Yoga Myth Facts Hindi- योग भ्रांतियां एवं तथ्य |

Yoga Myth and Facts से हमारा आशय योगा के बारे में समाज में व्याप्त भ्रामक धारणाओं एवं तथ्यों से है | योग का विकास जीवन जीने की एक कला के रूप में विकसित हुआ, लेकिन हमारे समाज में योगा समबन्धि अनेक भ्रामक धारणायें फैली हुई हैं जिनका विश्लेषण हम आज अपने इस लेख के माध्यम से करने वाले हैं | योग के बारे में लोग तरह तरह की बातें कह सकते हैं लेकिन सच्चाई यह है की योग किसी भी मनुष्य के तन, मन को सुन्दर एवं स्वच्छ बनाने का एक सहज एवं सुलभ मार्ग है | वर्तमान में भी योग के माध्यम से लोगों द्वारा अपने तन, मन को स्वच्छ बनाने का कार्य निरंतर जारी है लेकिन साथ ही कुछ भ्रामक धारणाओं के चलते मनुष्य के मन में योग की छवि कुछ भी बन सकती है | इसलिए इसी बात के मद्देनज़र आज हम अपने Yoga Myth and Facts in Hindi नामक लेख में भ्रांतियों एवं तथ्यों के बारे में जानेंगे |

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Yoga Myth and facts in Hindi:

हालांकि योगा के बारे में भ्रामक धारणाएं या मिथक बहुत ज्यदा प्रचलित होंगे लेकिन यहाँ पर हम कुछ प्रचलित भ्रांतियों का ही वर्णन एवं तथ्यों अर्थात Yoga Myth and facts के बारे में वार्तालाप करेंगे |

Yoga Myth 1:  योग केवल साधू सन्यासियों के लिए है सामान्य व्यक्ति के लिए यह नहीं है |

Facts: यह गलत धारण है योग को सामान्य व्यक्ति से लेकर साधू संत सभी अपना सकते हैं |

Myth 2: योग के लिए आदमी को ब्रह्मचारी होना चाहिए अर्थात योग के लिए ब्रह्मचर्य आवश्यक होता है |

Facts : योग का अभ्यास ब्रह्मचारी से लेकर शादीशुदा अर्थात विवाहित व्यक्ति भी कर सकते हैं |

Myth 3: योग के लिए संन्यास आश्रम अर्थात घर छोड़कर एकांतवास की आवश्यकता होती है |

Facts: यह सही नहीं है गृहस्थ आश्रम में रहकर भी योग किया जा सकता है |

Yoga Myth 4: योगा का सम्बन्ध केवल और केवल हिन्दू धर्म से है |

Facts: योग को किसी भी वर्ण, धर्म या जाति से जोड़ना बिलकुल गलत है क्योंकि योग एक प्रायोगिक कला है इसलिए हर व्यक्ति चाहे वह किसी धर्म, जाति, वर्ण से जुड़ा हुआ हो अपने आत्म उत्थान के लिए इसका उपयोग कर सकता है |

Myth 5: योग में केवल आसन एवं प्राणायाम ही सम्मिलित हैं अर्थात केवल आसन और प्राणायाम ही योग है |

Yoga Facts: बहुत सारे लोग आसन, प्राणायाम को ही योग समझकर पूरी जिन्दगी इन्ही का अभ्यास करते हैं जबकि वास्तविकता यह है की योग एक विस्तृत विषय है | महर्षि पतंजलि ने योग का विस्तार यम से लेकर समाधि तक अष्टांग मार्ग के रस्ते के तौर पर किया है जिसमे उन्होंने आसन, प्राणायाम को योग का केवल दो अंग मात्र माना है |

Yoga Myth 6:योग एक चिकित्सा शास्त्र है इसलिए इससे बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं |

Facts: योग कोई चिकित्सा शास्त्र नहीं है बल्कि योग के अंतिम लक्ष्य की और अग्रसित होने में नि: योगांगो का उपयोग होता है जिससे योग करने वाले मनुष्य को विभिन्न बीमारियों से छुटकारा स्वत: ही मिल जाता है |

Myth 7: योग में चमत्कार होते हैं इसलिए यह एक चमत्कार है |

Facts: स्वयं योग चमत्कार को साधना के मार्ग में एक बहुत बड़ी बाधा मानता है इसलिए योग किसी के लिए चमत्कार से कम नहीं हो सकता लेकिन यह एक चमत्कार नहीं है |

Myth 8: योग एक व्यायाम करने की विधि है |

Facts: अक्सर लोग सोचते हैं की योग का उपयोग शारीरिक स्वास्थ्य हेतु किया जाता है इसलिए योग कुछ नहीं एक व्यायाम करने की विधि है जबकि यह सत्य नहीं है क्योंकि योग का लक्ष्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं अपितु मानसिक व अध्यात्मिक लाभ के लिए भी किया जाता है |

उपर्युक्त Yoga Myth and facts का विश्लेषण करने पर ज्ञात होता है की योग एक सरल एवं सामान्य कला है जिसे किसी भी धर्म, वर्ण, जाति का व्यक्ति चाहे वह गृहस्थ हो ब्रहमचारी हो महिला हो या पुरुष इसका नियमित अभ्यास कर सकते हैं | इसलिए उपरोक्त सभी Yoga Myth को त्यागकर मनुष्य को चाहिए की योग के प्रति एक नवीन और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए |

 

 

 

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