Vitamin B3 के फायदे, स्रोत, कमी के लक्षण एवं रोगों का ईलाज

Vitamin B3 या नायसिन B Complex समूह का एक महत्वपूर्ण विटामिन है | 1867 से जैविक रसायनविज्ञानी इसे निकोटोनिक एसिड के रूप में जानते थे | इसके इतिहास की बात करे तो 1913 में फंक ने इसे खमीर से अलग किया था | लेकिन Vitamin B3 की ओर ध्यान उस समय गया जब Conrad Arnold Elvehjem ने 1937 में इसे यकृत से अलग कर दिया | इसके बाद ही कुछ वैज्ञानिकों ने दर्शाया की नायसिन के इस्तेमाल से पेलेग्रा (pellagra), डायरिया तथा मानसिक अवसाद जैसे आमतौर से देखे जाने वाले लक्षणों में कमी आती है । हालांकि तंबाकू में पाए जाने वाले निकोटीन से निकोटिनिक एसिड रासायनिक रूप से संबंधित है लेकिन इसमें तम्बाकू के गुण नहीं होते हैं । यही कारण है कि किसी प्रकार के भ्रम से बचने के लिये इसे नायसिन कहा जाता है । नायसिन गंधरहित, सफेद, स्फटिक पदार्थ होता है जो पानी में आसानी से घुल जाता है । यह गरमी, आक्सीकरण तथा क्षारीय तत्वों का प्रतिरोधी होता है । यह सर्वाधिक स्थिर विटामिनों में से एक है ।  भोजन पकाने में नायसिन की क्षति लगभग न्यूनतम होती है लेकिन भोजन पकाने में प्रयोग होने वाला पानी यदि फेंक दिया जाये तो इसकी प्रचुर मात्रा नष्ट हो जाती है । मिश्रित और पके हुये भोजन में से 15 से 25 प्रतिशत नायसिन नष्ट हो जाता है । सल्फर ड्रग, एल्कोहल, भोजन प्रक्रिया तथा नींद की गोलियों से यह विटामिन नष्ट हो सकता है । Vitamin B3 अर्थात नायसिन पेट तथा आंतों से अवशोषित होता है तथा सभी ऊतकों में एकत्र होता है । नायसिन की अधिकांश मात्रा साल्ट के रूप में और कुछ मात्रा नायसिन के रूप में ही मूत्र से निष्कासित होती है ।

Vitamin b3 ke fayde srot

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Vitamin B3 या नायसिन के फायदे एवं कार्य (Benefits of Vitamin B3 In Hindi):

Vitamin B3 के फायदे एवं इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं |

  • Vitamin B3 या नायसिन उचित रक्त संचार तथा स्वस्थ स्नायु तंत्र के लिये महत्त्वपूर्ण है ।
  • यह पेट तथा आंतों के सामान्य कार्य को बनाए रखता है और कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के उचित पाचन के लिये बेहद आवश्यक है ।
  • Vitamin B3 या नायसिन स्वस्थ त्वचा को बनाए रखने में मदद करता है ।
  • नायसिन रक्तवाहिनियों को फैलाता है तथा परिधिक शिरातंत्र के रक्त प्रवाह में वृद्धि करता है ।
  • यह विटामिन सेक्स तथा अन्य हारमोनों के संश्लेषण के लिये भी आवश्यक होता है जैसे ओस्ट्रोजन, प्रोजीस्टेरोन तथा टेस्टोस्टेरोन, साथ ही साथ कोर्टीसोन, थायरोक्सिन व इंसुलिन ।

Vitamin B3 या नायसिन के स्रोत (Sources of Vitamin B3 In Hindi):

साधारणतया पशुओं से प्राप्त होने वाले भोजन इस विटामिन से समृद्ध हैं  । जैसे भेड़ का यकृत, चर्बी रहित मीट, झींगा, पोर्क तथा गाय का दूध इत्यादि । इसके अलावा चावल की भूसी, चावल, गेहूं, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, बादाम तथा चिल्गोज़ा तथा हरी सब्जियां जैसे शलजम व चुकंदर के पत्ते, गाजर, अजवायन और अरबी के पत्ते इस विटामिन के समृद्ध शाकाहारी स्रोत हैं । इस विटामिन के प्राकृतिक स्रोत खमीर तथा भूसी हैं। गेहूं पीसने के बाद छानने में चौकर के निकलने के कारण नायसिन की मात्रा सफेद आटे में बहुत कम रह जाती है । तो आइये जानते हैं Vitamin B3 या नायसिन किन किन खाद्य पदार्थों में पाया जाता है |

अनाज जिनमे Vitamin B3 पाया जाता है

  • चावल की भूसी
  • जौ
  • गेहूं का आटा
  • फुले हुए चावल
  • पोहा
  • हाथ से कूटे हुए चावल
  • पिसे हुए चावल
  • ज्वार
  • बाजरा
  • सूखी मक्का
  • रागी
  • गेहूं जीवाश्म

दालें तथा फलियाँ जिनमे Vitamin B3 पाया जाता है

  • सोयाबीन
  • अरहर
  • भुने हुए मटर
  • काला चना
  • दली हुई केसरी
  • मसूर दाल
  • दली हुई मूंग
  • दला हुआ काला चना
  • दली हुई अरहर
  • दली हुई उड़द
  • मोठ

सब्जियां जिनमें Vitamin B3 पाया जाता है

  • शलजम के पत्ते
  • गाज़र के पत्ते
  • चुकंदर के पत्ते
  • आलू
  • सूखी कमलककड़ी

सूखे मेवे तथा तिलहन जिनमे Vitamin B3 अर्थात नायसिन पाया जाता है |

  • भूनी हुई मूंगफली
  • सूरजमुखी के बीज
  • राई
  • बादाम
  • चिलगोजा
  • सूखा हुआ नारियल
  • अखरोट
  • काजू
  • पिस्ता

फल जिनमे Vitamin B3 पाया जाता है

  • शरीफा
  • पके हुए आम

मांस मछली जिनमे Vitamin B3 पाया जाता है

  • भेड़ के यकृत में
  • मटन में
  • झींगा मछली में
  • पोर्क में
  • पोंफ्रेंट सफ़ेद
  • चारी मछली

Vitamin B3 अर्थात नायसिन की कमी के लक्षण (Deficiency of Vitamin B3 in Hindi):

Vitamin B3 या नायसिन की कमी के कुछ मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं |

  • नायसिन की कुछ कमी के कारण जीभ पर आवरण का बनना शुरू हो जाता है |
  • मुंह में घाव और छाले हो जाते हैं |
  • खुजली, घबराहट हो जाती है |
  • त्वचा पर दाने, डायरिया, भुलक्कड़पन अनिद्रा इत्यादि लक्षण दिकाही देने लगते हैं |
  • दीर्घकालिक सिरदर्द शुरू हो जाता है |
  • पाचन सम्बन्धी व्याधियां तथा रक्ताल्पता हो सकते हैं । इ
  • सकी दीर्घकालिक और तीव्र कमी के कारण न्यूरेस्थेनिआ हो सकता है |
  • इसके अलावा Vitamin B3 की कमी से स्नायु तंत्र की कमज़ोरी, मानसिक अवसाद, तनाव, मानसिक सुस्ती तथा बेहोशी आदि रोग हो सकते हैं ।

Vitamin B3 अर्थात नायसिन से रोगों का ईलाज:

नायसिन की 100 मि.ग्रा. या 1,00,000 मा. ग्रा. की मात्रा को प्रत्येक भोजन के साथ लेना पेलेग्रा, माइग्रेन, सिरदर्द, घबराहट से होने वाला उच्च रक्तचाप, उच्च रक्त कोलेस्ट्रोल (high blood cholesterol), आर्टिओस्क्ले रोसिस (arteriosclerosis) तथा डायरिया में लाभदायक होता है । इस खुराक को बी समूह (B Complex) के अन्य विटामिनों के साथ लेना चाहिए ।

Vitamin B3 द्वारा पेलेग्रा का ईलाज  :

नायसिन की प्रसिद्धि इस बात में है कि यह पेलेग्रा की रोकथाम तथा इलाज करता है । इस बीमारी के प्राथमिक लक्षणों जैसे भूख में कमी, वज़न का कम होना तथा सामान्य कमज़ोरी आदि को शीघ्रता से सही किया जा सकता है । अन्य लक्षणों के सही होने में कुछ अधिक समय लगता है जैसे खट्टा मुंह, पाचन तथा स्नायविक अनियमितता, त्वचा पर फोड़े विशेषकर हाथों, बाजुओं, पैरों पर । Vitamin B3 या नायसिन का 10 मि.ग्रा. या 10,000 मा. ग्रा. का प्रतिदिन सेवन स्थानिक पेलेग्रा का इलाज करने के लिये पर्याप्त होता है ।

Vitamin B3 द्वारा माइग्रेन का ईलाज :

नायसिन को माइग्रेन का इलाज करने में उपयोगी पाया गया है । जो लोग माइग्रेन तथा घबराहट से होने वाले उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, उन्हें नायसिन अर्थात Vitamin B3 की बड़ी मात्रा लेने पर आराम मिलता है ।

हृदय-संबंधित विकार का ईलाज :

नायसिन एंजिना पेक्टोरिस (angina pectoris) में आराम पाने के लिये लाभदायक है । यह सेरेब्रल थ्रोंबोसिस (cerebral thrombosis) में भी उपयोगी है जो मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों में रक्त के थक्के जमने के कारण होता है।  मस्तिष्क में रक्त के थक्के जमने के मामले, जो सेरेब्रल धमनियों के फटने के कारण हुये थे, उन्हें पुर्तगाल के लिस्बन विश्वविद्यालय के डा. दिएगो फुर्टाडो ने नायसिन अर्थात Vitamin B3 द्वारा ठीक होते पाया था ।

नायसिन द्वारा उच्च रक्तचाप का ईलाज  :

नायसिन रक्तवाहिनियों को फैलाता है जिससे रक्तचाप-सम्बन्धी परिवर्तन सही हो जाते हैं । यह विशेषरूप से घबराहट द्वारा होने वाले उच्च रक्तचाप की रोकथाम करने में लाभदायक है ।

उच्च रक्त कोलेस्ट्रोल का ईलाज  :

नायसिन का प्रयोग उच्च रक्त कोलेस्ट्रोल को कम करने में होता है । सेंट विंसेंट अस्पताल, डबलिन के डी. जी. मूरे फिट्जरेल्ड द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बताया गया था कि जिन रोगियों में रक्त कोलेस्ट्रोल की मात्रा 530 मि.ग्रा. से अधिक थी, उनमें Vitamin B3 या नायसिन की 3 ग्राम प्रतिदिन तीन बार की खुराक से रक्त कोलस्ट्रोल को 230 मि.ग्रा. के स्तर पर लाया गया था ।

Vitamin B3 से डायरिया का ईलाज :

डायरिया अनेक प्रकार की पोषण सम्बन्धी कमी विशेषकर Vitamin B3 या नायसिन की कमी से होता है । इस विटामिन को बी समूह के अन्य विटामिनों के साथ नैदानिक मात्रा में देने से डायरिया का इलाज किया जा सकता है ।

Vitamin B3 या नायसिन लेने में सावधानियां :

लंबे समय तक अधिक मात्रा में Vitamin B3 या नायसिन के सेवन से हिस्टामिन (histamine) पैदा हो सकते है जिससे त्वचा सुर्ख हो जाती है । तीव्र खुजली (pruritis) तथा पेट व आंत में गड़बड़ हो सकती है । यदि नायसिन को 3 ग्राम प्रतिदिन की खुराक में लिया जाये तो यह रक्त में यूरिक एसिड तथा ग्लुकोज़ को बढ़ाता है ।

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About Author:

Post Graduate from Delhi University, certified Dietitian & Nutritionists. She also hold a diploma in Naturopathy.

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