चिकित्सक द्वारा अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा जा सकता है |
  • रुधिर नलिकाओं में रक्त प्रवाह का मूल्यांकन करने के लिए चिकित्सक द्वारा अल्ट्रासाउंड कराने को कहा जा सकता है |
  • शरीर के किसी हिस्से में ट्यूमर इत्यादि का पता करने के लिए भी इसका Use किया जा सकता है |
  • थायराइड ग्रंथि की जांच के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है |
  • ह्रदय से मस्त्तिष्क की ओर प्रवाहित होने वाले रक्त प्रवाह को मापने के लिए भी अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है |
  • जननांग और पौरुष ग्रन्थि में असमान्यता का पता करने के लिए भी ultrasound test चिकित्सक द्वारा परामर्शित किया जा सकता है |

अल्ट्रासाउंड कैसे किया जाता है How accomplished the ultrasound test:

हालांकि शरीर के अलग अलग भागों का अल्ट्रासाउंड होने पर चिकित्सक द्वारा समबन्धित व्यक्ति को अलग अलग निर्देश दिए जा सकते हैं जैसे यदि किसी का पेट का अल्ट्रासाउंड होना हो तो उसे 6-8 घंटे पहले से कुछ न खाने के निर्देश दिए जा सकते हैं | और बाद में अल्ट्रासाउंड परीक्षण को अंजाम तक पहुँचाया जा सकता है |

  • यदि कोई व्यक्ति यह परीक्षण किसी अस्पताल में करा रहा हो तो अस्पताल द्वारा उसे गाउन पहनने को दिया जा सकता है हालंकि यह अस्पताल एवं व्यक्ति के शरीर का वह भाग जिसका अल्ट्रासाउंड होना हो पर निर्भर करता है |
  • गाउन पहन लेने के बाद व्यक्ति को टेबल पर लेटने को कहा जा सकता है |
  • उसके बाद शरीर के जिस हिस्से का अल्ट्रासाउंड होना हो वहां पर चिकित्सक द्वारा गरम जैल लगाई जाती है |
  • उसके तुरंत बाद उस जैल के ऊपर Ultrasound wand घुमाई जाती है ताकि तस्वीरें ली जा सकें |
  • इसी बीच चिकित्सक द्वारा कुछ तस्वीरें लेते वक्त सम्बंधित व्यक्ति को सांस रोकने के लिए कहा जा सकता है |
  • इस परीक्षण को पूर्ण होने में 20-40 मिनट का समय लगता है और व्यक्ति के घर वापस लौटने से पहले उसे परीक्षण की रिपोर्ट मुहैया करा दी जाती है |

अल्ट्रासाउंड परीक्षण की कुछ मुख्य विशेषताएं:

  • Ultrasound test एक दर्दरहित परीक्षण है जिसको करने के लिए सूई, इंजेक्शन या किसी अन्य सर्जरी या चीर, फाड़ की बिलकुल आवश्यकता नहीं है |
  • अल्ट्रासाउंड परीक्षण किसी प्रकार का कोई विकिरण पैदा नहीं करता है इसलिए यह सुरक्षा के लिहाज से एक्स रे, सीटी स्कैन इत्यादि से भी सुरक्षित है |
  • अल्ट्रासाउंड शरीर में उपलब्ध मुलायम नलिकाओं, कोशिकाओं के लिए भी ठीक माना जाता है क्योंकि यह इनके मालिश करने की तरह भी काम करता है |
  • जिस अंग विशेष का अल्ट्रासाउंड होता है उस प्रभाव की वजह से उस अंग में रुधिर प्रवाह बढ़ता है, जिससे दर्द, सूजन इत्यादि में आराम महसूस होता है |
  • एक्स रे की तुलना में अल्ट्रासाउंड बेहद अधिक प्रभावशाली है जो शरीर के Soft Tissues के चित्रों को भी साफ़ एवं स्पष्ट तौर पर दिखाता है |
  • यह भी पढ़ेंसीटी स्कैन क्या है कैसे किया जाता है?एमआरआई टेस्ट क्या है और कैसे किया जाता है?

About Author:

HBG Health desk is a team of Experienced professionals holding various skills. They are expert to do research online and offline on health, beauty, wellness, and other components of health in Hindi.

Leave A Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *