Vitamin B12 के फायदे, स्रोत, कार्य एवं कमी के लक्षण

एक अधिकारिक जानकारी के मुताबिक 1948 में दो स्वतंत्र समूहों ने यकृत से Vitamin B12 को अलग किया । इंग्लैण्ड में ई. एल. स्मिथ तथा अमेरिका में एल. एफ. पार्कर इन दो समूहों का नेतृत्व कर रहे थे । हॉजकिन जिसने 1964 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार जीता था उसके सहकर्मियों ने निष्कर्ष निकाला कि यह विटामिन केवल फफूदी या फंगस तथा बैक्टीरिया से पैदा होता हैn। मानव की आंत में बैक्टीरिया भी इसका उत्पादन पर्याप्त मात्रा में करते हैं । यह एक प्रकार की रक्ताल्पता, जिसे पर्निसीयस रक्ताल्पता (pernicious anaemia) कहा जाता है, में लाभदायक होता है; पर्निसीयस रक्ताल्पता में इसका एक ग्राम का दस-लाखवां भाग भी पर्याप्त पाया गया है ।

vitamin b12 ki jankari

Vitamin B12 क्या है

Vitamin B12 पानी में आसानी से घुल जाता है । यह निष्क्रिय घोलों में उबालने का प्रतिरोधी है, लेकिन क्षारीय पदार्थों तथा रसायनों की उपस्थिति में नष्ट हो सकता है । अन्य कारक धूप, एल्कोहल, ओस्ट्रोजन जो मादा हारमोन होता है तथा नींद की गोलियां इसे नष्ट कर सकते हैं । Vitamin B12 का अभाव लगातार अवशोषण की समस्या के कारण होता है न कि भोजन की अनुपयुक्तता के कारण । आंतों में इसके अवशोषण के लिये गैस्ट्रिक जूस को पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होना चाहिए । कैल्शियम तथा प्रोटीन से समृद्ध भोजन इस विटामिन को अवशोषित करने में बहुत मददगार होता है । विटामिन बी12 की वह मात्रा जिसकी आवश्यकता शरीर को तुरंत नहीं होती, यकृत में जमा हो जाती है । यकृत इस पोषक तत्व का सापेक्षरूप से पर्याप्त मात्रा में भंडारण कर सकता है । Vitamin B12 की लगभग 30 मा. ग्रा. मात्रा रोज़ मूत्र में उत्सर्जित हो जाती है । जब इसे 1000 मा. ग्रा. की बड़ी मात्रा में इन्जैक्शन द्वारा दिया “. जाता है तो इसका 90 प्रतिशत उत्सर्जित हो जाता है । यह विटामिन नवजात शिशुओं के लिये स्तनपान में भी स्रावित होता है ।

Vitamin B12 के शरीर में कार्य:

विटामिन बी6 के समान Vitamin B12 भी लाल रक्तकोशिकाओं के उत्पादन तथा पुनर्निर्माण में आवश्यक होता है । यह केंद्रीय स्नायु तंत्र के सही प्रकार से कार्य करने के लिये जरूरी होता है । यह एकाग्रता, स्मृति और संतुलन को सुधारता है तथा चिड़चिड़ेपन को कम करता है । विटामिन बी12 वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के उचित उपयोग के लिये आवश्यक होता है जो शरीर को बनाते हैं । यह बच्चों की शारीरिक वृद्धि करता है तथा भूख बढ़ाता है । यह विटामिन अनेक पाचन तथा इंजाइम प्रक्रियाओं में योगदान देता है । यदि हड्डी-मज्जा में स्थित कोशिकाओं को सक्रिय रोग-प्रतिरोधकों के रूप में परिपक्व करना है तो Vitamin B12 तथा फोलिक एसिड की पर्याप्त मात्रा आवश्यक है ।

Vitamin B12 के स्रोत:

मांस, यकृत, अंडे, समुद्री जन्तु तथा डेरी उत्पाद इस विटामिन के मूल्यवान स्रोत हैं । शाकाहारी लोगों को सलाह दी जाती है कि वह अपने आहार में दूध की मात्रा बढ़ाएं या Vitamin B12 को गोली के रूप में लें । इसके कुछ मुख्य स्रोतों की लिस्ट निम्नवत है ।

मछली मांस तथा पोल्ट्री उत्पाद जिनमें Vitamin B12 पाया जाता है  

  • भेड़ का यकृत
  • बकरे का यकृत
  • ताजा समुद्री केकड़ा
  • अंडे की जर्दी
  • बकरे का मांस
  • मटन
  • अंडे
  • भैंस का मांस

दूध के उत्पाद जिनमे Vitamin B12 पाया जाता है

  • स्किम्ड दूध पाउडर
  • भैंस का दूध
  • गाय का दूध
  • गाय दूध से निर्मित दही
  • भैंस के दूध से निर्मित दही

Vitamin B12 की कमी के लक्षण:

Vitamin B12 की कमी से पर्निसीयस रक्ताल्पता हो सकती है जो हानिकारक होती है । इसके कारण बच्चों में कम भूख, कम वृद्धि, दीर्घकालिक थकान, खट्टा मुंह, संवेदनहीनता या अकड़न, मानसिक ऊर्जा की क्षति तथा ध्यान स्थिर करने में कठिनता हो सकती हैं ।  विटामिन बी12 की न्यूनता से शरीर की प्रत्येक कोशिका प्रभावित होती है लेकिन इसकी सर्वाधिक कमी उन ऊतकों में महसूस की जाती है जहां कोशिकाएं तीव्रता से विभाजित होती हैं, जैसे हड्डी मज्जा के रक्त-निर्माता ऊतकों में तथा पेट-आंत के मार्ग (gastro-intestinal tract) में । इसके कारण स्नायु तंत्र भी प्रभावित होता है तथा रीढ़ में नाड़ी तंतुओं तथा परिधिक नाड़ियों में विकार आ सकता है ।

Vitamin B12 के स्वास्थ्य लाभ

Vitamin B12 की 6 मा. ग्रा. से 150 मा. ग्रा. की मात्रा मुख द्वारा दी जाती है । जब इसे इतनी मात्रा में लिया जाता है तो यह निम्न के इलाज में सहायता करती है  एकाग्रता में कमी, थकान, तनाव, अनिद्रा, भूख का अभाव, वज़न में कमी तथा कमज़ोर स्मृति । इस विटामिन को मुख द्वारा लेने से अवशोषित करना कठिन होता है इसलिये अधिकांश चिकित्सक इसे इंजेक्शन के रूप में 100 मा. ग्रा. से 1000 मा. ग्रा. की मात्रा में देते हैं ।

 रक्ताल्पता में फायदेमंद (Anaemia) :

जब इस विटामिन को इंजेक्शन द्वारा दिया जाता है तो यह पर्निसियस रक्ताल्पता के मामलों में पूर्ण तथा संतोषजनक इलाज करता है । इंजेक्शन द्वारा सप्ताह में दो बार Vitamin B12 की 1,000 मा. ग्रा. की खुराक तब तक दी जाती है जबतक हेमोग्लोबिन अपने सामान्य स्तर पर न आ जाये । इसके बाद 1,000 मा. ग्रा. का इंजेक्शन प्रति 6 सप्ताह पर दिया जाता है ताकि रोगी का अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखा जा सके । यह खुराक अधिक प्रतीत हो सकती है परन्तु इस विटामिन का अधिकांश भाग मूत्र में उत्सर्जित हो जाता है । इसी प्रकार की खुराक की जरूरत रीढ़ के उप-तीव्र अपकर्ष में भी होती है जिसमें रीढ़ में उपस्थित नाड़ीय आवेग प्रभावित होते हैं ।

धूम्रपान जनित रोगों में फायदेमंद  :

अध्ययन दर्शाते हैं कि धूम्रपान करने वालों में Vitamin B12 तथा फोलिक एसिड की कमी होती है । 73 दीर्घकालिक धूम्रपान करने वाले मामले देखे गये जिनके फेफड़ों के स्रवण में पूर्व-कैंसर कोशिका परिवर्तन थे । इनमें से आधे लोगों को विटामिन बी12 तथा फोलिक एसिड सप्लीमेंट चार महीनों के लिये दिए गए तथा आधे लोगों को निर्गुण दवा (placebo) दी गयी । चार महीने बाद, फेफड़ों की पुनर्परीक्षा में देखा गया कि जिन्हें विटामिन द्वारा इलाज दिया गया, उनमें पूर्व-कैंसर परिवर्तन उन दूसरे रोगियों की अपेक्षा कम थे जिन्हें प्लेसेबो दिया गया था ।

सावधानियां : Vitamin B12 की कोई ज्ञात विषाक्तता नहीं है चाहे इसे बड़ी मात्रा में भी दिया जाये ।

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