विटामिन ए के फायदे स्रोत कमी के लक्षण | Vitamin A Guide Hindi.

विभिन्न विटामिनों की यदि हम बात करें तो Vitamin A नामक इस विटामिन का आविष्कार सबसे पहले हुआ था । यह एक अल्कोहल वर्गीय पदार्थ है यह विटामिन रंगहीन और वसा में घुलनशील है । Vitamin A का  प्राथमिक उद्गम स्थल वनस्पति जगत् है । इस विटामिन की कमी से होने वाले लक्षणों का उल्लेख बहुत प्राचीन समय से मिलता आया है ।

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VITAMIN A के शरीर में उत्पन्न होने की प्रक्रिया:

वनस्पतियों में क्लोराफिल नामक एक हरे रंग के पदार्थ के अतिरिक्त कुछ लाल और कुछ पीले रंग के पदार्थ भी पाये जाते हैं – इनको कैरोटीन्वायण्ड नाम के अन्तर्गत रखा जाता है। इनके विभिन्न प्रकारान्तरों में अल्फा, वीटा और गामा कैरोटीन तथा क्रिप्टोजैन चीन प्रमुख हैं। ये पदार्थ शरीर में पहुँचकर सम्भवत: यकृत में उपस्थित एक विशेष एन्जाइम (कैरोटिनेज) द्वारा विटामिन ‘ए’ में परिवतित हो जाते हैं। इनमें से कैरोटीन की बीटा प्रकारान्तर विटामिन ‘ए’ प्रवर्तन के लिए सर्वाधिक उपयोगी है, साथ ही वनस्पति जगत में सर्वाधिक व्यापक है। इस प्रकार निर्मित Vitamin A का 90% यकृत में संग्रहीत हो जाता है और शेष फेफड़ों और गुर्दों में।

Vitamin-A किन किन पदार्थों में अधिक पाया जाता है

  • Vitamin- A पशुजन्य खाद्य पदार्थ दूध, मक्खन, अण्डों में अपने असली स्वरूप में मिलता है और इस तरह वनस्पतियों से शरीर को कैरोटीन के द्वारा Vitamin-A बनाना पड़ता है। पशु जन्य आहारों से सीधे ही विटामिन ‘ए’ मिलता है।
  • विटामिन ‘ए’ की मात्रा का यूनिट के आधार पर वर्णन किया जाता है, क्योंकि अभी तक शरीर के बाहर यह विटामिन शुद्ध रूप से प्राप्त नहीं हो सका है अतएव इसकी यूनिट के लिए इसके प्रवर्तक पदार्थ के निश्चित परिमाण का उल्लेख किया जाता है।
  • विटामिन ‘ए’ की एक अन्तर्राष्ट्रीय यूनिट 6 माइक्रोग्राम बीटा कैरोटीन  में निहित बायोलोजिकल क्षमता के बराबर होती है। अमरीका में यू. एस. पी. यूनिट भी प्रयोग होती है। 100 U.S.P यूनिट 87 अन्तराष्ट्रीय यूनिट के बराबर होती है।
  • वनस्पतियों में यह विटामिन इस रूप में नहीं मिलता अपितु कैरोटीन के रूप में मिलता है जिसका एन्जाइम द्वारा पाचन होकर Vitamin-A बनता है। अत: केवल पशुजन्य खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिनमें परिवर्तित विटामिन ‘ए’ मिल सकता है।
  • ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें Vitamin- A पाया जाता हैं उनमे मुख्य रूप से मक्खन, यकृत (जिगर), अण्डे, मछली, मछली के यकृत से निकाले गये तेल (काड लिवर ऑयल, हेलिवट लीवर ऑयल आदि) आते हैं  ।
  • कैरोटीन के रूप में हरा शाक-भांजियों और फलों में यह विटामिन अनिवार्यत: रहता है। आम, पपीता, अलूचा, केला, खजूर, कमरख, अंजरी, हरा करेला, मटर, टमाटर, गुआर की फली, मक्का (कच्चा) पान पत्ता में इस रूप में मिलता है।
  • मूंगफली, पिस्ता, काजू, मूंग छिलका सहित, मसूर, अरहर छिलका सहित, सोयाबीन तथा बाजरा, ज्वार, गेहूँ (चोकर सहित आटा) चना छिलके सहित में कैरोटिन के रूप में विटामिन ‘ए’ मिलता है।
  • वनस्पतियों पर निर्भर रहने से विटामिन ‘ए’ अपने पूर्व रूप ‘कैरोटीन’ के रूप में मिलता है। शरीर इसका आत्मीकरण कर विटामिन ‘ए’ का निर्माण करता है।

Vitamin A की कमी के लक्षण:

Vitamin A की कमी के कारण होने वाले कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार से हैं |

  • Vitamin A की कमी से जुकाम हो जाना, नाक बहना, कान के रोग, फेफड़ों और श्वासनांगों में बार-बार संक्रमण हो जाना | हड्डियों और दाँत कमजोर हो जाना और इनका भली प्रकार न बढ़ना, चर्म शुष्क, खुरदरा होना |  चर्म पर छिलके उतरने लग जाना, जाँघों कमर के ऊपरी भागों और टाँगों पर बालों के स्थान मोटे हो जाना |
  • चर्म पर फोड़े-फुन्सी, कील चम्बल, मुंहासें निकलना तथा चर्म रोग बार-बार हो जाना |
  • आंखों का तेज प्रकाश को सहन न कर सकना, शाम या रात को कम दिखाई देना या अन्धा हो जाना |
  • इसकी कमी से आँखों में रूक्षता आ जाती है, आँसू घट जाते हैं, कनीनिका रूक्ष हो जाती है तथा दोनों नेत्र प्रकाश सहन नहीं कर सकते।
  • Vitamin A की कमी से युवकों में वृक्क या मूत्राश्य में पथरी बन जाती है। दाँतों में हड्डी वाला भाग उचित रीति से नहीं बन पाता। (इस विटामिन की कमी उस समय होती है जब भोज्य द्रव्यों में कैरोटीन नामक तत्व की न्यूनता हो जाती है) इसकी कमी से नेत्रों की पलकों के भीतर की कला (Mucous Mebrame) झिल्ली शुष्क होकर दरदरी हो जाती है |
  • विटामिन ‘ए’ शरीर में रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता पैदा करता है।
  • Vitamin A की कमी के कारण मौसम में परिवर्तन के समय बच्चों में खांसी, न्युमोनियाँ, बुखार, पेटदर्द, अपच, दस्त इत्यादि बीमारियाँ हो जाती हैं |
  • बच्चों के दांत निकलने में देरी होती है वजन घटता है त्वचा मोटी, खुरदरी, सूखी एवं कांतिहीन हो जाती है |
  • Vitamin A नामक यह विटामिन पानी में जल्दी से नहीं घुलता है किन्तु तेल, बसा एवं मोम में भली भांति घुल जाता है |
  • इस विटामिन की कमी से रोगी कार्य करने के काबिल तक नहीं रहता उसके नाख़ून आसानी से टूटने लगते हैं अंगों की भीतरी झिल्ली (Mucus Membrane) शुष्क हो जाती है | जिससे उनमे से आवश्यक तरल निकलना बंद हो जाता है |
  • पसीना निकलने वाले रोम कूप (छिद्र) बंद हो जाते हैं |

Vitamin A की आवश्यकता एवं लाभ:

  • मनुष्य की बाल्यावस्था, गर्भावस्था तथा संक्रामक रोग होने की अवस्था में Vitamin A की अत्यधिक आवश्यकता होती है। दुर्बल व्यक्तियों को संक्रामक रोग न हो जायें, इसलिए भी इस विटामिन को प्रयोग में लाया जा सकता है |
  • Vitamin A शरीर के कोशिकाओं का पालन पोषण करता है और नई कोशिकाओं को उत्पन्न करने में मदद प्राप्त करता है | यह विटामिन भूख बढ़ाता है तथा शरीर के पंचों तत्वों को शक्ति प्रदान करता है खासकर आँखों के रोगों को दूर कर दृष्टि को तेज करने में मदद करता है | नथुनों, फेफड़ों, के रोगों को दूर कर मनुष्य के लालन पालन में सहायक होता है |
  • Vitamin A खिलाते रहने से वृक्कों अर्थात किडनी में पथरियाँ बनने का डर नहीं रहता है।
  • मात्रा एंव स्वरूप – मौखिक रूप से वयस्क व्यक्ति को स्वस्थावस्था में दिन भर में 1000 से 3000 यूनिट्स Vitamin A’ की, बच्चों को दिन भर में 5000 से 8000 यूनिट्स तथा रोग की अवस्था में दिन में 50,000 से 1 लाख यूनिट् तक की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • बाज़ार में Vitamin A की कैपसूल भी आसानी से उपलब्ध हैं । कुछ औषधि बनाने वाली कंपनियों ने इनका इन्जेक्शनों का निर्माण कर बाजार में उपलब्ध कराया है, इनके प्रयोग से मात्र 4-5 दिन में ही आश्चर्यजनक लाभ प्राप्त होता है।
  • Vitamin A अमाशय और अन्तड़ियों की श्लैष्मिक कला पर प्रभाव डालकर उनकी शुष्कता को दूर करता है। उनमें खराशें होना और उचित मात्रा में तरल पैदा न होने की कमी को दूर करता है तथा उनको शक्तिशाली बनाकर पाचक रस (Gastric Juice) पैदा करने में सहायता प्रदान करता है।

Vitamin A की कमी से होने वाले रोग:

  • Vitamin A शरीर में कम हो जाने पर मनुष्य को शाम को, रात को और कम प्रकाश होने पर कम दिखाई देने लगता है। यह विटामिन अधिक या कम हो जाने पर सम्बंधित व्यक्ति को रतौंधी नामक रोग हो जाता है, जिसमें रात को कुछ भी दिखाई नहीं देता
  • आँख के ढेले का ऊपरी पर्दा जिसको – नेत्र श्लेष्म कला अथवा कजैक्टाइवा (Conjunctiva) कहते हैं, इस विटामिन की कमी से यह शुष्क हो जाता है तथा बार रोगी को कष्ट होता है।
  • आँख की पुतली खुश्क (शुष्क) हो जाती हैं। अन्त में दृष्टि अत्यधिक कमजोर होकर मनुष्य अन्धा हो जाता है।
  • Vitamin A का शरीर के विभिन्न अंगों की श्लैष्मिक कला (Mucus Membrane) पर विशेष प्रभाव पड़ता है।
  • शरीर में इस विटामिन की कमी हो जाने पर नाक, गले, मुहं, वायु प्रणालियों, फेफड़ों, वृक्कों, पुरुषों की जननेद्रियों और शरीर के समस्त अंगों की म्यूकस मेम्बरेन पर प्रभाव पड़ सकता है । Vitamin A की कमी से यह अंग अपने अन्दर पैदा होने वाले तरल पैदा करने में असमर्थ हो जाते हैं जिसके कारण यह अंग शुष्क हो जाते हैं और उनमें खराश पैदा होने लग जाती है। ऐसी अवस्था में विटामिन ‘ए’ खिलाकर रोगी के कष्ट सुगमतापूर्वक दूर किये जा सकते हैं।
  • इस विटामिन की कमी से बच्चों की बढ़ोतरी रूक जाती है। उनकी हड्डियाँ कमजोर और अपूर्ण रहती हैं, दाँत भी समय पर नहीं निकलते हैं।
  • Vitamin A की कमी से कमर, बाजुओं, टांगों व शरीर के अन्य भागों में पिन के सिर जैसा उभार उत्पन्न हो सकता है।

Vitamin A से भरपूर खाद्य पदार्थों की लिस्ट:

  • विटामिन ए से भरपूर खाद्य पदार्थों की लिस्ट कुछ इस प्रकार से है |
  • shark liver oil
  • halibut liver oil
  • टमाटर, गाज़र
  • काशीफल कद्दू जिसे पीला पेठा भी कहते हैं |
  • पका पपीता, पका आम नारंगी इत्यादि में भी Vitamin A प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं |
  • अंडा, मक्खन, घी, दूध |
  • बकरी या भेड़ की कलेजी में भी विटामिन ए की मात्रा पायी जाती है |
  • मूली के पत्ते, पुदीना, पालक |
  • पत्ता गोभी, हरा धनिया, हरी मैथी चुलाई के साग में भी Vitamin A की मात्रा पायी जाती है |

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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